वीओआई (यूपी-उत्तराखंड) लांच : बिहार-झारखंड लांच करने की तैयारी : इसी सेटअप-संसाधन में कई नए चैनल लांच करने की रणनीति : चैनल ठेके पर दिए जाएंगे या फिर बिकेंगे : कई महीनों से सेलरी के लिए तरस रहा है स्टाफ
वीओआई, छत्तीसगढ़ के बिकने की खबर है। पता चला है कि रायगढ़ की एक कंपनी ‘हेलो मीडिया’ वीओआई, छत्तीसगढ़ को पांच साल के लिए ठेके पर लिया है। डील की रकम को गुप्त रखा गया है। कुछ दिनों पहले नई कंपनी ‘हेलो मीडिया’ ने वीओआई के रायपुर आफिस का पूरा सामान टेकओवर कर लिया है। नई कंपनी ने नई टीम बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि ‘हेलो मीडिया’ ने ईटीवी के स्ट्रिंगर अभिषेक झा को ब्यूरो चीफ बना दिया है। विलासपुर की जिम्मेदारी संतोष सिंह को दी गई है। संतोष भी हाल-फिलहाल तक ईटीवी के स्ट्रिंगर थे।
विश्वस्त सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक ‘हेलो मीडिया’ हर महीने एक निश्चित रकम वीओआई प्रबंधन को मुहैया कराएगी और बदले में चैनल का सारा कामधाम अपने हिसाब से संचालित करेगी। आफिस, सामान, सेलरी का खर्च हेलो मीडिया कंपनी ही उठाएगी। मार्केटिंग और बिजनेस का काम यही कंपनी देखेगी। बताया जा रहा है कि वीओआई, एमपी को भी बेचने की तैयारी चल रही है। ज्ञात हो कि वीओआई, छत्तीसगढ़ के ब्यूरो चीफ देवेंद्र तोमर ने समय पर सेलरी न मिलने और बिजनेस टारगेट दिए जाने के खिलाफ पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया था। उनके पीछे-पीछे रुद्र अवस्थी ने भी वीओआई को बाय-बाय बोला। अब बचे हैं कैमरामैन देशमुख। बताया जा रहा है कि देशमुख की सेलरी नए प्रबंधन ने कम कर दी है।
वीओआई से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि आर्थिक संकट से जूझ रहा त्रिवेणी प्रबंधन अपने मीडिया वेंचर से जल्द से जल्द और ज्यादा से ज्यादा फायदा पाना चाहता है। इसी खातिर अब हर चैनल के खरीदार/ठेकेदार तलाशे जा रहे हैं। वीओआई, छत्तीसगढ़ की तरह भविष्य में अन्य चैनलों को भी बेचा या ठेके पर दिया जा सकता है। प्रबंधन अब तक तैयार हो सके इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए कई नए रीजनल चैनल लांच करने में जुटा है ताकि इसी संसाधन और सेटअप में नए रीजनल चैनल बिक्री/ठेके के लिए खड़े किए जा सकें। पिछले दिनों वीओआई, यूपी-उत्तराखंड लांच हुआ और अब वीओआई, बिहार-झारखंड लांच करने की तैयारी है। उल्लेखनीय है कि त्रिवेणी ग्रुप का मीडिया वेंचर लांचिंग के बाद से ही विवाद और अनिश्चितता का शिकार है। आंतरिक गड़बड़ियों और अब मंदी की मार के चलते त्रिवेणी ग्रुप आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। प्रबंधन के पास अपने स्टाफ को देने के लिए पैसा नहीं है। दूरदराज के आफिसों के स्टाफ को छोड़िए, नोएडा मुख्यालय के मीडियाकर्मी भी कई महीनों से सेलरी पाने के लिए तरस रहे हैं।











