: इंटरनेट के माध्यम से जीवन साथी चुनने की भूल न करें : लड़कियों को शादी के नाम पर भी लूटा जा रहा : इंटरनेट के माध्यम से बेहतर जीवन साथी चुनने की भूल न करें, क्योंकि इंटरनेट के क्रेज के चलते बड़ी संख्या में लड़कियों की जिदंगी बरबाद हो चुकी है, इसलिए इंटरनेट पर दी गयी जानकारी की व्यक्तिगत स्तर से जांच पड़ताल किये बगैर शादी करने की भूल कतई न करें। सुयोग्य या मनपसंद जीवन साथी चुनने के लिए हाईप्रोफाइल तबका पत्र-पत्रिकाओं के साथ इंटरनेट का भी प्रयोग करने लगा है, लेकिन जरूरी नहीं है कि नेट पर दी जा रही जानकारी एक दम सही हो।
अभिवावकों या लडक़ा-लडक़ी को एक बार सभी तरह की जानकारी की जांच पड़ताल व्यक्तिगत स्तर से जरूर कर लेनी चाहिए, क्योंकि लुभावनी जानकारी देकर धनी परिवार की लड़कियों को फांसने के गिरोह भी चल रहे हैं, जो शादी के बाद दहेज के सामान सहित अचानक गायब हो जाते हैं और फिर ऐसे लोगों का कानून भी कुछ अधिक नहीं बिगाड़ पाता। ऐसे ही गिरोह का पुणे पुलिस स्टेशन क्षेत्र की निवासी व पूर्व फौजी अफसर की बेटी रजनी श्रीवास्तव (काल्पनिक नाम) भी शिकार हो चुकी है। उसने बताया कि शादी डॉट कॉम के माध्यम से उसने एक लडक़ा पसंद किया और पिता ने रिश्ते बात की तो लड़का व उसके परिजनों ने उसे पसंद कर लिया। उसने बताया कि अभिषेक चित्रांशी ने स्वयं का जन्म स्थान उत्तर प्रदेश के वाराणसी व निवास स्थान पश्चिम बंगाल के बंगलौर में बताया, जहां उसकी 4 जनवरी 2009 को शादी हुई और करीब तीस लाख से अधिक का जेवर, सामान आदि दिया गया, पर आठ दिन बाद उन सब का कहीं पता ही नहीं चला और वह लड़का आस्ट्रेलिया भाग गया।
उसने बताया कि बाद में पता चला कि शादी में शामिल होने वाले सभी रिश्तेदार किराये पर ही लाये गये थे। उसने बताया कि बंगलौर के ही थाने में उसने अभिषेक चित्रांश, उसकी बहन आदि के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई तो पुलिस ने उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जो कुछ दिन के बाद जमानत पर रिहा हो गया। मुकदमा अदालत में विचाराधीन है और सभी के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं, लेकिन आरोपियों के विदेश में होने के कारण कुछ नहीं हो पा रहा है और वह अपने भाग्य पर आज तक आंसू बहा रही है। यह एक रजनी श्रीवास्तव की कहानी नहीं, बल्कि तमाम लड़कियों की कहानी है, इसलिए रिश्ता बनाने से पहले ही पूरी छानबीन जरूर कर लें।
रेनुका शर्मा मुंबई में लेखिका और स्क्रिप्ट राइटर हैं.












एकाग्री
February 24, 2011 at 1:15 pm
बाकई बहुत अच्छा मुद्दा उठाया आपने रेणुका जी
ekagri
February 25, 2011 at 10:23 am
bahut achchha likhaa maidam