दैनिक जागरण जैसा राष्ट्रीय अखबार जब चाहे तब मनचाही खबर लिख सकता है. किसी को कहीं भी मौजूद करा सकता है. जी हाँ कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है दैनिक जागरण के 22 फरवरी के गुडगाँव सिटी संस्करण में. दरअसल दैनिक जागरण के 22 फरवरी के संस्करण में पेज नम्बर 16 पर एक खबर छपी है कि ” दीपेंद्र ने किया डी-कॉट शोरुम का शुभारम्भ”.
इस खबर में दीपेंद्र हुड्डा के स्वागत की तस्वीर भी लगाई गई और इस खबर में लिखा है कि सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने रविवार को गुडगाँव में डी -कॉट शोरुम का उदघाटन किया व इस मौके पर प्रदेश के खेल एवं युवा मामलों के राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) सुखबीर कटारिया, मौजूदा विधायक व पूर्व मंत्री राव धर्मपाल भी मौजूद थे. साथ में और भी कई बड़े नेताओं की उपस्थिति इस शोरुम में दिखाई गई, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. दैनिक जागरण में जो ये खबर छपी है ये खबर पूरी तरह से गलत और झूठी है. गुड़गांव में डी-कॉट शोरुम के उद्घाटन समारोह में किसी प्रकार का कोई नेता नहीं आया था. जबकि अखबार में छपा है कि दीपेन्द्र हुड्डा समारोह में आए. अखबार में छपी फोटो में दीपेन्द्र हुड्डा दिख रहे हैं, लेकिन जो फोटो दैनिक जागरण के संस्करण में छपी है.
दरअसल वो फोटो करीब 6 महीने पुरानी है. देखा जाए तो दैनिक जागरण अपने किसी जानकार को फायदा पहुंचाने के लिए किसी भी फर्जी खबर को चिपका देता है. सही में आज के समय में पत्रकारिता, पत्रकारिता नहीं रह गई बल्कि चाटुकारिता बन चुकी है. किसी को आर्थिक फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी खबर को भी अखबार वाले छापने से गुरेज नहीं करते. इसके बावजूद यह अखबार अपने आप को नम्बर एक होने का दावा करता है. अखबार वाले फर्जी खबरें छापते हैं और लोग इन पर विश्वास करते हैं. ऐसे में आम आदमी कहां जाए जो सुबह उठते ही अखबार पढ़ता है कि उसे देश भर की खबरें पता चले लेकिन अफसोस की उसको ऐसी फर्जी खबरों से रूबरू होना पड़ता है, जैसी कि दैनिक जागरण ने अपने 22 फरवरी के गुड़गांव सिटी संस्करण में छापी है. जिले डीपीआरओ कार्यालय ने भी माना कि उनके कार्यालय में ऐसी कोई सूचना नहीं थी और ना ही राज्यमंत्री सुखबीर कटारिया का कोई कार्यक्रम उस दिन था.

गुड़गांव से एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.












vineet kumar
February 24, 2011 at 11:34 am
झारखण्ड में प्रकाशित हो रहे दैनिक जागरण को आकर देखिये, इस बात को भूल जायेंगे. सही में आज के समय में पत्रकारिता, पत्रकारिता नहीं रह गई बल्कि चाटुकारिता बन चुकी है. किसी को आर्थिक फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी खबर को भी अखबार वाले छापने से गुरेज नहीं करते. इसके बावजूद यह अखबार अपने आप को नम्बर एक होने का दावा करता है.ये भी सोचने की बात है कि पहले लोग व्याकरण जानने या वाक्य में गलती जानने के लिए अखबार पढ़ते थे, पर अब तो ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें व्याकरण का क, ख, ग भी नहीं आता और वे बड़े पत्रकार बन बैठे हैं. जागरण में आज ही चतरा, कोडरमा और हजारीबाग पेज देख लीजिये, कितनी गलती है, आप गिन नहीं पाएंगे.
s
February 24, 2011 at 1:03 pm
kya kare bechara ab koi khabar nahi to yahi sahi
Deepak
February 24, 2011 at 3:35 pm
[b][u]इनके लिए ये कोई नई बात , कुछ भी फर्जी वादा कर सकते है शायद ये भूल गए पत्रकारिता का मतलब[/b] [/u]
rajnish
February 25, 2011 at 9:08 am
q aisi galti karte ho ? no.1 news paper ka naam q badnaam karte ho.
संजय राणा
February 25, 2011 at 3:14 pm
ऐसी झूठी व् भ्रामक खबरें छापने वाली अखबारों के संपादकों के विरूद्ध सख्ती से कार्यवाही होनी चाहिए, ऐसे कैसे जो कुछ भी कहीं भी छाप दिया जाए जिसका सच से कोई दूर दूर का नाता भी न हो ,
afaque
April 15, 2011 at 9:55 am
sampadkon ko aisi khabar chapne par achi rakam milti hogi