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दुख-दर्द

लखनऊ में संपादक की डांट से फिर बेहोश हुआ अमर उजाला का पत्रकार!

अमर उजाला में संपादक की डांट ने एक पत्रकार को असहज कर दिया. वो पत्रकार बुरी तरह घबरा गया था. कुछ लोगों का कहना है पत्रकार बेहोश हो गए थे. सूत्रों के अनुसार बनारस के रहने वाले प्रवीण पांडेय अपनी माताजी के बीमार होने पर छुट्टी लेकर घर गए थे. वापस आने में उन्‍हें लेट हो गया. यानी मंजूर छुट्टी से ज्‍यादा समय तक घर पर रह गए. यह बात उनके बॉस को नागवार गुजरी थी.

अमर उजाला में संपादक की डांट ने एक पत्रकार को असहज कर दिया. वो पत्रकार बुरी तरह घबरा गया था. कुछ लोगों का कहना है पत्रकार बेहोश हो गए थे. सूत्रों के अनुसार बनारस के रहने वाले प्रवीण पांडेय अपनी माताजी के बीमार होने पर छुट्टी लेकर घर गए थे. वापस आने में उन्‍हें लेट हो गया. यानी मंजूर छुट्टी से ज्‍यादा समय तक घर पर रह गए. यह बात उनके बॉस को नागवार गुजरी थी.

कल जब अपने ऑफिस पहुंचे तो बॉस को गुस्‍सा आ गया. उन्‍होंने प्रवीण को काफी हड़काया. वहां मौजूद साथियों ने बताया कि गुस्‍से से प्रवीण इतने डर गए की उन्‍हें बेहोशी सी छाने लगी. कुछ लोगों ने उन्‍हें बैठाया. इस दौरान वे काफी घबरा गए थे. पानी पिलाकर उन्‍हें ठीक किया गया. उल्‍लेखनीय है कि इसके पहले भी संपादक की डांट से एक पत्रकार बेहोश हो गया था.

इस बीच चर्चा है कि संपादक महोदय के बारे में की गई शिकायतों की जांच के लिए नोएडा से पांच सदस्‍यीय टीम लखनऊ पहुंची है. इस टीम ने एक होटल में डेरा डाल रखा है. संपादकजी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. हालांकि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. परन्‍तु लखनऊ में इसे लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

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0 Comments

  1. pankaj yadev

    February 26, 2011 at 9:14 am

    yaswant tum madachod ho. tum madarchod kisi ki naukri hane ka kaam karte ho. pancholi ji ke peeche tum madarchod padhe ho, tum unka kuch nahi karo paooge

  2. aseem

    February 26, 2011 at 1:26 pm

    kripya aisa na kia kre .hum kuch chhatra journalism kr rahe hai .ap k nakshe kadam pr chal kr ,bt aksar aisa lgta hai k kya hmne kuch galat kr dia?

  3. sudhir

    February 26, 2011 at 6:25 pm

    hawa me teer mat chalao yashwant

  4. pankaj

    February 26, 2011 at 9:50 pm

    अमर उजाला के लखनऊ दफ्तर का तो हाल ही यही है। यहां के लोगों से पूछिए कि किस तनाव में काम कर रहे हैं। आखिर यहां कर्मचारियों के बेहोश होने की नौबत क्‍यों आई। वह भी एक नहीं, कई लोगों की। अमर उजाला प्रबंधन को यह सोचना चाहिए। साथ ही पंचू को भी, क्‍योंकि ऐसा कर वह कितने महीने और नौकरी चला सकेंगे। सोचो पंचू, सोचो।

  5. अनाम

    February 27, 2011 at 6:08 am

    ये क्या होता जा रहा है अमर उजाला को?

  6. 4

    February 28, 2011 at 12:32 pm

    imandar sampadak ke khilaph aishe hi namakr mirch laga kar muhim chalaya jata hain aur unhe hataya jata hain…
    akhir aisha kyo huwa… pichle wale editor ke sat hi yaha k editorial teem kam nahi kar payee aur bhga di,,,
    amar ujjala ke lucknow ke patrkaro kuch sharm kro yaar….

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