गोरखपुर के जिलाधिकारी खुद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं या उन्हें धरना-प्रदर्शन करने वालों से चिढ़ हो गई है. यह कोई आरोप नहीं बल्कि सच्चाई है. यदि ऐसा नहीं होता तो उनके कार्यालय के सामने स्थित जर्जर इमली के पेड़ को सिर्फ एक नोटिस बोर्ड लगाकर नहीं छोड़ दिया जाता, जबकि पूरा मामला डीएम साहब की संज्ञान में है.
आपको बता दें कि गोरखपुर का कलेक्ट्रेट भवन आजादी के पहले का बना हुआ है. इस भवन के ऊपरी हिस्से पर भवन निर्माण का वर्ष 1905 लिखा हुआ है. इससे साफ है कि इस भवन को बने सौ साल से ज्यादा हो चुके हैं. इसी परिसर में एक इमली का पुराना पेड़ है, जाहिर है कि इसकी उम्र भी सौ साल के आसपास ही होगी. यह पेड़ काफी जर्जर हो गया है. तेज हवा के दौरान इसके छोटे-मोटे डाल अक्सर टूटते रहते हैं.
इसी कलेक्ट्रेट परिसर में डीएम के अलावा पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं एसएसपी तथा अन्य
अधीनस्थों का कार्यालय है. जिससे यहां लोगों की आवाजाही ज्यादा ही बनी रहती है. पुलिस या प्रशासन को अपनी मांगों से अवगत कराने के लिए आम लोग या राजनीतिक दल के लोग इसी विशाल पेड़ के नीचे धरना देते हैं. प्रदर्शन करते हैं. अन्य दिनों में लोग इस पेड़ के नीचे ही बैठते हैं. बराबर इस पेड़ से छोटी-छोटी डालियां टूटती रहती हैं.
प्रशासन एवं जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ल को पूरी तरह से इस खतरे की जानकारी है. तभी इस पेड़ पर एक छोटा सा बोर्ड टांग दिया गया है- ‘यह पेड़ जर्जर हो गया है कृपया इसके नीचे न बैठे आज्ञा से जिलाधिकारी, गोरखपुर.’ इसके बावजूद लोग इसकी अनदेखी कर इस पेड़ के नीचे बैठते हैं तथा धरना-प्रदर्शन का आयोजन करते हैं. क्योंकि इस तरह का दूसरा स्थान कलेक्ट्रेट परिसर में नहीं है.
पिछले साल बरसात में आई अंधड़ में इमली के पेड़ की एक बड़ी डाल टूटकर गिर गई थी. जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान इस तरफ गया. इसके बाद जांच में पाया गया कि यह पेड़ अपनी उम्र सीमा पार कर चुका है तथा इसकी हालत इतनी जर्जर है कि कभी भी यह धराशायी हो सकता है. पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने वन विभाग से भी इस वृक्ष के बारे में राय ली थी. वन विभाग ने इसे जर्जर बताते हुए इस कटवाने की सलाह दी थी. परन्तु अब तक इस पर अमल नहीं किया गया.
अगर यह पुराना वृक्ष खुदा न खाश्ते अचानक गिर गया तो जिलाधिकारी कार्यालय और सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय का भी अधिकांश हिस्सा इसकी चपेट में आएगा. इसमें काम करने वाले सरकारी कर्मचारी भी ऐसे किसी हादसे के शिकार हो सकते हैं. तेज हवाओं के दौरान इन भवनों में काम करने वाले कर्मचारी भी सहमें और डरे रहते हैं. ऐसे में लग रहा है कि अब जिला प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है. अन्यथा इस पेड़ को कब का कटवाकर लोगों को एक निर्मूल आशंका से मुक्त किया जा चुका होता.
इस संबंध में जब धरना-प्रदर्शन करने वालों से बात की गई तो उनका कहना था कि वो अपनी समस्या लेकर कहां जाएं. जिले के आला अधिकारी यहीं बैठते हैं तो आना हमारी मजबूरी है. पिछले दिनों डिप्लोमा इंजीनियस्र संघ का एक दल इसी पेड़ के नीचे धरना-प्रदर्शन के बाद अपना 15 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा था. हिंदू युवा वाहिनी के अरुणेश शाही का कहना है कि वर्तमान जिलाधिकारी से इस मामले में किसी संवेदना की अपेक्षा करना बेकार है.
लेखक एस के सिंह गोरखपुर में पत्रकार हैं.











