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कानाफूसी

कहीं जागरण के न्‍यूज रूम में मारपीट न हो जाए

ऐसा लग रहा है कि दैनिक जागरण, कानपुर पत्रकारों की कब्रगाह बन गया है. जिस दिन से विनोद शील ने काम संभाला है उस दिन से यहाँ कुछ भी सही नहीं हो रहा है. जितेन्द्र त्रिपाठी और संजीव मिश्र जैसे दागदार लोग शील के सलाहकार हो गए हैं. नतीजा, रोज़-रोज़ की बेवजह की किचकिच से तंग आकर लोग जागरण, कानपुर को अलविदा कह रहे हैं. बीते दिनों हुए एक बदलाव में प्रादेशिक डेस्क के लोगों को लोकल डेस्क पर भेज दिया गया और लोकल के लोगों को प्रादेशिक में.

ऐसा लग रहा है कि दैनिक जागरण, कानपुर पत्रकारों की कब्रगाह बन गया है. जिस दिन से विनोद शील ने काम संभाला है उस दिन से यहाँ कुछ भी सही नहीं हो रहा है. जितेन्द्र त्रिपाठी और संजीव मिश्र जैसे दागदार लोग शील के सलाहकार हो गए हैं. नतीजा, रोज़-रोज़ की बेवजह की किचकिच से तंग आकर लोग जागरण, कानपुर को अलविदा कह रहे हैं. बीते दिनों हुए एक बदलाव में प्रादेशिक डेस्क के लोगों को लोकल डेस्क पर भेज दिया गया और लोकल के लोगों को प्रादेशिक में.

हर आदमी को 7 घंटे की नौकरी के अलावा कम से कम 2 घंटे दूसरी डेस्क पर काम करने का आदेश है. लोकल चीफ संजीव मिश्र तो जैसे खुद को सबसे होनहार समझते हुए बाकी सब को मूर्ख साबित करने पर तुले हुए हैं. लोकल की नयी डेस्क के लोगों से भी संजीव आये दिन उलझ रहे हैं. जागरण प्रबंधन भी संजीव-शील और जीतेंद्र के कहने पर सबको मूर्ख मानता है. डेस्क पर इतने लोगों को बदला गया कि अब कोई वहां जाना नहीं चाहता. कई बार अखबार में विज्ञापन देने के बाद बड़ी मुश्किल से जागरण 4 ट्रेनी लड़कों का जुगाड़ कर पाया.

छोटी-छोटी बातों पर डेस्क के लोगों को नोटिस दिए जाते हैं. रिपोर्टरों का हाल धोबी के गधे से बेहतर नहीं है. ताज़े मामले में जूनियर सब एडिटर हरवीर यादव ने भी जागरण को नमस्ते बोल दिया है. बीते 15 दिनों से हरवीर ऑफिस नहीं आ रहे हैं. कुछ दिन पहले ही प्रवीन मोहता भी इस्तीफ़ा दे गए हैं. अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि कुछ और लोग इस्तीफ़ा दे सकते हैं. हालत नहीं बदले तो हो सकता है कि जागरण के न्यूज़ रूम में मारपीट भी हो जाए.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. neetu kewalramani

    March 3, 2011 at 11:38 am

    ye lo, kalam ke madhayam se samaaj ki vishamtaon ko dur karne ka prayaas karne wale patrkar ab aapas mein hi ladne lagaenge to bhai is desh ke logon ko sahi rasta koun dikhayega

  2. ayaz mahmood

    March 3, 2011 at 1:47 pm

  3. ayaz mahmood

    March 3, 2011 at 1:48 pm

  4. Ravi Kant Sharma

    March 5, 2011 at 5:54 am

    I think its all about the problem related with management. They are hiring the journalist on lower grade. So they feel embarrass to see others. as written above Sanjeev Mishra must change his ways of working otherwise he will not be retain his team.Mr Sanjeev must appreciate the new ideas of journalist,because this glorious position is based on indepandent thoughts.
    I think Sanjeev will take it as a positive feedback to improvise the situation.

  5. RV

    March 5, 2011 at 10:07 am

    sahi keh rahe hai ye patrakar mahoday jagran ko kuch logo ne akhada bana dala hai jahan roj roj naye dav-pech chal kar uth-patak chala karti hai. jiska khamiyaza bhugatna padta hai un logo ko jo ki apne kaam se prem karte hai or usi ki khate hai. magar ye haram ki jugad wale logo ko to shoshan karne me maharat hasil hai…..

  6. राजीव शर्मा

    March 6, 2011 at 3:31 am

    सताये हुये लोग नौकरी क्यों नहीं छोड़ देते, अखबार खुद बन्द हो जायेगा..

  7. shishir tripathi

    April 8, 2011 at 6:32 am

    ye jagran ka bhokali satya hai….

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