: बीएजी ने आयोजित किया ‘मीडिया फेस्ट24’ : बीएजी नेटवर्क के नोएडा परिसर में मीडिया स्कूल आईसोम्स का “मीडिया फेस्ट 24” आयोजन चल रहा है। तीन दिवसीय इस फेस्टीवल में एनसीआर के विभिन्न पत्रकारिता संस्थान और कालेज के छात्र बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे है। 7 मार्च से 9 मार्च तक बीएजी नेटवर्क द्वारा आयोजित “मीडिया फेस्ट 24” का मकसद पत्रकारिता के छात्रों को एक खुला मंच देना है, जिसके जरिए वो अपने सवालों का जबाव मीडिया के दिग्गजों से जान सके। इस फेस्टीवल में छात्रों की प्रतिभा को उभारने के लिए परिचर्चा, नुक्कड़ नाटक, पीस-टू-कैमरा, रेडियो जॉकी कम्प्टीशन, फोटोग्राफी, डाक्युमेन्ट्री और फिल्म का कम्पटीशन रखा गया है।
बीएजी नेटवर्क के “मीडिया फेस्ट 24” में पत्रकारिता, फिल्मी जगत और मैनेजमेंट से जुड़े़ कई दिग्गज शामिल होकर पत्रकारिता के छात्रों का हौसला बढ़ाया। मीडिया की समाज में भूमिका, करप्शन, मीडिया में करियर एक चुनौती जैसे विषयों पर टेलीविजन और प्रिंट के कई संपादकों के साथ छात्रों का सीधा इन्टरेक्शन कराया गया। इसके अलावा फेस्टीवल में मीडिया क्वीज, सिगिंग कम्प्टीशन और ऐड मेड कम्प्टीशन भी रखा गया। इसका मकसद छात्रों की प्रतिभा को उभारना था। बीएजी नेटवर्क के “मीडिया फेस्ट 24” में आईसोम्स, जामियामीलिया, भारतीय विद्या भवन, एएफटी मारवाह स्टूडियो, मॉस्को मीडिया, जगन्नाथ इंस्टीट्यूट आफ मॉसकाम, सिनेमा स्टूडियों और शारदा यूनिवर्सिटी सहित कई मीडिया संस्थानों के छात्रों ने भाग लिया।
“मीडिया फेस्ट 24”का शुभारंभ बीएजी की मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद ने किया। इस अवसर पर सीएनएन आईबीएन के एडिटर इन चीफ राजदीप सरदेसाई, हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशिशेखर, जाने-माने मैनेजमेंट गुरु अरिन्दम चौधरी और प्रख्यात फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर भी शामिल थे। फेस्ट की शुरुआत करते हुए बीएजी के ग्रुप एडिटर अजीत अंजुम ने कहा कि मीडिया फेस्ट 24 छात्रों के लिए पत्रकारिता के मानदण्ड और भविष्य की चुनौतियों को समझने के लिए एक उचित प्लेटफार्म बनेगा।

फेस्ट की शुरुआत “क्या मीडिया अपने उद्देश्यों में कामयाब है“ परिचर्चा से हुई। छात्रों के साथ हुई इस परिचर्चा में अनुराधा प्रसाद ने कहा कि चैनलों पर भी कई तरह के दबाव होते हैं। आज के दौर में चैनलों को सुचारु रूप से चलाना काफी मुश्किल होता जा रहा है। मीडिया समाज का आईना है और जो घटित होता है वो ही दिखाया भी जाता है। आवश्यकता केवल अपना नजरिया बदलने की होती है। इस चर्चा में आईबीएन7 और सीएनएन के एडिटर इन चीफ ने राजदीप सरदेसाई और हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर छात्रों के सबसे ज्यादा आकर्षण का केन्द्र रहे। राजदीप सरदेसाई ने कहा कि आज के दौर में चैनल को चलाना काफी मुश्किल भरा है, क्योंकि आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा केबल आपरेटर की भेंट चढ़ जाता है। इसके अलावा हिंदी चैनलों की तरह अंग्रेजी चैनलों में बढ़ती सनसनीखेज खबरों पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। राजदीप ने आज के मीडिया की तारीफ करते हुए कहा कि आज मीडिया काफी सजग हो चुका है। अगर ये ही स्थिति सन 84 के दंगों या बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय होती तो शायद ये दोनों दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं रोकी जा सकती थीं।
हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर का मानना था कि पिछले कुछ वर्षो में पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुत बदलाव आया है लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी मीडिया को प्रभावित कर उद्देश्य से भटकाने की कोशिशें की जा रही हैं। वहीं मैनेजमेंट गुरु अरिन्दम चौधरी ने करप्शन पर निशाना साधते हुए बीबीसी की तर्ज पर एक निष्पक्ष टीवी चैनल की आवश्यकता जताई।
फेस्ट24 में परिचर्चा के बाद छात्रों द्वारा बनाई गई फिल्मों का प्रर्दशन भी किया गया। इस मौके पर जाने माने फिल्मकार मधुर भंडारकर ने छात्रों का हौसला बढ़ाया। कई फिल्मों को देखने के बाद मधुर भंडारकर और बीएजी की मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद ने चुनी गई फिल्मों को पुरस्कृत भी किया। समाज पर अपनी फिल्मों से गहरी चोट करने वाले मधुर भंडारकर ने कहा कि वो अगर फिल्मकार नहीं होते तो शायद पत्रकार होते। मधुर ने कहा कि वो समाज की कुरीतियों पर चोट करने वाली फिल्में बनाकर पत्रकारिता के मिशन को ही आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

“मीडिया फेस्ट 24” के दूसरे दिन टाइम्म नाऊ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी और आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष सहित स्टार न्यूज के एंकर अनुराग मुस्कान और चारू मलिक भी मौजूद थी। अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए चर्चित अरनब गोस्वामी और आशुतोष ने यहां भी छात्रों के सवालों का बड़ी बेवाकी से जबाव दिया। अरनब ने कहा कि पत्रकार में जोश और जज्बा होना जरुरी है। उन्हें पत्रकारिता में लम्बा वक्त हो चुका है लेकिन खबर की भूख आज भी उनमें जिंदा है। ये भूख हर पत्रकार में होनी चाहिए। करप्शन पर निशाना साधते हुए अरनब ने कहा कि पत्रकारों पर सच सामने लाने का बड़ा दबाव होता है। ऐसे दबाव का सामना उन्हें अक्सर करना पड़ता है, कई बार उन्हें खबर ना दिखाने का प्रेशर भी सहना पड़ता है। लेकिन पत्रकार का काम सच को सामने लाने का है और वो इसी मिशन के तहत पत्रकारिता कर रहे है।
“भ्रष्टाचार रोकने में मीडिया की भूमिका” विषय पर चर्चा में आशुतोष ने कहा कि आज का मीडिया पहले के मुकाबले कही ज्यादा सजग और आत्मविश्वास से भरा है। चाहे मामला आर्दश हाउसिंग, सीडब्लूजी या 2जी स्पेक्ट्रम जैसे घोटाले से जुड़ा हो मीडिया ने जम कर ऐसे मामलों की कलई खोली है। उन्होंने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसी भी खबर को दिखाने से पहले गहन जांच-पड़ताल जरूरी है। पत्रकारों को अच्छे होमवर्क के साथ काम करना चाहिए। एक सवाल के जबाब में आशुतोष ने कहा कि पत्रकार ना तो न्यायधीश है और ना ही पुलिस अफसर। उसे अपने दायरे में रहते हुए ही अपनी बात रखनी चाहिए।इस परिचर्चा के बाद अरनब गोस्वामी और आशुतोष ने पीटीसी कम्प्टीशन के विनर छात्रों को पुरस्कृत कर हौसला बढ़ाया।
फेस्ट के तीसरे दिन नुक्कड़ नाटक, सिंगिंग कम्प्टीशन, मीडिया क्वीज, ऐड-मैड शो, कोरियोग्राफी काम्पटीशन और “मीडिया में कैरियर एक चुनौती” विषय पर परिचर्चा भी होगी। इस परिचर्चा में स्टार न्यूज के एडिटर शाजी जमा और जी न्यूज के एडिटर सतीश के सिंह छात्रों का मार्ग दर्शन करेंगे। प्रेस विज्ञप्ति












pushpendra mishra
March 9, 2011 at 1:06 pm
warist patrakaro ki upasthiti ke main ase ayojan swasth samaj ki kalpana karne wale purodhyo ki gatisilata ko badhte hai.