उत्तर प्रदेश के कई पत्रकार मायावती सरकार से नकद सहायता ले रहे हैं। यह नकदी उप्र जर्नलिस्ट वेलफेयर सोसाइटी, जो पंजीकृत है, को राज्य सरकार से फंड के रूप में मिलता है। यह सोसाइटी एलआईसी के माध्यम से पेंशन फंड चलाती है, जिसमें प्रिमियम का आधा पैसा पत्रकार और आधा सोसाइटी देती है, यहां तक तो ठीक है।
इस सोसाइटी के प्रबंधकों ने खुद को और अपने खास कई सदस्यों को एक से ज्यादा पालिसी दे रखी है। यानी कुछ तो तीन-तीन पालिसी पर सरकार से आधा पैसा प्राप्त कर रहे हैं। कुछ ऐसे लोगों ने पालिसी करायी, जो रिटायरमेंट के बेहद करीब थे, जिसके कारण पेंशन प्लान में उन्हें ऊंचा प्रीमियम देना पड़ा, जिसका आधा सोसाइटी ने सरकारी धन से योगदान किया। कृपया इस बारे में विस्तृत समाचार प्रकाशित करें तो एक बड़े घपले का खुलासा होगा.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












Ramesh
March 18, 2011 at 12:42 pm
Are bhai yaha to sosiaty paisa mar rahi haie. sahara samooh to apne poore rastriya ke sabhi karmchariyo ka bonas hi mar liya, jabki sahara india me 8500 bonas diya. lekin rastriya sahara me matra 3500 rupaya hia bonas diya. ek hi sansthan me do tarah ka vewhar kaha tak uchit hai. had to tab ho rahi hai jab is par koi bolne vala nahi hai.
Ramesh
lucknow
mirnal
March 23, 2011 at 3:41 pm
भाई यशवंत इसकी पड़ताल करें इसमें कई नामी गिरामी लोग शामिल है सुना है कि अभी अभी रज्य सरकार ने पत्रकारों को सेट करने के लिए इस समिति को लाखों रूपये दिये है इस मामले पर सूची प्रकाशित करना चाहिए कि कितने पत्रकार समिति के सदस्य है और उनमें से कितने एक से ज्यादा पालसी पर सरकार की सहायता ले रहें है
vinay kumar
April 13, 2011 at 12:33 pm
पत्रकार सरकार से पेंशन प्लान के लिए प्रिमियम पा रहे है तो जाहिर है सरकार के प्रति स्वामी भक्ति भी दिखा रहें है वैसे मायावती सरकार को पता नही है कि इसके लिए पत्रकार मुलायम सिंह सरकार के गुण गा रहें है। मायावती के नही । पता चला है कि तमाम मूर्धन्य और बड़े किस्म के पत्रकार एक साथ कई कई पालसी पर प्रिमियम का माल काट कर रहें है खास बात है कि इसमें नये सदस्य भी नही बनाये जा रहें है। इनमें उन पत्रकारों की संख्या ज्यादा है जिन्होने सरकारी सब्सिडी के प्लाट पर मकान बना किराये पर चढ़ा दिया है और खुद सरकारी मकान मे रह रहें है। माल काटे जाओ सरकार के गुण गाये जाओ
s singh
May 22, 2011 at 11:16 am
Regret to notice that from the very begining there is no new membership is the society. There is no account of annual membership. Who is responble.