आलोक तोमर का बत्रा हास्पीटल में निधन के बाद उनका शव उनके घर पर लाया गया है. उनके निधन की खबर सुनकर तमाम लोग स्तब्ध हैं. कई लोग विश्वास नहीं कर पा रहे हैं. उनके शुभचिंतक, उनके जानने वाले अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं. आलोक तोमर का अंतिम संस्कार कल किया जाएगा. उनके नजदीकी रिश्तेदारों का इंतजार किया जा रहा है.
आज सुबह आलोक तोमर के निधन के बाद उनके शव को चितरंजन पार्क स्थित उनके आवास D- 598/A पर लाया गया. शव को वहीं रखा गया है. उनके निधन से मीडियाजगत में स्तब्धता है. दिल्ली में उनके जानने वाले काफी लोग उनके आवास पर पहुंच रहे हैं. पत्रकारों तांता उनके आवास पर लगा हुआ है. तमाम लोग अब भी विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि आलोक तोमर उनके बीच नहीं रहे.
आलोक तोमर का अंतिम संस्कार कल किया जाएगा. अभी समय निश्चित नहीं किया गया है. उनके नजदीकी रिश्तेदारों तथा परिचितों के आने का इंतजार किया जा रहा है. जो उनके निधन की सूचना के बाद से दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. रिश्तेदारों के अलावा भी उनके तमाम शुभचिंतक भी उनके घर के लिए चल चुके हैं. उनके साथ काम कर चुके जिस पत्रकार को उनके निधन की सूचना मिल रही है, वो उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहा है.












अमित बैजनाथ गर्ग. जयपुर. राजस्थान.
March 20, 2011 at 10:17 am
आलोक तोमर साहब को नमन…
Vishnu Rajgadia
March 20, 2011 at 10:24 am
Sad news. Shradhanjali
मदन कुमार तिवारी
March 20, 2011 at 10:25 am
कभी मिला नही बस पढा । मिलने की चाह दिल में हीं रह गई । लेकिन मौत के साथ दो -दो हाथ कर रहे आलोक तोमर जी जैसे शख्स से मिलने की हसरत नही पुरी हो सकी । आंख़ से आंसु बह रहे है , दुर हूं आ नही सकता , बस करता हूं आपको नमन , आप आयेगे हमारे बीच फ़िर लेकर एक नया जन्म । कभी मिलेंगे जरुर मिलेंगे । आप आयेंगे जरुर आयेंगे ।
ashok
March 20, 2011 at 11:31 am
अरे….ओफ. बहुत दिनों बाद किसी के जाने के दर्द महसूस हो रहा है. अब बस, हो गई मेरी होली.
अब नहीं मनाना.
ashok bhardwaj
March 20, 2011 at 12:29 pm
bhiwani ke sabhi media person ki or seshradhanjali
INSANIYAT
March 20, 2011 at 1:20 pm
आलोक तोमर जी से में मिल नहीं पाया ..लेकिन एक चमकता हुआ सितारा, आलोक तोमर जी से मैं मिल नहीं पाया ..लेकिन एक चमकता हुआ सितारा, एक ऐसा ज्योति जिसने न जाने कितने लोगों को रोशनी दिखाया अब यह ज्योति उस अंधरे का शिकार हो गया जंहा कभी उजाले की उम्मीद ही नहीं .. मैंने आज तक उनके बारे में जो भी सुना आज उन बातों को यादकर आँखें नम हो गई .. भगवान् उनकी आत्मा को शांति दे ….
Prof Rakesh Sinha
March 20, 2011 at 4:59 pm
आलोक जी के व्यक्तित्व में कई ऐसी बाते हैं जो नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी. उन्होंने अपने स्वास्थ्य की चिंता किये बिना अंतिम साँस तक पत्रकरिटी धर्म का निर्वाह किया. तकरो से वे न डरे न ही अपने लव हनी की चिंता की. यह एक असाधारण बात है. कोई सहमत हो या असहमत हो उन्होंने अपने विवेक को मरने नहीं दिया. विवेक और साहस ये दो चीजे उनकी सारथी बनी रही. वे आग्रह कर लोगो से उन विषयो पर लिखवाया करते थे जिसमे उन्हें मौलिकता नजर आती थी. वैचारिक छुआछुत या पूर्वाग्रह इन दोनों व्याधियो से वे मुक्त थे. वे एक युग के प्रतिनिधी पत्रकार थे जिनकी कमी सदा खलती रहेगी.
shaiendra
March 20, 2011 at 5:06 pm
alok ji ko dil se sacchi shradhanjali..bhagvan unki aatma ko shanti pradan kare..
VIJAY VYAS / MEDCHAL
March 20, 2011 at 5:37 pm
आलोक जी एक देश के सचे सपुत और क्रान्तिकारी नागरीक थे. अन्धकारमय देश को उजाले की राह मे ले जाने वाले महान पत्रकार की अमर आत्मा भगवान शान्ति प्रदान करे.
manav
March 20, 2011 at 6:13 pm
i have no words
manav
March 20, 2011 at 6:14 pm
i have no words
vishal sharma
March 21, 2011 at 3:29 am
जिंदगी बस एक उम्मीद भरी डगर है…मौत एक हक़ीकत है। लेकिन आख़िर दम तक अपने पसंदीदा क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए मौत से रुबरू होने का नसीब कम लोगों को ही मिलता है। आलोक जी आपका जाना दुखद है लेकिन आपका सफ़र सुकुन भी देता है क्योंकि इसमें ये अहसास छिपा है कि अपनी शर्तों पर भी जिदंगी को बख़ूबी जिया जा सकता है। कलम के इस अद्वितीय सिपाही को पूरे सम्मान और गौरव के साथ भावभीनी श्रद्धाजंलि…. विशाल शर्मा,पत्रकार,(जयपुर)
amitvirat
March 21, 2011 at 7:49 am
alok ji ka jana dikhad hai par aisi maut milna bhi bhai bade sukun ki baat hai ki marte dam tak apne kartavya par date rahe
shat shat naman
rk nirad
March 21, 2011 at 8:59 am
Aalok Tomar Ji ke nidhan ka samachar sachmuch pakar stabdh rah gaya. Unhen meri shradhanjli.
girish srivastav
March 21, 2011 at 12:26 pm
alokji, aapko bhul nahi paynge. aapko sat sat naman.
girish srivastav, mumbai.
khalid
March 22, 2011 at 5:28 am
In the age of deliberate writing……u were the one who listen to insight. Tomarji u will always be a aguiding force for those who never compromise with journalistic dignity…