दैनिक जागरण के उन्नाव कार्यलय में तीन वर्षों से विज्ञापन का कार्य कर रहे अमित सिन्हा ने जिला प्रतिनिधि राजेश शुक्ल व विज्ञापन इन्चार्ज निर्मल त्रिपाठी पर उत्पीड़न, मानसिक व आर्थिक शोषण का आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र दैनिक जागरण के कानपुर कार्यालय में भेज दिया है। अमित का कहना है कि उन्हें इस्तीफा देने के बाद भी परेशान किया जा रहा है और किसी दूसरे जगह काम न करने देने की धमकी दी जा रही है। अमित के इस्तीफे की एक प्रति भड़ास4मीडिया के भी पास है. अमित ने इस्तीफे में लिखा है-
”श्रीमान विज्ञापन प्रबंधक, दैनिक जागरण कानपुर, महोदय, आपके सम्मानित समाचार पत्र दैनिक जागरण के उन्नाव कार्यालय में प्रार्थी बतौर विज्ञापन प्रतिनिधि कार्य कर रहा था। विभागीय अधिकारियों के व्यवहार से उत्पीड़ित होकर मैं आपके संस्थान से त्यागपत्र दे रहा हूं, जिसे स्वीकार कर मुक्ति प्रदान करने की कृपा करें। प्रार्थी -अमित सिन्हा”
इस्तीफा देने से पहले अपने उत्पीड़न से परेशान अमित सिन्हा आत्महत्या की धमकी भी दे चुके हैं। भड़ास4मीडिया को भेजे मेल में बताया गया है कि उन्नाव दैनिक जागरण विज्ञापन विभाग में 192000 हजार रुपये बकाया दिखाया गया। तब जिला प्रतिनिधि राजेश शुक्ल ने बकाया की जिम्मेदारी विज्ञापन में काम करने वाले अमित सिन्हा पर डाल दी। अमित सिन्हा ने कानपुर हेड आफिस में जा कर खर्च हुये रुपये की जानकारी उन्नाव के विज्ञापन हेड भूपेन्द्र सिंह व पीआर सिंह को लिखित में दी। भूपेन्द्र सिंह ने जांच कराई।
अमित सिन्हा ने बयान दिया कि वह तीन वर्षों से कंप्यूटर आपरेटर की 1800 प्रति माह व चपरासी की 1600 प्रति माह सेलरी देता था और समय-समय पर राजेश शुक्ल को पैसे देता था। विज्ञापन का कमीशन राजेश शुक्ल ही लेते थे। अमित सिन्हा को महीने के सिर्फ 2500 रुपये मिलते थे। जांच के बाद फैसला आया कि अमित सिन्हा 60000 रुपये तुरन्त जमा करायेंगे व बाकी रकम राजेश शुक्ल व अमित सिन्हा मिल कर जमा करेंगे। उसी समय जागरण में सरकारी बकाया वसूली के लिये धनधान योजना आयी। उसमें सारी वसूली अमित सिन्हा ने की। तब भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि इसका कमीशन अमित को न दे कर उसे बकाया में एडजस्ट कर लिया जायेगा। उसके बाद अमित ने 13000 और जमा किये।
तब भूपेन्द्र व पीआर ने कहा कि अमित की बाकी रकम राजेश जमा करेंगे और अमित की सेलरी 2500 से बढा कर 8000 कर दी जायेगी। उसके बाद भूपेन्द्र का तबादला मुरादाबाद हो गया। उन्नाव में निमर्ल त्रिपाठी को विज्ञापन इंचार्ज बना कर भेजा गया। राजेश शुक्ल ने बाकी रकम जमा नहीं की। राजेश निमर्ल के साथ मिल कर प्रताड़ित करने लगे। अमित की सेलरी भी नहीं बढ़ाई गई। बढ़ी हुई सेलरी न मिलने से दुखी अमित ने अफिस में ही आत्महत्या की धमकी दे दी थी। जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो अब अमित न आत्महत्या करने की जगह इस्तीफा देने उचित समझा।












चतरा से चन्द्रेश शर्मा
June 14, 2010 at 7:52 am
ऐ कैसी पत्रकारिता
नगर परिषद उपचुनाव में पत्रकार की भूमिका संदिग्ध
[b]चतरा से चन्द्रेश शर्मा [/b]
झारखंड राज्य में पत्रकारिता का क्या हश्र हो रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है । लेकिन इसका प्रभाव छोटे छोटे जिलों में भी बहुत तेजी से फैल रहा है, रातों रात करोड़पति बनने की चाहत ने पत्रकारों को अपने स्तर गिराने पर मजबुर कर दिया है । राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के कार्यकाल में लोकप्रिय अखबारों के सम्पादक , ब्युरो प्रमुख एवं रिपोर्टरों ने भ्रश्टाचार में अपनी जो छाप छोड़ी है, उसका कुछ प्रभाव जिलास्तरीय पत्रकारों पर भी पड़ा है । झारखंड का एक छोटा नक्सलप्रभावित जिला है चतरा, यहां के अधिकांषतः पत्रकार तो विकास कार्यों के ठेकेदार पहले ही बन गये थे, अब चुनाव जीतवाने की भी ठेकेदारी करने लगे हैं । वर्तमान समय में चतरा में नगर पर्शद के अध्यक्ष पद पर उपचुनाव हो रहा है । इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर खड़े एक करोड़पति व्यवसायी को जीतवाने के लिए राज्य में अपने आप को बड़ा क्षेत्रिय अखबार होने का दावा करनेवाले अखबार का रिर्पोटर दिन रात एक किये हुए है । आप अगर खबर के रूप में कुछ छापते हैं तो कोई बात नहीं , लेकिन प्रत्याषी के साथ खड़े होकर चुनाव कैम्पेनिंग करने का क्या तुक है ? लगता है कि उक्त पत्रकार प्रत्याषी का मिडीया सलाहकार बन बैठा है । षहर में इस बात की जोरदार चर्चा है कि उक्त क्षेत्रिय अखबार के रिर्पोटर को काफी चढ़ावा मिला है । खैर अगर ऐसी बात है तो पत्रकारिता किस स्तर की ओर जा रहा है…….. इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है ।
kaju faini
June 14, 2010 at 8:57 am
hello
[quote][/quote]
abhisek
June 15, 2010 at 6:52 am
Rajeshji apne to bacce ki jaan hi lay le.
pahle ushi ke satth melkar rakam kharch kiya baad mein jab us par baat ai to saff mukar gaye. kam se kam umar ka dhan rakhte.
RAJESH VAJPAYEE UNNAO
June 16, 2010 at 2:24 pm
rajesh shukla ka 20 varsho kay jila pratinidhi karyakaal may rajasva sambandhi yeh pahla mamla kuch hajam nahi ho raha phir bhi jagran prabandhan ko nispakch jaanch kara layni chahiye.
jagran jaisay bade banner kay liye yeh dukhad ghatna hai.