: महीना भर बीत गया, नहीं पकड़ सके पत्रकार साथी के हत्यारों को : गुस्साए पत्रकारों ने फूंका एसपी और डीएम का पुतला : बस्ती । ‘आज’ अखबार के पत्रकार अवनीश कुमार श्रीवास्तव की गोली मार कर निर्मम हत्या को एक माह का समय गुज़र चुका है लेकिन पुलिस अभी तक हत्यारों और हत्या के मास्टरमाइंड का सुराग लगा पाने में कामयाब नहीं हो सकी है।
इससे नाराज़ पत्रकारों ने ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के आह्वान पर रोडवेज तिराहे पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पुतला फूंका और पुलिस प्रशासन के विरूद्ध जमकर नारेबाजी की। गौरतलब है कि गत 26 जून को पत्रकार अवनीश श्रीवास्तव की हत्या सरेशाम कोतवाली थाना इलाके रौता पुलिस चौकी से चन्द कदमों की दूरी पर अज्ञात बदमाशों द्वारा गोली मार कर कर दी गयी थी। पुलिस के अधिकारियों ने उसी वक्त कहा था कि हत्यारों के बारे में पता चल चुका है, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा।
एक माह गुजर जाने के बाद भी अभी तक बस्तर पुलिस हत्यारों को गिरफ्तार करना तो दूर, उनका सुराग लगा पाने में कामयाब नहीं हो सकी है। और न ही अभी रौता पुलिस चौकी पर हत्या के समय तैनात रहे लापरवाह पुलिस कर्मियों के विरुद्ध ही कोई कार्रवाई की गई है। जिले भर के पत्रकारों ने जुलूस और धरने के माध्यम से अपना विरोध जताया। अवनीश के हत्यारों को गिरफ्तार करने और अवनीश के परिवार को सहायता देने की मांग कई बार की। लेकिन पत्रकारों को प्रशासन की तरफ से कोरे आश्वासन के अलावा कुछ भी न मिला।
बस्ती के पत्रकारो ने आज पुतला नज्र आतिश कर जिला और पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुये 15 दिन के भीतर पत्रकार के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की है। इस मौके पर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के महामंत्री संजय द्विवेदी ने कहा कि एक महीने का लम्बा समय गुजर जाने के बाद भी पुलिस अभी तक हमारे पत्रकार साथी अवनीश के हत्यारों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है और न ही अवनीश के परिवार को किसी प्रकार की सहायता ही दी गयी। उन्होंने कहा कि अभी प्रशासन की तरफ से केवल कोरा आश्वासन ही मिला है। उन्होंने कहा कि बस्ती जिले के कप्तान और जिलाधिकारी निकम्मे हैं। कोतवाली प्रभारी एसएन सिंह किसी काम के नहीं हैं। इनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिये।
इस अवसर पर संदीप गोयल, पुनीत ओझा, अवधेश त्रिपाठी, पंकज त्रिपाठी, तनवीर आलम, सतीश श्रीवास्तव, मजहर हुसैन, सज्जाद रिज्वी, महेन्द्र त्रिपाठी, ओपी त्रिपाठी, अशोक श्रीवास्तव, साहिल, ओमकार नाथ श्रीवास्तव, राजेष मिश्र, प्रमोद श्रीवास्तव, नवनिधि पाण्डेय, सोहन सिंह, धनंजय श्रीवास्तव, रमेश मिश्र, इब्राहिम, सलामुद्दीन कुरैशी, वसीम अहमद, बृजेश शुक्ल, केके त्रिपाठी सहित दर्जनों पत्रकार मौजूद थे।
बस्ती से सैय्यद मजहर हुसैन की रिपोर्ट












Sushil Gangwar
July 28, 2010 at 5:06 pm
Are bhai choro ki sarkaar me adhikaari bhi chor chaapat ho gaye hai . Agar enka baap marta to turant pakad lete . Bhai DM ka putla fukne se kuchh nahi hoga . Yah log sochte hai ek patrakaar hi to mara hai . Sabhi bekaar or nakara ho gaye hai. Har kowi apne aapko Mukhyamanti samjhta hai. Es desh kya hoga raam jaane . Chalo ram ram yasvant ji
http://www.sakshatkar.com
satish srivastav
July 29, 2010 at 1:23 pm
basti ke sp aor dm ko turant hata dena chaiyai……kyo ki wo prashashan kisi kaam ka nhi hai jo patrakaro ko suakchit nhi rakh sakta…laktantra me yah bade hi sharm ki baat hai,, dm aor sp patwa se paisa lekr mamle ki leepa poti kr rhe hai,,hatayaro ko jaante hue bhi abhi tak kuch bhi nhi ho paya hai…jile me jab patrakaar hi surakchit nhi rahengai to aam aadmi ki surakcha ka kya hoga,, sp to bilkul bhi nikamma hai, wo sirf patrakaro ki khabaro pr action krne ke bajaai patrakaaro ko hi nasihat deta hai…dm hai ki patrakaaro se milta hi nhi hai,,, dono ek se badh kr ek hai.. agar jile ke patrakaar himmat kr adhikariyo ke khilaf morcha khol de to kuch ho sakta hai…….nhi to ye adhikaari aor bhi be lagaam hote jaingai..dalal patrakaaro ko inse door rakhne ki jarurat hai…jo adhikaari ke samney baithkr dushrey patrakaaro ki buraai krte hai..unhe bhi sabak sikhane ki jarurat hai..bas thats alll…
rajkumar gupta
July 29, 2010 at 1:48 pm
are satish ji un dalaal patrkaaro ka naam to likh dein taaki aur patrkaar aur samaaj jaan to jaye ki Adhikariyo ke talvekaun chaat raha hai
Imran Zaheer
July 30, 2010 at 11:13 am
एक पत्रकार भ्रस्टाचार के दलदल में डुबकियाँ लगा रहे बेलगाम पुलिस वालो के गलत कारनामों को सबके सामने ला कर खड़ा करता है, लोगो को इन्साफ दिलाता है, और आज एक पत्रकार को अपनी जान गवाने के बाद भी इन्साफ नहीं मिल पा रहा | पुलिस की कार्य प्रणाली हमेशा ही संदेह के घेरे में रही है और आज समाज में कलम के सिपाही की हत्या हो जाने के बाद भी अपराधियों को पकड़ ना पाना इस बात को और पुख्ता करता है की इस घटना को दबाने के लिये उक्त अधिकारियों ने हत्या करने वाले मुजरिमों से साठ-गाठ कर ली हो | किसी भी बड़ी घटना का खुलासा करने का दावा करने वाले ये पुलिस अधिकारी किसी को भी मुजरिम बना कर खड़ा कर देते है और खुद के काले कारनामो को छुपा लेते है| ऐसे अधिकारियों की जब कार्य प्रडाली शून्य हो चुकी है, किसी अपराधी को पकड़ पाने में विभाग लाचार है तो उन्हें सरकार ने किस आधार पर नियुक्त कर रखा है? ऐसे अधिकारियो से जनता की सुरक्षा का दायित्व और उनकी सेवा का अधिकार छीन लेना चाहिए|
Alam khan Editor
August 1, 2010 at 7:10 pm
Respt S.Mazhar sir,
Basti ke halat media walo ke liye bahut kharab hai. Jarorat hai ki 1 baithak kar ke faisla liya jaye ki Shasan o Prashasan ki koi khabar koi bhi patarkar nahi chhape ga.mai janta hu ki sab jagah ki tarah Basti ke bhi patarkar ek nahi honge lekin kisi bhi surat se un sab ko ek kar ke ladai ladna hi pade ga kyu ki kal hamare aur aap ke upar bhi hamla ho sakta hai. HAM AAP LOGO KE SATH HAI.
Alam Khan Editor
Tanda Ambedkar Nagar 9839372709
Email:[email protected]
Imran Zaheer, Moradabad
August 2, 2010 at 11:15 am
आलम साहब, आपने जो राय दी है की शासन और प्रशासन की कोई खबर ना छापी जाये, ऐसा करने से आप जानते है की क्या होगा? समाज में भ्रष्टाचार और बढेगा, एक आम जन मानस इस समाज में इन कथित अधिकारियों की भेट चढ़ जायेगा| मीडिया की वजह से ही ये अधिकारी जनता की बात को सुनते है| मीडिया ने यदि इनसे किनारा कर लिया तो ये अधिकारी बिना लगाम के घोड़े हो जायेंगे |
Syed Mazhar Husain
August 2, 2010 at 12:26 pm
आलम साहब
मैं आपके जज़्बात कि कद्र करता हूँ l यह सही हैकि हमें आगे लडाई लड़ने के लिए एक साथ आना होगा..आज हमारे लोगो में एकता नहीं है हब बिखरे पड़े है इस वजह से ही हम मारे जा रहे है…लेकिन प्रशाशन कि खबरों को बायकाट करके ऐसा नहीं किया जासकता बल्कि हम लोगो को भ्रस्टाचार को उजागर करने के लिए एक अभियान चलाना होगा तभी हम कामयाब हो सकते है… लेकिन उससे से पहले हम लोगो को अपने बीच बैठे उन तथा कथित पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखाना होगा जो हर वक़्त अधिकारियों चाटुकारिता में लगे रहते है l वरना हम इसी तरह मारे जाते रहेंगे इन चाटुकारों कि वजह से ही प्रशाशन पत्रकारों के साथ हुयी घटनाओ को हलके में लेता है l अब हमें एक होने कि ज़रुरत है और आप जैसे साथियो कि
Alam khan Editor
August 3, 2010 at 11:45 am
Respt Mazhar & Imran sir,
Parshasan ki khabar na chapne ka matlab positiv khabro se hai. Parshasan ki Nigetive khabro ko lagatar print kar ke dekhe. Pura parshasan Hil jaye ga lekin sart hai ki sab ko Ek sath khabar paas karna hoga. Ladai muskil hai Namumkin nahi. Farji Mukadme me fasaye gye apne 3 sathio ke liye A.Nagar me ham logo ne bhi ladai ladi thi. Aur parshasan ne jhuk kar mukadma wapis liya tha.
HAM LOG AAP KE SATH HAI.
Alam Khan Editor