भड़ासी चुटकुला (3)

डाक्टर के पास एक मरीज आया और बोला- मुझे  दिशा-मैदान गए बहुत दिन हो गए. जाता हूं तो उतरता ही नहीं. दवा दीजिये जिससे मेरा पेट साफ हो जाये.

डाक्टर ने दवा दे दी और उसे घर भेज दिया.

दूसरे दिन वह आदमी फिर डाक्टर के पास आया. बोला- डाक्टर साहब, दवा से कोई फायदा नहीं हुआ.

डाक्टर ने दवा बदल दी और नई दवा देकर उसे भेज दिया.

ऐसा कई रोज हुआ तो एक दिन डाक्टर ने पूछ ही लिया.

डाक्टर- तुम काम क्या करते हो?

मरीज- जी, मीडिया में हूँ.

डाक्टर- कौन से?

मरीज- अखबार में.

डाक्टर- कौन से अख़बार में?

मरीज- %^७%५$%^७५६८* नामक हिंदी दैनिक में.

डाक्टर- तो ये बात है. यह लो 100 रुपये. पहले भर पेट खाना खाओ, सुबह खुल कर आएगा.


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Comments on “भड़ासी चुटकुला (3)

  • Aj akhbar me naukri karna Ghar jalakar tamasha dekhna hai. yahi karan hai ki media me dalali dinodin badhti ja rahi hai. Mera manna hai ki akhbar malik 1 hi adition nikalen lekin patrakaron ko itna den ki dalali ya galat karne ki soch unke dimag me na aai. Kul milakar PAIT NAHI BHAREGA TO CHORI AUR DALALI KARNA HI PAREGA JO UNKI BHI MAJBOORI HAI.

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  • Vikash Patel says:

    it is not just a joke but it is rality of today’s print media.
    i want to say on such critical conditions there are many Newspaper mangaers & editors, that say working in a newspaper is a social work. In that work we don’t mind about money.
    i want to say such mangers & editors, why u get very high salary, when it is a social work.
    Always rememer that BHUKHE PET BHAJAN BHI NAHI HOTA.
    if you are the head, your work is to fulfil minimum requirements of your staffs

    Reply

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