भड़ासी चुटकुला (4)

एक व्यक्ति पशुओं के डॉक्टर के पास पहुंचा और कहा कि तबियत ठीक नहीं लग रही है, दिखाना है। डॉक्टर ने कहा कि कृपया मेरे सामने वाले क्लीनिक में जाएं, मैं तो जानवरों का डॉक्टर हूं। वहां देखिए, लिखा हुआ है।

रोगी– नहीं डॉक्टर साब मुझे आप ही को दिखाना है।

डॉक्टर– अरे यार, मैं पशुओं का डॉक्टर हूं। मनुष्यों का इलाज नहीं करता।

रोगी– डॉक्टर साब मैं जानता हूं और इसीलिए आपके पास आया हूं।

इस पर डॉक्टर साब चौंक गए। जानते हो? फिर मेरे पास क्यों आए।

रोगी- मेरी तकलीफ सुनेंगे तो जान जाएंगे।

डॉक्टर- अच्छा बताओ।

रोगी– सारी रात काम के बोझ से दबा रहता हूं।

सोता हूं तो कुत्ते की तरह सोता हूं।

चौबीसों घंटे चौकस रहता हूं।

सुबह उठकर घोड़े की तरह भागता हूं।

रफ्तार मेरी हिरण जैसी होती है।

गधे की तरह सारे दिन काम करता हूं।

मैं बिना छुट्टी की परवाह किए पूरे साल बैल की तरह लगा रहता हूं।

फिर भी बॉस को देखकर कुत्ते की तरह दुम हिलाने लगता हूं।

अगर कभी, समय मिला तो अपने बच्चों के साथ बंदर की तरह खेलता हूं।

बीवी के सामने खरगोश की तरह डरपोक रहता हूं।

डॉक्टर ने पूछा – पत्रकार हो क्या?

रोगी- जी

डॉक्टर- इतनी लंबी कहानी क्या बता रहे थे। पहले ही बता देते। वाकई, तुम्हारा इलाज मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता। इधर आओ। मुंह खोलो.. आ करो… जीभ दिखाओ….

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Comments on “भड़ासी चुटकुला (4)

  • Akhilesh chandra says:

    Nice one and it’s true bcoz we all working like same condition aur baad me srif hume Thanks milta hai kyo ki sampadak aur malik ko yahi aata hai,jab vo humara khoon choss kar naukri se nikal taa hai

    Akhilesh chandra

    Reply
  • satyendra mishra says:

    वह आदमी कौन है ?

    वह न खबर लिखता है, न खबर पढता है.
    उसका मतलब न फीचर से, न अग्रलेख से है.
    फिर भी वह अख़बार का ……..संपादक है .
    पाठक पूछ रहें हैं, आखिर वह आदमी कौन है ?
    मेरे देश की पत्रकारिता मौन है.
    (धूमिल से क्षमा याचना सहित)
    —सत्येन्द्र किसन

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  • Rajesh yadav, kolkata, bbsr says:

    बहुत अच्छा आप ने लिखा है। पत्नी के सामने तो सभी कोई डरता है। छुट्टी होने पर बच्चे बहुत खुश होते है कि मेरे पापा का आज छुट्टी है। छुट्टी नहीं होने पर बच्चे निराश हो जाते है।

    Reply
  • ashish gupta says:

    yashvant ji ye chukule vala idea sahi hai , magar aapka portel ab non media vale bhi padte hai to is tarah se khilli udana bhi thik nahi hai

    Reply
  • amitabh ranjan says:

    bahoot khoob. patrakar biradari ki haalaat ka isase betar aur satik chitran ho hi nahi sakata. lajabaab latife k liye badhai.
    amitabh bagaha

    Reply
  • s.n gautam jaipur says:

    marej – pet saf nhi rhta h.
    doktor- ye goli kha lena.
    (do din bad.fir marej. doktor ke pass gya )
    marej – doktor sab.aap ki goli bhi khali. magar mera pet to aab bhi saf nhi rhta h.
    doktor- yar yse kese ho sakta h.aab ki bar me julab hi de deta hu. tera pet jarur. saf ho jayga.
    (fir do din bad .marej wo hi sikayt lekar.aagya to doktor ne pareshan hokar )
    doktor- ye bata tu karta kya h.
    marej – patrkar hu.
    doktor- to yar ye bat pahle hi den bta deta.ki patrkar hu.
    ja ye pese le or pet bharke khana kha lena. pet aapne aap saf ho jayga………..?

    Reply

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