Bihar BJP MLA murder case : 10 questions Shushil Modi must answer

1. How did you come to know that the woman who stabbed you party’s Purnea MLA Raj Kishore Keshari for repeatedly raping her, was “blackmailing” him and that too within hours the incident took place? Were you in the know of what was all going on between Keshari and Pathak for long?

For your kind information—-the Purnea police on record had denied getting any evidence of Pathak being blackmailing the MLA.

2. If the woman was blackmailing your MLA, as you charged, did your MLA ever tried to lodge a police complaint against her? Being a ruling party MLA for four-time the police, as everyone in Bihar, would believe couldn’t have turned him down like they reportedly did Rupam for a long time.

For your kind information—-the records, so far, said he did not.

3. You said there might be some political conspiracy or some people behind the woman Rupam Pathak prompting her to commit such a crime?

For your kind information—the Purnea police has denied again that prima facie there was no evidence of any political conspiracy behind this incident.

4. Soon after the incident you also told journalists in Patna that the lady had even filed cases against her father-in-law and others too and has been in the habit of doing so. How did you know that?

For your kind information—the father-in-law Krishna Deo Pathak has categorically denied that she had not filed any case against him, though she is a short-tempered woman who was not living with them, he has said.

5. You told media persons that she had recorded her statement under 164 of Cr PC withdrawing her charges against Keshari in June last year but you chose to forget that after some time she had filed a protest petition in the court saying she had made that statement under “duress and pressure”.

For your kind information—-it has come on record and has been carried in almost all the news papers that she had filed a protest petition.

6. Can you deny the fact that your senior in cabinet Bihar chief minister Nitish Kumar had reportedly refused to share dais with Keshari when he had gone to Purnea on May 31’ 2010 in course of one of his yatras? When Raj Kishore Keshari was brought down from the dais Nitish Kumar reached up and addressed the meeting.

For your kind information—the report was published in local newspapers at that time.

7. Can you explain being on a constitutional post of a state’s Deputy chief minister your statements just within hours of the incident was not liable to influence the probe and protect the slain MLA’s character?

For your kind information— News paper reports, noted social worker and Padmashree awardee Sudha Verghese and CPI-ML leader Meena Tiwari have put a question mark on your “hasty conclusive remarks”.

8. Why are you shying away from CBI inquiry demand to unravel the truth from the sensational murder case when some of your party leaders are crying for it?

For your kind information— your party legislator Rajendra Gupta and alliance party’s leader from Purnea division Mohd Taslimuddin have demanded CBI probe on record.

9. Can you deny the fact that when your party’s Purnea MP Uday Singh alias Pappu Singh and others had opposed Keshari’s candidature in the recent assembly poll you had intervened and get him the party ticket despite this rape slur on him? And, also can you deny the open secret in your party that Keshari was your political protégé and withstood by you in every intra-party crisis?

For your kind information—it too has come out in newspapers and on record.

10. You said that your party MLA Raj Kishore Keshari was an “upright, honest and popular” but can you deny the fact that he was accused in a number of criminal cases.

For your kind information—-its on record and has come out in newspapers, courtesy, ADR [Association for Democratic RIGHTS ] and NEW [National Election Watch].

We, the citizens of Bihar, hope and trust that the free, frank and fearless leader like Shushil Kumar Modi who also happens to be the Bihar’s Deputy Chief Minister for second time must speak out— as the Romans whispered: Memento mori !

from:

Bihar Bounder

biharbounder@gmail.com

Comments on “Bihar BJP MLA murder case : 10 questions Shushil Modi must answer

  • Lokenath Tiwary Kolkata says:

    जब सभी चाटुकार और भ्रष्ट हो गए हैं और मीडिया भी बिना गांड गरदन की हो गई है तो इस तरह की फटना तो घटेगी ही।
    यह घटना सावधान करती है, उन तथाकथित समाज के ठेकेदारों (प्रशासन, मीटिया) को जिन से आम जनता मदद की गुहार करती है, कि संभल जाओ, वरना दलालों व सुअरों की मौत मरोगे…
    हां भड़ास भी उसी जमात में शामिल हो जाए तो कोई नई बात नहीं..लेकिन ऐसी आशा नहीं है….हम तो रूपम जैसों को सलाम करते हैं….

    Reply
  • Lokenath Tiwary Kolkata says:

    जब सभी चाटुकार और भ्रष्ट हो गए हैं और मीडिया भी बिना गांड गरदन की हो गई है तो इस तरह की फटना तो घटेगी ही।
    यह घटना सावधान करती है, उन तथाकथित समाज के ठेकेदारों (प्रशासन, मीटिया) को जिन से आम जनता मदद की गुहार करती है, कि संभल जाओ, वरना दलालों व सुअरों की मौत मरोगे…
    हां भड़ास भी उसी जमात में शामिल हो जाए तो कोई नई बात नहीं..लेकिन ऐसी आशा नहीं है….हम तो रूपम जैसों को सलाम करते हैं….

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  • मदन कुमार तिवारी says:

    बहुत सारे प्रश्न अनुतरित हैं। न्यायपालिका भी कठघरे मे है। १८ जुन २०१० में १६४ के तहत दिये बयान में बलात्कार की घटना से ईंकार के बाद ७ सितंबर २०१० को पुलिस ने फ़ाईनल रिपोर्ट कोर्ट मे दाखिल किया सितंबर में हीं प्रोटेस्ट पेटीशन रुपम पाठक ने दाखिल किया लेकिन न्यायालय ने २५ मार्च २०११ की तारीख सुनवाई के लिये निर्धारित की यह जानते हुये की रुपम पाठक ने १६४ के बयान में गलत बोलने के लिये दबाव का आरोप लगाया है। चुनाव के दरम्यान राजकिशोर केसरी को कोई परेशानी न हो , इसका पुरा ख्याल मजिस्ट्रेट ने रखा। अगर प्रोटेस्ट पेटीशन पर पहले सुनवाई हो जाती तो शायद केसरी को टिकट मिलने में भी दिक्कत होती । और हां नीतीश का भी गुणगाण बंद करें । आप बिहार के हो राजेश कुमार सांसद ह्त्ाांड का मुजरिम कौन है तथा आज किस पद है खुब पता होगा आपको । नवादा के बालु घोटाले के आरोपी कौशल यादव , जो जदयू का विधायक है , उससे भी पह्चानते होंगे । कितने नक्सलवादियों को टिकट मिला तथा किसकी अनुशंसा पर मिला , यह भी पा होगा।

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  • gunjan sinha says:

    रूपम पाठक को निश्चित मालूम था कि विधायक केशरी की खुले आम हत्या के क्या नतीजे उन्हें भोगने होंगे. यह जानते हुए भी उन्होंने ऐसा कदम उठाया तो ज़ाहिर है कि न्याय पाने की हर संवैधानिक कोशिश असफल होने के बाद ही उठाया होगा या फिर धैर्य ने ज़वाब दे दिया होगा. पीडीतों का धैर्य न धराशायी हो इस पर सोचना तो न्याय पालिका को चाहिए. रही बात सुशील मोदी की सफाई की. मैंने उन्हें पहली बार जेपी आन्दोलन के समय आरा में एक सभा में जेपी के आदर्शों पर शानदार भाषण देते सुना था. वर्षों उसी भ्रम में रहा. एक दिन बक्सर आयुर्वेदिक कालेज के तब के प्रिंसिपल के खिलाफ करोडो के घपले के सबूत लेकर मोदी की बाईट लेने गया था. बाईट के अलावा उम्मीद ये भी थी कि वे बतौर नेता विपक्ष मामले को विधान सभ में उठाएंगे. लेकिन मोदी के ज़वाब से मैं भौंचक रह गया. वर्षों पुराना भ्रम टूट गया. मोदी ने कहा कि इस मामले की मुझे जानकारी है लेकिन आप इसे मत उठाइये. ये अपने आदमी हैं और पार्टी से जुड़े हैं. – यानी घपलेबाज़ अपनी पार्टी से जुड़ा हो तो उसे नहीं छेड़ना है.
    न्याय पाने की रूपम की कोशिश ने उस बहादुर लड़की की याद दिला दी है जिसने लालूराज में आरजेडी विधायक नाग नारायण सरदार को रेप की सजा तुरंत दे दी थी ब्लेड से नाकाम कर दिया था. विधायक नेपाल भागे थे इलाज़ कराने. उनके जीतने की कोई उम्मीद नहीं रहने से लालू ने फिर टिकट नही दिया लेकिन कोर्ट से कोई सजा मिली हो ऐसा तो नहीं सुना. फिर राज्यमंत्री ललित यादव का अपने ड्राइवर के पैरों के सारे नाखून उखड लेने की घटना – पीड़ित ड्राइवर बैठा ने कोर्ट में कहा कि मेरे नाखून पैरों में ठेस लगने से उखड गए.- कोर्ट और वकीलों ने यह भी नहीं पूछा कि दोनों पैरों के नाखून ठेस लगने से कैसे उखड सकते हैं. उस घटना की सूचना पुलिस को पत्रकारों ने दी थी, मंत्री के बंगले में बंद ड्राइवर को पुलिस ने पत्रकारों की पहल पर छुड़ाया था लेकिन कोर्ट ने या पुलिस ने किसी भी पत्रकार को गवाही के लिए भी नही बुलाया और मामला रफा दफा करते हुए कुछ ही महीनों में मंत्री ललित यादव बरी कर दिए गए. ईटीवी में हमने इस फैसले की बहद कड़ी आलोचना की – लीक से बाहर जाकर कोर्ट के बारे में भी काफी कुछ कहा, इस उम्मीद में कि शायद कोर्ट हमे कंटेम्प्ट केस करके बुलाए. लेकिन कहीं कोई सुगबुग नहीं हुई. ऐसी स्थिति में रूपम ने जो किया, अगर न्याय पाने के लिए किया तो उसे सलाम.
    गुंजन सिन्हा.

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  • It seems nothing much has changed in Bihar. The politicians and the police behave in the same wanton manner. Mr. Sushil Modi, you should answer these questions point-wise if you have any decency left in you. Mr. Nitish Kumar too should open his mouth to make the records straight.

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  • gunjan sinha says:

    रूपम पाठक को निश्चित मालूम था कि विधायक केशरी की खुले आम हत्या के क्या नतीजे उन्हें भोगने होंगे. यह जानते हुए भी उन्होंने ऐसा कदम उठाया तो ज़ाहिर है कि न्याय पाने की हर संवैधानिक कोशिश असफल होने के बाद ही उठाया होगा या फिर धैर्य ने ज़वाब दे दिया होगा. पीडीतों का धैर्य न धराशायी हो इस पर सोचना तो न्याय पालिका को चाहिए. रही बात सुशील मोदी की सफाई की. मैंने उन्हें पहली बार जेपी आन्दोलन के समय आरा में एक सभा में जेपी के आदर्शों पर शानदार भाषण देते सुना था. वर्षों उसी भ्रम में रहा. एक दिन बक्सर आयुर्वेदिक कालेज के तब के प्रिंसिपल के खिलाफ करोडो के घपले के सबूत लेकर मोदी की बाईट लेने गया था. बाईट के अलावा उम्मीद ये भी थी कि वे बतौर नेता विपक्ष मामले को विधान सभ में उठाएंगे. लेकिन मोदी के ज़वाब से मैं भौंचक रह गया. वर्षों पुराना भ्रम टूट गया. मोदी ने कहा कि इस मामले की मुझे जानकारी है लेकिन आप इसे मत उठाइये. ये अपने आदमी हैं और पार्टी से जुड़े हैं. – यानी घपलेबाज़ अपनी पार्टी से जुड़ा हो तो उसे नहीं छेड़ना है.
    न्याय पाने की रूपम की कोशिश ने उस बहादुर लड़की की याद दिला दी है जिसने लालूराज में आरजेडी विधायक नाग नारायण सरदार को रेप की सजा तुरंत दे दी थी ब्लेड से नाकाम कर दिया था. विधायक नेपाल भागे थे इलाज़ कराने. उनके जीतने की कोई उम्मीद नहीं रहने से लालू ने फिर टिकट नही दिया लेकिन कोर्ट से कोई सजा मिली हो ऐसा तो नहीं सुना. फिर राज्यमंत्री ललित यादव का अपने ड्राइवर के पैरों के सारे नाखून उखड लेने की घटना – पीड़ित ड्राइवर बैठा ने कोर्ट में कहा कि मेरे नाखून पैरों में ठेस लगने से उखड गए.- कोर्ट और वकीलों ने यह भी नहीं पूछा कि दोनों पैरों के नाखून ठेस लगने से कैसे उखड सकते हैं. उस घटना की सूचना पुलिस को पत्रकारों ने दी थी, मंत्री के बंगले में बंद ड्राइवर को पुलिस ने पत्रकारों की पहल पर छुड़ाया था लेकिन कोर्ट ने या पुलिस ने किसी भी पत्रकार को गवाही के लिए भी नही बुलाया और मामला रफा दफा करते हुए कुछ ही महीनों में मंत्री ललित यादव बरी कर दिए गए. ईटीवी में हमने इस फैसले की बहद कड़ी आलोचना की – लीक से बाहर जाकर कोर्ट के बारे में भी काफी कुछ कहा, इस उम्मीद में कि शायद कोर्ट हमे कंटेम्प्ट केस करके बुलाए. लेकिन कहीं कोई सुगबुग नहीं हुई. ऐसी स्थिति में रूपम ने जो किया, अगर न्याय पाने के लिए किया तो उसे सलाम.
    गुंजन सिन्हा.

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  • गुंजन सिन्हा says:

    रूपम पाठक को अच्छी तरह मालूम था कि विधायक की खुले आम हत्या के बाद उनका क्या हश्र होना है. फिर भी उन्होंने यह कदम उठाया. ज़ाहिर है कि कहीं से भी न्याय पाने की कोई उम्मीद उन्हें नहीं रह गयी थी. रूपम के आरोपों को गलत मान लेने की कोई वजह सामने नहीं है. अब तो ऐसा लगता है कि महिलाएं अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के लिए ऐसे कदम उठाने को मजबूर होती जा रही हैं. न्याय की राह में सबकुछ जायज है. सोचना तो न्याय पालिका को चाहिए.
    रही बात उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की सफाई की. मैंने उन्हें पहली बार आरा में जेपी आन्दोलन के दौरान एक सभा में सुना था. जेपी के आदर्शों पर जोशीला भाषण देते हुए. वर्षों तक मेरा भ्रम बना रहा. लेकिन एक बार जब वे नेता विपक्ष थे, मैंने उन्हें बक्सर आयुर्वेदिक कालेज के तब के प्रिंसिपल के करोडों के घोटालों के कागजात दिए और उस मामले पर एक बाईट देने का अनुरोध किया. कागजात सबूतों के साथ थे. मुझे तो उम्मीद थी कि वे विधान सभा में भी इसे उठाएंगे और जांच की मांग करेंगे लेकिन मोदी जी ने कहा कि इस मामले को मत उठाइए, यह प्रिंसिपल हमारी पार्टी से, मुझसे जुड़े हैं. मुझे इसके बारे में मालूम है.
    मैं भौंचक रह गया. मुझे याद आया – सत्ता भ्रष्ट करती है और सम्पूर्ण सत्ता, संपूर्ण रूप से भ्रष्ट करती है. लालूराज़ में आरजेडी विधायक नाग नारायण सरदार का प्रसिद्ध रेप केस रूपम की घटना ने याद दिला दिया जब एक बहादुर लड़की ने उन्हें तत्काल उम्र भर के लिए नाकाम कर दिया था. ब्लेड से. विधायक सरदार को आज तक कोई सजा हुई क्या? हाँ चुनाव जीतने की कोई उम्मीद नहीं थी, इसलिए लालू ने उन्हें टिकट नहीं दिया. न्याय पालिका ने क्या किया? दूसरी घटना ललित यादव के उस ड्राइवर की है जिसके पैरों के सभी नाखून राज्यमंत्री यादव ने उखाड दिए थे. कोर्ट में ड्राइवर बैठा ने बयान दिया कि मेरे नाखून ठेस लगने से उखड गए. कोर्ट ने इसे ही सही मान कर ललित यादव को बरी कर दिया. यह नहीं पूछा कि दोनों पैरोंमें एक साथ ठेस कैसे लग सकती है. इस लोमहर्षक घटना की सूचना सचिवालय पुलिस को पत्रकारों ने दी थी. पुलिस या कोर्ट ने किसी भी पत्रकार को गवाही के लिए नहीं बुलाया. तुरत फुरत सुनवाई पूरी कर मंत्री को बरी कर दिया. हमने ईटीवी में कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की – इस उम्मीद में कि शायद कंटेम्प्ट केस कर कोर्ट हमें सुनवाई के लिए बुला लेगा लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. मामला खत्म. ऐसे में रूपम को सलाम.

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  • Well done Rupam. When all the police and judiciary has become the slain of these corrupt and “Aiyyash” political leaders, this is the only way to get the justice and penalise the culprit. I request all the intellectual class of country to fight for Rupam so that she got justice.

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