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अम्बानी बन्धुओं के गैस विवाद पर किताब

पुस्तक विमोचन समारोह

पत्रकार नन्दकिशोर भारतीय द्वारा लिखी पुस्तक ‘अम्बानी बन्धुओं का गैस विवाद’ का मुम्बई के प्रेस क्लब में एक भव्य समारोह में विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि आनंद राठी (आनंद राठी सिक्युरिटीज लिमिटेड के चेयरमैन) ने कहा कि नन्दकिशोर ने गैस विवाद का बहुत अच्छा विश्लेषण किया है। अम्बानी बन्धुओं के अलगाव के बाद प्रतिस्पर्धा में उनके समूह बहुत तेजी से आगे बढ़े लेकिन उनके बीच हुए गैस विवाद ने इस प्रगति को कुछ रोक सा दिया है। इस किताब से देश को गैस के महत्व का पता चला है। अगर यह गैस विवाद हल हो जाए तो देश की जीडीपी आधा प्रतिशत बढ़ जाएगी।

पुस्तक विमोचन समारोह

पत्रकार नन्दकिशोर भारतीय द्वारा लिखी पुस्तक ‘अम्बानी बन्धुओं का गैस विवाद’ का मुम्बई के प्रेस क्लब में एक भव्य समारोह में विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि आनंद राठी (आनंद राठी सिक्युरिटीज लिमिटेड के चेयरमैन) ने कहा कि नन्दकिशोर ने गैस विवाद का बहुत अच्छा विश्लेषण किया है। अम्बानी बन्धुओं के अलगाव के बाद प्रतिस्पर्धा में उनके समूह बहुत तेजी से आगे बढ़े लेकिन उनके बीच हुए गैस विवाद ने इस प्रगति को कुछ रोक सा दिया है। इस किताब से देश को गैस के महत्व का पता चला है। अगर यह गैस विवाद हल हो जाए तो देश की जीडीपी आधा प्रतिशत बढ़ जाएगी।

स्टाक मार्केट और कारपोरेट एनेलिस्ट शशिकांत तुलस्यान ने कहा कि अम्बानी बन्धुओं के जटिल गैस विवाद को नन्दकिशोर ने बहुत सरलता से समझाया है। इस अवसर पर नवभारत टाइम्स, मुम्बई के स्थानीय सम्पादक शचीन्द्र त्रिपाठी ने नन्दकिशोर को एक जागरूक बिजनेस जर्नलिस्ट बताते हुए कहा कि उनकी यह किताब हर विषय की तह तक जाने की उनकी इच्छा का ही परिणाम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पैसा कमाने में नैतिकता होनी चाहिए। जब कारपोरेट दुनिया अनैतिकता की ओर कदम बढ़ाता है तो हर्षद मेहता घोटाला और सत्यम घोटाला जैसे काण्ड सामने आते हैं।

पुस्तक के लेखक व नवभारत टाइम्स, मुम्बई के बिजनेस डेस्क प्रभारी नन्दकिशोर भारतीय ने कहा कि ‘रिलायंस समूह पर उन्होंने बहुत खबरें लिखी हैं। यह समूह हमेशा चर्चा में रहा है, इसलिए खबरों में भी रहा है। मुकेश और अनिल अम्बानी का गैस विवाद उनका निजी और कारपोरेट विवाद है, लेकिन इसका देश की जनता और प्रगति पर बहुत असर पड़ रहा है। अगर यह विवाद सुलझ जाए तो भारत के कई राज्यों की बिजली समस्या का समाधान हो जाए। मैंने इस किताब के जरिए यह बात उठाई है कि इस विवाद में सरकार की भी जिम्मेदारी है। गैस जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी नीति बनाने में उसे कई बरस लग गए। यह बहुत जटिल विवाद है और मैंने इसे आम आदमी के नजरिए से समझाने की कोशिश की है।’

वीरेंद्र मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया। लिबोर्ड ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन ललित डांगी ने सबका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह गैस विवाद सुलझने से देश का 9 अरब डॉलर का गैस आयात बचेगा। समारोह में मुम्बई के जाने-माने उद्योगपति, कॉर्पोरेट विश्लेषक और पत्रकार मौजूद थे। यह पुस्तक ‘सौम्य प्रकाशन’ ने प्रकाशित की है। ‘सौम्य प्रकाशन’ की निदेशक रीना त्यागी ने बताया कि उनका प्रकाशन मीडियाकर्मियों द्वारा ज्वलंत विषयों पर लिखी और मीडिया से संबंधित पुस्तकें ही प्रकाशित करेगा।

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