“आन्दोलन एक पुस्तक से” मुहिम के तहत इस बार एक ऐसी किताब प्रकाशित होने जा रही है जिसमें किसी नेता, किसी अभिनेता या फिर किसी बाबा की पोल खोलने की बजाय देश भर, विशेष कर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, के लगभग 60 से अधिक मूर्धन्य पत्रकारों और संपादकों के अंदरखाने की खबर बाहर आने वाली है. किताब लिख रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शिवनाथ झा. इस किताब में इन मूर्धन्य पत्रकारों और संपादकों के बारे में उनकी “त्यागी हुई पत्नियां” काफी कुछ बताएंगी. वे बताएंगी कि किन सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक परिस्थितियों में उनके पतिओं ने उन्हें त्याग दिया.
बाद में दूसरी महिलाओं और लड़किओं के साथ विवाह कर उन्हें छोड़ दिया. ‘मोनोग्राफ ऑन उस्ताद बिस्मिलाह खान’, ‘लालू प्रसाद : इंडिया’स मिराक्ल’ और ‘प्राइम मिनिस्टर्स ऑफ इंडिया :भारत भाग्य विधाता’ नाम की कॉफी टेबल बुक के बाद शिवनाथ चौथी किताब पहली पत्नी छोड़ चुके संपादकों पर लिख रहे हैं. शिवनाथ बताते हैं कि इस बार ऐसी पुस्तक का निर्माण हो रहा है जिसमें सभी पत्रकार और संपादकों की त्यागित मोहतरमा अपने पहले पति के बारे में – “कैसे शादी हुई और किस परिस्थिति में उनको तिरस्कृत होकर अपने माता-पिता के पास जाना पड़ा या क्यों पत्रकार बंधु/संपादक महोदय ने उन्हें अमर्यादित तरीके से देर रात ठंढ में घर निकाला दे दिया?” आदि के बारे में अपनी आपबीती बताएंगी.
इस किताब की जरूरत को बताते हुए श्री झा ने बताया कि यह किताब इसलिए कि अगर पत्रकार और संपादक बंधु समाज के सभी श्रेणी के लोगों की निजी जिन्दगी को सार्वजनिक करने का अथक प्रयास करते हैं, चाहे इसमे समाचारपत्र, पत्रिका या टेलीविजन का भरपूर शोषण ही क्यों ना करना पड़े, तो क्या समाज को यह जानने का अधिकार नहीं है कि जो पत्रकार और संपादक बंधु समाज चलाने का ठेका लिए बैठे हैं, उन ठेकेदारों की असली पहचान क्या है?
इस किताब की परिकल्पना के बारे में उन्होंने बताया कि जब वे इंडियन एक्सप्रेस में रिपोर्टर थे तब एक संपादक ने बिहार के एक नेता राम विलास पासवान की निजी जिन्दगी के बारे में (दूसरी शादी को लेकर) एक स्टोरी करने को कहा. यह कहानी काफी विस्तार से प्रकाशित हुई. तभी मैंने सोचा क्यों ना पत्रकारों और संपादकों पर भी एक पुस्तक बन जाये और समाज को यह बताया जाये कि आखिर वातानुकूलित कमरे में बैठे ये लोग समाज के ठेकेदार कैसे हैं?
शिवनाथ बताते हैं कि बहुत दिलचस्प होगी यह कॉफी-टेबल किताब. सिर्फ दिल्ली में अबतक ऐसे दर्जनों पत्रकार/संपादक मिल गए हैं। शिवनाथ सवाल भी खड़े करते हैं पत्रकार बिरादरी पर, खासकर नई पीढ़ी पर. कहते हैं- किसे कितना मालूम है कि फलां संपादक या फलां पत्रकार ने अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी कन्या से शादी कर ली या फिर फलां पत्रकार की पत्नी ने अपने पति को छोड़ कर उनके मातहत काम करने वाले से शादी कर ली? कुछ पत्रकारों ने तो दूसरी.. तीसरी पत्नी को छोड़ कर चौथी लड़की जो उनकी बेटी से भी कम उम्र की थी, के साथ घर बसा लिया. समाज को मर्यादा का पाठ पढ़ाने वाले इन पत्रकारों ने सारे कदम खुद मर्यादा के बाहर जाकर उठाए.
किताब पर विवाद होंगे, सवाल उठेंगे कि यह निजी जिंदगी में झांकने की अनैतिक कोशिश तो नहीं. लेकिन लेखक को चिंता नहीं. वे कहते हैं- जब दूसरे की जिंदगी में मीडिया झांकता है तो कहा जाता है कि पब्लिक फिगर है, मेरी नजर में पत्रकार भी पब्लिक फिगर हैं, उनका भी सामाजिक दायित्व है तो उसके बारे में भी आम लोगों को जानना जरूरी है. शिवनाथ के पास अभी तक दो दर्जन ऐसे लोगों की लिस्ट बन चुकी है.
शिवनाथ बताते हैं कि कुछ दिन पहले एक पत्रकार बंधु अपनी पहली पत्नी के बच्चे के नोएडा स्थित स्कूल में गए. मामला अविभावक-शिक्षक मीटिंग का था. एक शिक्षिका ने पूछा- आपकी पत्नी नहीं आयीं? पत्रकार बंधु ने बेहिचक कहा- जिस पत्नी का यह बच्चा है उनके साथ अब मैं नहीं रहता हूँ! शिक्षिका स्तब्ध रह गयीं. शिवनाथ का पाठकों से अनुरोध है कि अगर उनके पास भी किसी ऐसे व्यक्ति की जानकारी है तो उन्हें ई-मेल करें– उनका पता है- [email protected]












rafat
May 28, 2010 at 12:34 pm
MR SHIVNATH SIR WE ARE WAITING FOR THE BOOK.
निरंजन परिहार
May 27, 2010 at 11:40 am
शिवनाथ जी,
आप एकदम सही काम कर रहे हैं। आपने मीडिया के उन लोगों का नकाब उतारने की
तैयारी की है, जो दूसरों के घरों में तो घुस जाते हैं। पर, अपनी असलियत पर
तिलमिला जाते हैं। तिलमिलाने दीजिए। किसी अबला की झिलमिलाती जिंदगी को
बरबाद करने की कोशिश करनेवाले पत्रकारों की असलियत उजागर करते वक्त आप
पूरी ईमानदारी बरतेंगे, यह पक्का विश्वास है।
आपकी किताब के लिए कुछ जानकारियां मुंबई में भी मिल सकती हैं. कुछेक लोग
यहां भी जिंदा है, जो पहली को छोड़ दूसरी के बाद तीसरी के फेर में है। मीडिया में
ऐसा होता है। इस पर आपकी कलम चलेगी। सबको पता भी चलेगा। तो कई चेहरों से
ईमानदारी और नैतिकता का नकाब भी सरकेगा
priya sahgal
May 26, 2010 at 8:06 pm
bahut achchha: ab sab kuchh samne aa jaega ki , ek patrakar ki jindagi kis kis musibat me fasi rahti hai halanki log keval puruso ko hi galat mante hai. din bhar kam karne k bad jab ek patrakar ghar aata hai aur use pyar k badle ghar me patni ki char galiya sunni padti ho to kya wo uske sath rahega?aur agar wo use chhor deta hai to hamae priy bhai sahab unpar kitab likhne lagte hai aise me kaun galat aur kaun sahi kya kaha jae.
Nshah hemnidhi
May 26, 2010 at 5:40 pm
Step in right direction, no one is above board:D
Nshah hemnidhi
May 26, 2010 at 5:42 pm
No body is above board, this is good begining>:(
Sonia Singh
May 26, 2010 at 4:13 pm
परदे में रहने दो ………पर्दा जो खुल गया……. तो ………………………….भेद खुल जायगा !
sandip thakur
May 26, 2010 at 2:09 pm
patrakar ne patni ka tyag kar diya ya patni ne aziz hokar patrakar ko chor diya.yeh tho research ka topic hai.ek bhartiya patni ki jo apeksha hoti hai use kitne patrakar pati pura kar pate hain..subah ghar se nikalna aur raat DARU pe kar ghar ghushna.patni se zayda mobile aur net se chepke rahana.patni chore gee nahi to kya karegi…
Bhagat
May 26, 2010 at 11:45 am
Bhai wah
rajesh sharma
May 26, 2010 at 10:38 am
Rajesh Sharma, 26may, 10
Achchha laga, apne aap ko samaj ka sudhark kahne walon ki pol bhe khulege. Aap ko bahut bahu badhai, pehle se.
sandeep dasan
May 26, 2010 at 4:55 am
Waise Yashwantji in Shivnath Ji ne apni pichali coffee table ( Prime Ministers wali)mein Angrezi ke saath balatkar to kiya hi tha, uske atirikta kuchch logon ka parishramik abhi tak nahi diya hai. Aise mahan hasti agar bhadas ke samarthan prapta kare to bhadas ki vishwasniyta par sandeh hone lagta hai.
Ravindra Pancholi
May 26, 2010 at 12:10 am
बहुत अच्छा है.सफ़ेदपोश समाज सुधारकों की असलियत सबके सामने आएगी.शिवनाथ जी को अग्रिम बधाई.
Dr. Hari Ram Tripathi
May 25, 2010 at 4:08 pm
EXCELLENT IDEA.
Hari Ram Tripathi,,senior journalist,,LUCKNOW.
Dr. Hari Ram Tripathi
May 25, 2010 at 4:04 pm
EXCELLENT IDEA. ALL RESPONSIBLE INTELLECTUALS MUST PROVIDE RELEVENT INFORMATION TO THE WRITER. =H R T …LUCKNOW