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देहरादून के पत्रकारों के बीच आपसी ‘राजनीति’ तेज

देहरादून में पत्रकारों के बीच राजनीति गरम है। पत्रकारों के दो गुट आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने में जुटे हैं। मामला सलीम सैफी से जुड़ा है। पहले कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके और अब दैनिक शाह टाइम्स, देहरादून  के रेजीडेंट एडिटर  सलीम सैफी अपनी नई कार का नंबर लेने देहरादून के संभागीय परिवहन कार्यालय पहुंचे। उनके साथ आज तक के संवाददाता अभिषेक भी थे। आरटीओ एके सिंह का कहना है कि सलीम सैफी ने अपनी गाड़ी के लिए बिना पैसे दिए इच्छित नंबर लेने के लिए दबाव डाला और उनके साथ अभद्रता की। आरटीओ ने इस बात की लिखित शिकायत देहरादून के एसएसपी से की है। एसएसपी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच डालनवाला के सीओ अजय सिंह कर रहे हैं। इस बीच, इस प्रकरण की खबरें कुछ राष्ट्रीय व कुछ स्थानीय अखबारों में प्रकाशित हो गई। सलीम सैफी का कहना है कि आरटीओ में दलाली करने वाले पत्रकारों का एक गैंग उनसे चिढ़ा हुआ है और उन्ही लोगों ने आरटीओ को उकसाकर उनके खिलाफ शिकायत कराई है। सलीम कहते हैं कि जो आदमी साढ़े छह लाख की कार खरीदेगा वह ढाई हजार रुपये के नंबर के लिए क्यों झगड़ा या अभद्रता करेगा।

पेश है आरटीओ की लिखित शिकायत और सलीम सैफी का पक्ष

देहरादून में पत्रकारों के बीच राजनीति गरम है। पत्रकारों के दो गुट आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने में जुटे हैं। मामला सलीम सैफी से जुड़ा है। पहले कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके और अब दैनिक शाह टाइम्स, देहरादून  के रेजीडेंट एडिटर  सलीम सैफी अपनी नई कार का नंबर लेने देहरादून के संभागीय परिवहन कार्यालय पहुंचे। उनके साथ आज तक के संवाददाता अभिषेक भी थे। आरटीओ एके सिंह का कहना है कि सलीम सैफी ने अपनी गाड़ी के लिए बिना पैसे दिए इच्छित नंबर लेने के लिए दबाव डाला और उनके साथ अभद्रता की। आरटीओ ने इस बात की लिखित शिकायत देहरादून के एसएसपी से की है। एसएसपी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच डालनवाला के सीओ अजय सिंह कर रहे हैं। इस बीच, इस प्रकरण की खबरें कुछ राष्ट्रीय व कुछ स्थानीय अखबारों में प्रकाशित हो गई। सलीम सैफी का कहना है कि आरटीओ में दलाली करने वाले पत्रकारों का एक गैंग उनसे चिढ़ा हुआ है और उन्ही लोगों ने आरटीओ को उकसाकर उनके खिलाफ शिकायत कराई है। सलीम कहते हैं कि जो आदमी साढ़े छह लाख की कार खरीदेगा वह ढाई हजार रुपये के नंबर के लिए क्यों झगड़ा या अभद्रता करेगा।

पेश है आरटीओ की लिखित शिकायत और सलीम सैफी का पक्ष


आरटीओ की शिकायत


पत्रांक 45/ प्रशासन / 09      

दिनांक 18 अप्रैल 2009

सेवा में

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

देहरादून

विषय- कार्यालय में पत्रकार बता कर धमकी दिए जाने के संदर्भ में

महोदय

उपरोक्त विषयक आपको अवगत कराना है कि दिनांक 16.4.2009 में अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय कक्ष में 02 व्यक्ति लगभग 12.30 बजे आये तथा उनके द्वारा अपना परिचय श्री मो. सलीम सैफी स्थानीय सम्पादक दैनिक टाइम्स एवं श्री अभिषेक आरटीओ द्वारा की गई लिखित शिकायतसंवाददाता आज तक टीवी चैनल के रूप में दिया गया। इसके पश्चात उनके द्वारा वाहनों के पंजीयन के संबंध में वर्तमान पंजीयन सिरीज की सूचना मांगने पर उन्हें अवगत कराया गया कि वर्तमान में पंजीयन सिरीज यूके-07जेड-1290 के आसपास चल रही है। श्री सलीम सैफी के द्वारा एक प्रार्थना पत्र लिखकर अपनी नई वाहन स्विफ्ट डिजायर पर पंजीयन सं. यूके-07जेड-2009 आवंटित करने हेतु आवेदन दिया गया है। मेरे द्वारा उन्हें स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया कि शासनादेश के अनुसार कोई आगे का नंबर लिया जाना है तो उसके लिए निर्धारित शुल्क जमा किया जाना अनिवार्य है। आपके द्वारा जो नंबर आवंटन हेतु आवेदन किया गया है उसका निर्धारित शुल्क रु. 2500/- जमा करने के उपरांत ही आपके लिये यह पंजीयन नंबर आरक्षित किया जा सकता है। इस पर श्री सलीम सैफी के द्वारा धमकी देते हुये कहा गया कि मुझे सिखा रहे हो और जानते नहीं हो मैं क्या चीज हूं। तुम्हें यह नंबर तो मुझे ही देना पड़ेगा और पैसे भी मैं जमा नहीं कराउंगा। मैं नंबर तो चाहूं तो मुख्यमंत्री से या गढ़वाल कमिश्नर से कह कर भी ले सकता हूं। कार्यालय में मेरे कक्ष में उस समय कई लोग अपने कार्यों हेतु मुझसे मिलने हेतु खड़े थे। उनके समक्ष ही यह व्यक्ति मेरे से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुये धमकी देते हुये अपना प्रार्थना पत्र कार्यालय में छोड़कर चला गया है।

अतः महोदय से अनुरोध है कि इस संबंध में जांच कराकर इस तरह के पत्रकारों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने का कष्ट करें।

भवदीय

ए.के. सिंह

संभागीय परिवहन अधिकारी

देहरादून

प्रतिलिपि- परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड महोदय को सूचनार्थ प्रेषित।


सलीम सैफी का पक्ष


इस मामले पर सलीम सैफी ने भड़ास4मीडिया से कहा- ”मैं शाह टाइम्स, देहरादून का रेजीडेंट एडिटर हूं। आरटीओ से फोन पर टाइम लेने के बाद उनसे मिलने गया। उनसे पेड नंबरों की सूची मांगी। पूरी सूची देखने में 2009 नंबर नहीं था। मैंने इस अनपेड नंबर (निःशुल्क) को एलाट करने का अनुरोध किया। आरटीओ ने कहा कि इसके लिए ढाई हजार रुपये देने होंगे। मैंने जब उन्हें बताया कि यह नंबर पेड में नहीं है तो उन्होंने अप्लीकेशन लिखकर देने को कहा। मैंने वहीं पर अप्लीकेशन लिखकर आरटीओ के दे दिया। आरटीओ निःशुल्क नंबर के लिए ढाई हजार रुपये मांग रहे थे जो कि गलत था। इसका मैंने विनम्रता से विरोध किया। पूरी बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। मैं आरटीओ से भी पहली बार मिला था। जो भी आरोप लगाए गए हैं वे गलत है। दरअसल आरटीओ के यहां देहरादून के कई पत्रकारों का एक गैंग दलाल के रूप में काम करता है। ये लोग वीआईपी नंबर दिलवाने, लाइसेंस बनवाने, गाड़ियों का फिटनेस प्रमाण पत्र दिलाने आदि का काम पैसे लेकर कराते हैं। यहां हर चीज के पैसे तय होते हैं। इन्ही लोगों ने आरटीओ से मेरे खिलाफ साजिशन पत्र लिखवाया। पत्र लेकर एसएसपी से मिलने भी पत्रकार ही गए थे। अगर मैंने साढ़े छह लाख रुपये की गाड़ी खरीदी है तो ढाई हजार रुपये नंबर के देने में मुझे कैसे दिक्कत हो सकती है, लेकिन आरटीओ उस नंबर के पैसे मांग रहे थे जो निःशुल्क था। गलत चीज का विरोध करने पर आरटीओ के समर्थक दलाल पत्रकारों को दिक्कत होने लगी। इन्हीं दलाल पत्रकारों ने अपने अखबारों में मेरे खिलाफ खबरें प्रकाशित कराईं और हर जगह मेरे खिलाफ साजिशन दुष्प्रचार कर रहे हैं। मैं इन दलालों के दुष्प्रचार से डरने वाला नहीं। गलत चीज का विरोध करता रहूंगा।”

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