नई दुनिया, इंदौर में चार साल से सीनियर रिपोर्टर के पोस्ट पर काम कर रहे गजेंद्र शर्मा ने नई दुनिया अखबार को गुडबाय बोल दिया है. गजेंद्र ने नई पारी पत्रिका, इंदौर के साथ शुरू की है.
बताया जाता है कि गजेंद्र का नई दुनिया में अपने रेजीडेंट एडिटर जयदीप कार्णिक से विवाद हो गया था. आरई के व्यवहार और भाषा-शैली से आहत गजेंद्र ने विरोधस्वरूप अपना इस्तीफा भेज दिया. वे नई दुनिया में सीनियर रिपोर्टर के पद पर थे और इसी पद पर पत्रिका, इंदौर को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि गजेंद्र शर्मा ने इस्तीफे के साथ प्रबंधन को लंबा-चौड़ा पत्र भेजा है.












manorath mishra
May 31, 2010 at 1:00 pm
yah ke badi kharab bimari hai ki jo safal hai wo chaplus hai. matlab aap ko sahi aadmi banana hai to sabsey pehley aap jindgi me kuch paaney ka khayal chhod deyn, ya miley to thukra deyn. Jaideep Karnik ko mai nahi jaanta, lekin etna jaanta hoon ki kisi ko mauka sirf chaplusi ke liye nahi milta. aap samajh gaye ki wo chaplus hai Vinay chajlaani bewakuf hai ki wo nahi jaantey ki kaun chaplus hai kaun sahi.
Ronit Sharma
May 30, 2010 at 3:58 pm
जयदीप कर्णिक के लिए इस तरह का कमेंट्स करना जल्दबाजी है। कॉलेज जीवन से जयदीप को जानने वाले उसकी प्रतिभा से भली भांति परिचित हैं। यह कहना कि जयदीप कर्णिक को विनय जी का खास होने से यह पद मिला है एकदम गलत है। क्योंकि नईदुनिया में काम करने वाला हर व्यक्ति ही मालिक का खास होता है। रही बात नईदुनिया से लाइन लगने की बात तो वो एकदम गलत है क्योंकि इंदौर में कितने ही अखबार आए लेकिन नईदुनिया को कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। जयदीप को स्थानीय संपादक उसकी योग्यता के बल पर ही बनाया गया है क्योंकि नईदुनिया में इसके अलावा किसी ओर को संपादक बनाया जाता तो अंदरुनी राजनीति बढ़ने का खतरा था।
pankaj panwar
May 30, 2010 at 5:33 am
जब कोई अनुभवहीन आदमी किसी अखबार का संपादक बनता है तो इस तरह की दिक्कत होना स्वाभाविक है. जयदीप कार्निक अक्षम और अनुभवहीन होने के साथ अक्खड़ भी है, उसे इस बात की गलत फहमी है के उसे सब आता है, नईदुनिया के इंदौर संस्करण की बर्बादी का कारण भी यही है. जयदीप की सबसे बड़ी काबलियत यह है की वो विनय छजलानी का ख़ास पट्ठा है. अभी तो इस एक पत्रकार ने छोड़ा है, कुछ दिन बाद यहाँ लाइन लगने वाली है. गजेन्द्र शर्मा के व्यहार को जानने वालो को पता है की यदि इतने सुशील और संस्कारित पत्रकार ने जयदीप पर उंगली उठाई है तो गलती सिर्फ जयदीप की हे होगी. इस संपादक के राज मई सिर्फ मराठी लोगो का ही भला हो रहा है. हर काम मै उनको हे आगे रखा जा रहा है. जयदीप को पत्रकारिता का राज ठाकरे कहा जाय तो गलत नहीं होगा. अभी तो बहुत कुछ होगा यदि जयदीप जैसे अक्षम लोगो को संपादक बनाया जाता रहा तो….!!!!!