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गांधी का अपमान करने वाला भारतीय है

: बंगलोर में पैदा हुआ और न्यूयार्क में बस गया गौतम प्रसाद : बोला- मकसद मजाक उड़ाना नहीं, मनोरंजन करना है : उसका नाम गौतम प्रसाद है. बंगलोर में जन्मा है. इन दिनों न्यूयार्क स्थित अनिवासी भारतीय है. योग सिखाकर और स्टैंडअप कामेडी शो करके वह अपना गुजारा करता है. इसी गौतम प्रसाद ने गांधी को अपमानित करने वाला वीडियो तैयार कराया है. वीडियो के आखिर में गौतम प्रसाद का नाम भी आता है. गौतम के अपने तर्क हैं. तर्क नहीं बल्कि कुतर्क. उसका पक्ष सुनिए-

: बंगलोर में पैदा हुआ और न्यूयार्क में बस गया गौतम प्रसाद : बोला- मकसद मजाक उड़ाना नहीं, मनोरंजन करना है : उसका नाम गौतम प्रसाद है. बंगलोर में जन्मा है. इन दिनों न्यूयार्क स्थित अनिवासी भारतीय है. योग सिखाकर और स्टैंडअप कामेडी शो करके वह अपना गुजारा करता है. इसी गौतम प्रसाद ने गांधी को अपमानित करने वाला वीडियो तैयार कराया है. वीडियो के आखिर में गौतम प्रसाद का नाम भी आता है. गौतम के अपने तर्क हैं. तर्क नहीं बल्कि कुतर्क. उसका पक्ष सुनिए-

”इस वीडियो को इतने गम्भीर नजरिए से नहीं देखना चाहिए. वीडियो बनाने के पीछे मेरा उद्देश्य मजाक उड़ाने का नहीं, बल्कि मनोरंजन करने का था. पैरोडी में कोई व्यक्ति विशेष नहीं होता है और विदूषक को राजाओं की नकल करने में भी कोई दिक्कत नहीं है और बताइए कि गांधीजी यदि आज जीवित होते तो उन्हें सबसे बुरा क्या लगता, मेरा वीडियो या फिर दुनिया में हो रही हिंसा? हम लोगों ने गांधीजी की प्रतिमा को सोच विचारों के दायरे में इतना जकड़ रखा है कि हम उनकी सीख भी भूल गए हैं. मैंने तो बस एक कल्पना की और उसे वास्तविकता प्रदान की. इस वीडियो में पोल डांस करते हुए गांधीजी सब की नजर में खटके, क्योंकि सब को पता है कि गांधीजी कभी ऐसा नहीं कर सकते. विसंगति ही व्यंग्य उत्पन्न करती है. गांधीजी की नकल करने वाला किरदार एक विदूषक का है. इसमें मैं खुद गांधीजी नहीं बना हूं, बल्कि इस वीडियो का एक किरदार है, जो विदूषक है, वह गांधीजी बना है. विदूषक का किरदार सोचता है कि ऐसे गांधीजी की तरह पहनकर पोल डान्स करने का काम अच्छा रहेगा. कायदे से कहा जाए तो मैं यहां खुद का मजाक उड़ा रहा हूं. यह सब दूसरों द्वारा समझ पाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन एक कलाकार होने के नाते यह मेरे लिए महत्वपूर्ण था. मैं तो चाहता हूं कि जिन्हें यह वीडियो पसंद नही आया है, वो अपने परिवार और मित्रजनों को बताए कि वीडियो न देखें. अगर वह ऐसा करते है तो इस वीडियो पर भारत में पाबंदी लगाने पर भी मैं उन्हें समर्थन दूंगा. इस वीडियो को देखने वाले बहुत से लोगों ने मुझ पर पथराव किया, मारा और हत्या की धमकी दी है. मुझे नहीं लगता कि यह सब गांधीजी को उचित लगता. गांधीजी ने कहा था कि आप जो बदलाव दुनिया में लाना चाहते हैं, उसे पहले स्वयं में ढालिए. अगर हम गांधीजी को सच्चे दिल से आदर देना चाहते हैं तो हमें उन तत्वों का सम्मान करना होगा, जिनके लिए उन्होंने सारी जिंदगी बिताई. हमें शांति, अहिंसा तथा दया को सम्मिलित करना होगा. ”

सुना आपने गौतम का तर्क. वीडियो निर्माता गौतम प्रसाद जो कुछ बोल रहा है, वह सब पुराना है. यह प्रकरण भी पुराना है. वर्ष 2006 के आखिरी और 2007 के शुरुआती महीनों में गांधीजी का मजाक उड़ाने वाला यह वीडियो जारी किया गया था. तब इतना बवाल मचा था कि वीडियो को यूट्यूब से हटाना पड़ा. उस वक्त गौतम प्रसाद ने वीडियो के पक्ष में तमाम कुतर्क करने के साथ-साथ खेद भी जताया था, इसलिए कि कई लोगों को भावनाएं आहत हुईं थीं. पर अब फिर से इस वीडियो को जारी कर दिया गया है. अबकी भी यूट्यूब पर अपलोड किया गया है. ये पता नहीं चल सका है कि अबकी इस वीडियो को यूट्यूब पर किसने अपलोड किया है, खुद गौतम प्रसाद ने या किसी और ने.

वर्ष 2007 के जनवरी महीने में वेबसाइट, यूट्यूब पर दिखाए गए विवादास्पद गांधी वीडियो के निर्माता, गौतम प्रसाद ने भारत में प्रकट हुई नाराजगी पर खेद व्यक्त किया था. उसने तब यह भी कहा था कि मैंने केवल अपने अभिनय को रोजी-रोटी के तौर पर बढ़ावा देने के लिए यह वीडियो बनाकर वेबसाइट में शामिल किया था. जो भी हो, लेकिन यह वीडियो पर यूट्यूब पर लाकर एक तो यूट्यूब वालों ने अपनी मंशा जता दी है कि जिस चीज पर बहुत ज्यादा विवाद पहले हो चुका हो, उसे दुबारा अपलोड क्यों करने दिया गया और अपलोड कर भी दिया गया तो अभी तक उसे रिमूव क्यों नहीं किया गया. क्या यही अगर अमेरिका के किसी महात्मा के साथ किया जाता तो अमेरिकी सरकार चुप रहती? गूगल और यूट्यूब की इतनी हिम्मत होती कि एक बार विवाद और आपत्ति के बाद दुबारा वीडियो अपलोड होने देते?

इस मामले में भड़ास4मीडिया की राय है कि गौतम प्रसाद पर भारत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए और इसके लिए उसे भारत लाने की कोशिश करनी चाहिए. साथ ही महात्मा गांधी के अपमान को हम भारतीयों को उसी तरह लेना चाहिए जैसे हम भगवान राम और पैगंबर मोहम्मद, ईसा मसीह के अपमान को लेते हैं. यह भी सोचना चाहिए कि जो गौतम प्रसाद भारतीय संत का अमेरिका में मजाक उडा़कर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है, वह क्या अमेरिका में ईसी मसीह को पोल डांस करते हुए दिखाकर उनका मजाक उड़ा सकता था. उसे तुरंत उसी वक्त कोई नौजवान सिरफिरा अमेरिकी गोली मार देता.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

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0 Comments

  1. gagan

    August 11, 2010 at 9:48 am

    main aisa nahi socta yashwent ji kyuki ager atel ji jaise mehan logo ka mejak udaya jaa sakta hai to gandhi ka bhi udaya ja sakta hai wo isliye kyuki gandhi ne desh ka wibhajen kiya na ki atel ji ne ager azadi ke time hi jinna ko kursi pe bithaya hota to ye din nahi dekhna pedta jo roz kabhi kasmir main to kabhi sansad pe to kabhi bombay pe hamle ho rehe hai to ager gandhi ka mezak udaya to kya hua ha atel ji ke baare main aap likhte to aapke is lekh ko jyada samerthen milta …………..

  2. anand bhai

    August 10, 2010 at 4:04 pm

    mai aapke vicharo se sahmat hu yasvant ji. gavtam ko bharat lakar mukadma chalana chahia

  3. madhulika

    August 12, 2010 at 1:19 pm

    Gandhi ji ke vicharon aur siddhanto ka jis kadar is desh ke netaon ne mazak udaya hai uski tulna me udaya ji ka vedio kuch bhi nahi hai.Kam se kam udaya ji mein safgoi to hai.Hamare neta to apne niji swarthon ke liye aaj tak bapu ka nam istemal karte rahe hain.

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