जो बोया वही काटेंगे

गोविंद गोयलबंगाल की टीवी रिपोर्टर शोभा दास के खिलाफ केस, चंडीगढ़ में प्रेस से जुड़े लोगों को कमरे में बंद किए जाना… ऐसी खबरें अब आम हो गई हैं। महानगरों में रहने वाले, बड़ी-बड़ी तनख्वाह पाने वाले, ऊंचे नाम वाले पत्रकारों को कोई अचरज इन ख़बरों से हो तो हो, हमें तो नहीं है। हो भी क्यूं, जो बोया वही तो काट रहें हैं। वर्तमान में अखबार अखबार नहीं रहा, एक प्रोडक्ट हो गया, और पाठक एक ग्राहक। हर तीस चालीस किलोमीटर पर अखबार में ख़बर बदल जाती है। ग्राहक में तब्दील हो चुके पाठक को लुभाने के लिए नित नई स्कीम चलाई जाती है। पाठक जो चाहता है, वह अख़बार मालिक दे नहीं सकता, क्योंकि वह भी तो व्यापारी हो गया। इसलिए उसको ग्राहक में बदलना पड़ा। ग्राहक को तो स्कीम देकर खुश किया जा सकता है, पाठक को नहीं।

यही हाल न्यूज़ चैनल का हो चुका है। जो ख़बर है वह ख़बर नहीं है। जो ख़बर नहीं है, वह बहुत बड़ी ख़बर है। हर ख़बर में बिजनेस, सनसनी, सेक्स, सेलिब्रिटी, क्रिकेट या बड़ा क्राईम होना जरुरी हो गया। इनमे से एक भी नहीं है, तो ख़बर नहीं है। पहले ‘फाइव डब्ल्यू, वन एच’ का फार्मूला ख़बर के लिए लागू होता था। अब यह सब नहीं चलता। जब यह फार्मूला था, तब अख़बार प्रोडक्ट नहीं था। वह ज़माने लद गए जब पत्रकारों को सम्मान की नजर से देखा जाता था। आजकल तो इनके साथ जो ना हो जाए वह कम। यह सब इसलिए कि आज पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं। मालिक को वही पत्रकार पसंद आता है जो या तो वह बिजनेस दिलाये या फ़िर उसके लिए सम्बन्ध बना उसके फायदे मालिक के लिए ले।

मालिक और अख़बार, न्यूज़ चैनल के टॉप पर बैठे उनके मैनेजर, सलाहाकार उस समय अपना मुंह फेर लेते हैं जब किसी कस्बे, नगर के पत्रकार के साथ प्रशासनिक या ऊंची पहुंच वाला शख्स नाइंसाफी करता है। क्योंकि तब मालिक को पत्रकार को नमस्कार करने में ही अपना फायदा नजर आता है। रिपोर्टर भी कौन सा कम है। एक के साथ मालिक की बेरुखी देख कर भी दूसरा झट से उसकी जगह लेने पहुंच जाता है। उसको इस बात से कोई मतलब नहीं कि उसके साथी के साथ क्या हुआ, उसे तो बस खाली जगह भरने से मतलब है। अब तो ये देखना है कि जिन जिन न्यूज़ चैनल और अख़बार वालों के रिपोर्टर्स के साथ बुरा सलूक हुआ है, उनके मालिक क्या करते हैं। पत्रकारों से जुड़े संगठनों की क्या प्रतिक्रिया रहती है। अगर मीडिया मालिक केवल मुनाफा ही ध्यान में रखेंगें तो कुछ होनी-जानी नहीं। संगठनों में कौन-सी एकता है जो किसी की ईंट से ईंट बजा देंगे। उनको भी तो लाला जी के यहां नौकरी करनी है। किसी बड़े लाला के बड़े चैनल, अखबार से जुड़े रहने के कारण ही तो पूछ है। वरना तो नारायण नारायण ही है।


लेखक गोविंद गोयल वरिष्ठ पत्रकार हैं। हिंदी ब्लागिंग में खास पहचान बनाने वाले गोविंद के ब्लाग का नाम नारदमुनि है। वे दुनिया के सबसे बड़े हिंदी कम्युनिटी ब्लाग भड़ास ब्लाग के भी रेगुलर लेखक हैं। गोविंद गोयल से संपर्क gg.ganganagar@yahoo.com के जरिए किया जा सकता है।

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published.