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हमारा हीरो : जीते-जागते संस्थान हैं विनोद शुक्ला

Vinod Shuklaएक वाकया है। विनोद शुक्ला से एक बार अंग्रेजी अखबार के एक संपादक ने सवाल दागा- ”हिन्दी पट्टी के संपादकों की सबसे बड़ी समस्या क्या है?” विनोद जी ने कई जानकारियां गिनाईं लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। बाद में जवाब उन्होंने खुद दिया। कहने लगे- ”आज का हर हिंदी संपादक विनोद शुक्ला बनना चाहता है, यही है उनकी सबसे बड़ी समस्या।” बात सोलह आने सच थी, कम या ज्यादा आज भी सच है। आजकल के हिंदी संपादक विनोद शुक्ला बनना चाहते हैं।

Vinod Shuklaएक वाकया है। विनोद शुक्ला से एक बार अंग्रेजी अखबार के एक संपादक ने सवाल दागा- ”हिन्दी पट्टी के संपादकों की सबसे बड़ी समस्या क्या है?” विनोद जी ने कई जानकारियां गिनाईं लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। बाद में जवाब उन्होंने खुद दिया। कहने लगे- ”आज का हर हिंदी संपादक विनोद शुक्ला बनना चाहता है, यही है उनकी सबसे बड़ी समस्या।” बात सोलह आने सच थी, कम या ज्यादा आज भी सच है। आजकल के हिंदी संपादक विनोद शुक्ला बनना चाहते हैं।

विनोद जी का रौबदाब, उनकी नियंत्रण शैली, नेतृत्व क्षमता, पाठकों पर पकड़ और इन सबसे इतर उनका जलवा-हनक, एक झटके में पा लेना चाहते हैं। लेकिन विनोद शुक्ला बनना क्या इतना आसान है?  विनोद शुक्ला बनने के लिए कितना जूझना पड़ता है? विनोद शुक्ला बनने की खातिर खुद विनोद शुक्ला ने कितने पापड़ बेले होंगे? क्या-क्या परेशानियां झेली होंगी? आजकल के संपादकों को शायद इस बारे में कम ही पता हो।

कंटेंट का शोर आज बहुत सुनाई दे रहा है लेकिन दो दशक पहले संपादकीय विभाग में जब विनोद शुक्ला कंटेंट की महत्ता समझाते थे तब लोगों को उनकी बाते महज ”बौद्धिक” लगती थीं। पूंजी की कमी, जर्जर मशीनें मगर कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले नौजवानों की फौज के दमखम पर वह काशी के सुप्रतिष्ठित हिन्दी दैनिक ‘आज’ को कानपुर लाये ही नहीं बल्कि दैनिक समाचार पत्रों का बहुसंस्करण स्पर्धा के लिए आह्वान भी कर बैठे। कालांतर में वे दैनिक जागरण के लखनऊ संस्करण से जुड़े। झंझावतों से जूझ रहे इस अखबार को सर्वमान्य और लोकप्रिय बनाकर ही माने। दैनिक जागरण के कार्यकारी संपादक पद से सेवानिवृत्त होकर अब वह लखनऊ में ही अध्ययन, मनन और चिंतन में जुटे हैं। अध्ययन उनका सर्वप्रिय शगल है और दूसरों के लिए मूलमंत्र है- ‘पढ़ो और बढ़ो’।

भड़ास4मीडिया ने हिन्दी पत्रकारिता के इस जीते-जागते संस्थान का विस्तार से इंटरव्यू किया। कई तीखे सवालों को उनके सामने रखा। विनोद जी ने कुछ बचाया नहीं। बेबाक बोले। बोलते रहे। भड़ास4मीडिया के लोकप्रिय पाक्षिक कालम हमारा हीरो में इस बार विनोद शुक्ला हैं हमारे हीरो। इस इंटरव्यू में विनोद शुक्ला ने अपनी जिन्दगानी, पत्रकारीय सफर और भविष्य के कदम को लेकर काफी कुछ बातें कहीं। जवाब देते समय विनोद जी कभी रूष्ट से दिखे, कभी बच्चों की तरह खुश हुए और कभी गदगद भाव से खिलखिलाए।

अगर आप भी कोई सवाल विनोद शुक्ला से करना चाहते हैं तो [email protected] पर लिख भेजिए। हां, एक सूचना भी है। पाक्षिम कालम हमारा हीरो अब मासिक किया जा रहा है। इसलिए विनोद जी का इंटरव्यू एक नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा। इसके पीछे वजह इस कालम की गुणवत्ता को बरकरार रखना है, जिसके लिए हम कटिबद्ध हैं।

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