हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्राचार के मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MMC) के इम्तिहान 22 जून से लेकर 13 जुलाई तक चलेंगे। लेकिन परीक्षा का केंद्ग सिर्फ और सिर्फ शिमला रखा गया है। जिन लोगों ने अपनी पहली प्राथमिकता में दिल्ली और नोएडा केंद्र भरे थे, वो परेशानी में पड़ गये हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्राचार के बाकी इम्तिहान दिल्ली और नोएडा में हो रहे हैं लेकिन मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MMC) के छात्रों को ही शिमला जाकर परीक्षा देने की सज़ा क्यों दी जा रही है, यह समझ से परे है। अगर लोगों के पास इतना वक्त और पैसा होता तो वो पत्राचार से क्यों पढ़ाई करते। कहीं नियमित एडमिशन ना ले लेते।
जबकि ना तो एडमिशन की बुकलेट में कहीं उल्लेख था कि इम्तिहान सिर्फ शिमला में होंगे और ना ही पत्राचार और पत्रकारिता विभाग के किसी अधिकारी ने कभी बताया कि ऐसा हो सकता है। फीस के आधे 10 हज़ार रुपये लेने के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय छात्रों के साथ इस तरह की दगाबाज़ी कर रहा है। परेशान छात्र क्या करें? पत्रकारिता विभाग के लोग कहते हैं उनके हाथ में कुछ नहीं हैं, इसलिये वो कोई मदद नहीं कर सकते। पत्राचार विभाग के प्रमुख को दौरों से फुरसत नहीं है। कुलपति महोदय से उनके पीए बात ही नहीं करवाते हैं। परीक्षा सर पर है और छात्र इस परेशानी में फंसे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी अपनी इसी तरह की हरकतों से देश भर में बदनाम हो चुकी है। उसे छवि बनाने में तो बरसों लगेंगे लेकिन जो छवि बची है उसे बचाये रखने के लिये कम से कम इस तरह के अमानवीय फैसले तो छोड़ दे।
दिल्ली और नोएडा के कुछ छात्र











