भड़ास4मीडिया को मेल के जरिए कुछ पाठकों ने सूचना दी है कि हिंदुस्तान के नोएडा एडिशन में कल 4 मार्च को पूरा का पूरा एक पेज रिपीट हो गया. पेज नंबर 12 और पेज नंबर 14 में एकाध खबरों को छोड़ दें तो बाकी सब कुछ एक जैसा था. पेज रिपीट होने में एडिट पोज गोल हो गया. मतलब, संपादकीय पेज छपा ही नहीं. कुछ दिनों पहले ऐसी ही गलती हिंदुस्तान, आगरा में हुई. वहां एक दिन पहले का एडिट पेज पब्लिश कर दिया गया.
अखबार की दुनिया में पेज व खबर रिपीट होने जैसी गल्तियां होती रहती हैं लेकिन किसी भी अखबार के लिए ऐसी गल्तियां उसकी ब्रांड इमेज को प्रभावित करती हैं. पाठकों में अखबार में कार्यरत लोगों के लापरवाह होने की छवि बनती है. यह पता नहीं चल पाया है कि नोएडा एडिशन में पेज रिपीट होने में किसकी गलती है, संपादकीय विभाग की या प्रोडक्शन की. प्राथमिक गल्ती चाहे जिस भी विभाग की हो लेकिन अखबार छपने से पहले सारे पेजों को चेक करना व अखबार छपने पर उसका मिलान करना आमतौर पर संपादकीय विभाग के हिस्से का काम होता है.












Pradeep Chaudhary
March 7, 2010 at 9:14 am
Asia kai baar ho jata hai.ye ek manav truti hai. maina kai bade banner ke samachar patron m is ko dekahai.
Media khabri
March 6, 2010 at 6:15 am
Kya baat hai Yashwant ji, dekha aapke chamche Avinash ko kaisa bura lag gaya jab hakikat samne aayi.
avinash aacharya
March 5, 2010 at 10:35 am
yashwant ji aap bada kaam kar rahey hai. jara se comment per vichalit hokar jawab mat likha kijiye. bhadas4media sabka hai, aap per comment ho tab bhi waise hi sweekariye jaise baaki sab swweekartey hai. turat furat jawab likhney se lagta hai ki likhney waaley ke target ko aap pura kar rahey hai.
avinash
यशवंत सिंह
March 5, 2010 at 7:57 am
याशेंद्र जी, आपने अपनी भड़ास निकाल दी, यह अच्छा किया. आपका मन हल्का हो गया होगा. बाकी मेरे दिल में किसी के भी प्रति बुरा भाव, नकारात्मक भाव नहीं रहता. मीडिया में रहते हुए हर कोई बेहतरी तरक्की के लिए इनसे-उनसे मिला करता है पर अगर बात नहीं बनी तो इसका मतलब यह तो नहीं कि कोई बुरा मान जाएगा. अगर आपको ऐसा लगता है तो कहीं मेरे में ही चूक है, जिसे ठीक करने की कोशिश करूंगा. मेरे खयाल से इस खबर में सिर्फ यही बताया गया है कि पेज रिपीट हो गया, किसी व्यक्ति के उपर कोई टिप्पणी नहीं की गई है.
यशवंत
yashendra singh
March 5, 2010 at 7:46 am
galti badi hai, ya kahiye had ki laaparvaahi. lekin ek baat aur kehna chaunga ki ab aap Hindustan ke baare me kuch bhi likhtey hai to ussey aapki nafrat tapakti hai. aapney jab se ye likha ki aap shashi shekhar se naukari maangney gaye they tab se ye lagta hai ki tab ka gussa hindustan ke hawaley se tapakata rehta hai.