एक पाठक ने रांची से मेल के जरिए एक सूचना दी है, साथ में एक सवाल भी किया है. वे लिखते हैं… ”हिंदुस्तान दैनिक ने रांची समेत कई संस्करणों में 4 जुलाई के अंक में अंक 1 वर्ष 1 लिखा है और आरएनआई आवेदित लिखा है. इसका तात्पर्य पता कर हम सबों को सूचित करें. वैसे मुंगेर के एक पत्रकार ने हिंदुस्तान पर केस किया था कि आप एक आरएनआई नंबर से अलग-अलग जगहों से अखबार नहीं निकल सकते. कहीं यह वही मामला तो नहीं है?”
अगर इस प्रकरण के बारे में किसी को कुछ पता हो तो जरूर मेल या कमेंट के जरिए सूचित करे. आरएनआई नंबर और अलग-अलग एडिशन को लेकर भड़ास4मीडिया पर एक खबर पहले प्रकाशित हो चुकी है, उसे पढ़ने के लिए क्लिक करें- हिंदुस्तान अखबार का फर्जीवाड़ा
-एडिटर, भड़ास4मीडिया












aftab alam
July 7, 2010 at 8:50 am
मेरे ख्याल में किसी भी अखबार के अलग-अलग संस्करण के लिए अलग-अलग आरएनआई नंबर होता है। जो अखबार अपना संस्करण किसी स्थान से जब प्रारंभ करता है तो उस समय का आरएनआई नंबर उसे अलॉट किया जाता है। आश्चर्य है कि हिन्दुस्तान जैसे राष्ट्रीय और पुराने अखबार में अलग-अलग संस्करण के लिए अब तक एक ही नंबर पर कैसे काम चल रहा था? वैसे एक और बात है कि आरएनआई के पोर्टल पर भी इस प्रकार की समस्याओं का समाधान नहीं दिखाई देता है। इसलिए जरूरी है कि इसपर सरकार का ध्यान जाए। आशा है कि हिंन्दुस्तान की इस खबर के बाद से देश के अन्य समाचारपत्र समूह के प्रबंधकों के भी कान खड़े हो गए होंगे और वे भी अपने नंबर को जांचने में लगे होंगे। होना भी चाहिए।
आफताब आलम (मुंबई)
संपादक, पत्रकारिता कोश/मीडिया डायरेक्टरी
मो. 09224169416
[email protected]
Sadhna
July 10, 2010 at 6:07 am
Aftab is quite right. for any news paper to start a new edition from any other state it is mandatory to get new title verification from RNI. After this they start Vol 1 issue 1. the bigger papers avoid this process because for vol1 issu1 paper they will have to wait for 18 months to be empanneled in DAVP. For Hindustan case I came to know that one young officer District information Officer Dehradun Nitin upadhyaya protested their practice, gave them notices inspite of heavy pressure and at last compell them to start afresh.