हिंदुस्तान अखबार में हुए प्रमोशनों में पूरबवाद साफ झलक रहा है. इससे पश्चिम के कामकाजी लोग खासे नाराज हैं. कभी पहाड़वाद के लिए चर्चित इस अखबार के आगरा एडिशन में प्रमोशनों को लेकर असंतोष है. जिन लोगों को पूर्व स्थानीय संपादक दिनेश पाठक का चहेता माना जाता गया उन्हें प्रमोट किया गया है. सालों से काम कर रहे लोग इस लिस्ट से दूर हैं. इससे भी बुरा हाल ब्यूरो आफिसों का है. यहां काम कर रहे लोगों को पूछा तक नहीं गया. असंतोष का कारण बनी प्रमोशन की लिस्ट पर नजर डालें तो आगरा में तैनात अजय कश्यप को कुल एक साल हुआ है. उन्हें प्रमोट कर चीफ सब बना दिया गया है. अमित जायसवाल को दो साल हुए. वह ट्रेनी पद पर आए थे. दो साल में वे सब एडिटर से सीनियर सब हो गए हैं.
अमित दीक्षित सीनियर सब हुए एवं प्रशांत ओझा सीनियर सब बनाए गए हैं. इन लोगों का इनक्रीमेंट चार हजार रुपये हुए हैं लेकिन दीक्षांत, पवन, महेश धाकड़ आदि सीनियर सब हुए हैं लेकिन इनका इनक्रीमेंट दो हजार रुपये का है. रामकुमार सिटी प्रभारी भी प्रमोट नहीं किए गए. केवल इनक्रीमेंट हो गया है. मंडल के ब्यूरो आफिसों में अच्छी परफारमेंस वाले लोगों में केवल विज्ञापन के लोगों को रेवड़ियां बांटी गई. संपादकीय और सरकुलेशन के लोग अछूते रह गए. कुछ जिला प्रभारी जो प्रमोट होने थे, प्रमोशन न मिलने से खफा हैं. फिरोजाबाद प्रभारी राजकुमार को चार साल से एक भी प्रमोशन नहीं मिला है. विरोध में वह लंबी छुट्टी पर चले गए हैं. मथुरा, एटा, मैनपुरी और अलीगढ़ में भी असंतोष अखबार के विकास में बाधक बनता दिख रहा है. ऐसा लग रहा है कि यह असंतोष कुछ गुल खिलाकर रहेगा. मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भोपाल, आगरा और दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबार कल्पतरु एक्सप्रेस के प्रबंधन की इस पर नजर है. बताया गया है कि इस अखबार प्रबंध तंत्र ने हर अखबार के असंतुष्ट लोगों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है.
हिंदुस्तान, आगरा के एक मीडियाकर्मी के मेल पर आधारित. पत्रकार साथी ने नाम न उजागर करने का अनुरोध किया है.












avinash aacharya
May 30, 2010 at 6:59 am
एक उसूल बनाओ। आपको लगता है कि आपकी योग्यता का मूल्यांकन नहीं हो रहा है, आपकी प्रतिभा व्यथॆ जा रही है तो आप छोड़कर चले जाइए। जब आपको मनचाहा मिल जाए तो सब सही, दूसरों को मिल जाए तो सब गलत। ये खीझ और छुटपन है।
dr.anilbhadauria
May 29, 2010 at 2:57 am
hindustan me vadon ka silsila bahut purana hai. koi nai baat nahi hai.
Rajat
May 28, 2010 at 4:04 pm
भास्कर ने लिया चार का इस्तीफा
विदिशा। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण प्रबंधन ने विदिशा-रायसेन क्षेत्र में मार्केटिंग विभाग में कार्यरत चार लोगों से इस्तीफा ले लिया। यह कार्रवाई गंभीर आर्थिक अनियमितताओं की शिकायत पर की गई है। इन लोगों में विदिशा-रायसेन मार्केटिंग प्रभारी सुरेंद्र रघुवंशी, विदिशा के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव अजय तिवारी, गंजबासौदा के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव अनुज श्रीवास्तव तथा रायसेन के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव सूर्यभानसिंह ठाकुर शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार रघुवंशी और तिवारी ने पिछले महीनों में प्रकाशित कई विज्ञापनों को विदिशा के एक हॉकर दशरथसिंह दांगी की एजेंसी के नाम पर बुक किया था। इन विज्ञापनों की राशि लंबे समय से वसूल नहीं की गई थी। विज्ञापनों के सभी रिलीज आर्डर दशरथ की एजेंसी के नाम पर जारी हुए थे। जिससे प्रबंधन ने दशरथ को करीब 4 लाख रुपए की विज्ञापन राशि जमा करने का नोटिस भेजा। इस नोटिस को देखकर वह गरीब हॉकर सकते में आ गया। जब उसने प्रबंधन से बातचीत की तो उसे बताया गया कि उसकी एजेंसी के नाम बुक किए गए विज्ञापनों की राशि बकाया है। तब दशरथ ने प्रबंधन को बताया कि उसने कोई विज्ञापन नहीं दिया है। इसके बाद प्रबंधन ने संबंधित विज्ञापन पार्टियों से पूछताछ कराई, जिसमें पाया गया कि इन पार्टियों से दशरथ ने नहीं, बल्कि सुरेंद्र रघुवंशी और अजय तिवारी ने ही संपर्क कर विज्ञापन लिए थे। कुछ इसी तरह की अनियमितता गंजबासौदा में अनुज श्रीवास्तव और रायसेन में सूर्यभानसिंह ठाकुर द्वारा करना पाया गया। जिस पर प्रबंधन ने इन सभी से जबरिया इस्तीफे लेकर बकाया राशि जमा करने का नोटिस थमाया है।
नया कारनामा नहीं
भास्कर के इन कर्मचारियों द्वारा किया गया यह कारनामा नया नहीं है। इसके पूर्व भी एक मार्केटिंग प्रभारी इसी तरह फर्जी एजेंसी बनाकर उसके नाम पर विज्ञापनों का कमीशन खाते रहे हैं। बाद में मामले का खुलासा होने पर उन्हें चलता कर दिया गया था। इन अनियमितताओं का प्रमुख कारण मैदानी कर्मचारियों का वेतन है। दिन रात हर मौसम में दौड़ धूप करने और पार्टियों की खरी-खोटी सुनने वाले कर्मचारियों को मामूली वेतन मिलता है। जबकि उनके ऊपर कार्यालय के वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारियों को सिर्फ मुंह चलाने के बदले हजारों रुपए वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। इसलिए मैदानी कर्मचारी एजेंसी के नाम पर विज्ञापन डालकर 15 प्रतिशत कमीशन अपने पास रख लेते हैं।