नंगई परोसने वाले और अंधविश्वास फैलाने वाले कुछ चैनलों पर सूचना प्रसारण मंत्रालय ने शिकंजा कसा है। फिलहाल तो कारण बताओ नोटिस दिया है लेकिन अगर इन चैनलों का स्पष्टीकरण सही नहीं पाया जाता है तो इन पर कुछ दिनों के लिए पाबंदी भी लगाई जा सकती है। जैसा कि अतीत में (वर्ष 2007 में) एफटीवी और एएक्सएन जैसे चैनलों को आपत्तिजनक कार्यक्रम दिखाने के चलते सूचना प्रसारण मंत्रालय ने कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया था। ताजा मामला आईबीएन-7, हेडलाइन टुडे और एमटीवी का है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इन चैनलों के खिलाफ शिकायत मिलने पर प्रोग्राम कोड के उल्लंघन का मामला बनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एमटीवी और हेडलाइऩ टुडे को नंगई परोसने और आईबीएन 7 को अंधविश्वास फैलाने के लिए नोटिस थमाया गया है।
आईबीएन 7 ने 27 जून को एक कार्यक्रम दिखाया। इसमें मलेशिया में नीरो नामक गांव में भगवान राम और हनुमान को आग के गोले के रूप में अवतार लेने की बात कही गई है। सूचना प्रसारण मंत्रालय ने चैनल से पूछा है कि वो क्यों अंधविश्वास फैला रहा है? हेडलाइन टुडे ने 6 जुलाई को बिकनी के 62 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम दिखाया। इस कार्यक्रम में बिकनी के बहाने टापलेस महिलाओं को दिखाया गया। साथ ही कई ऐसे दृश्य दिखाये गए जो आपत्तिजनक थे। एमटीवी का मामला भी कुछ कुछ हेडलाइन टुडे की ही तरह का है। यह चैनल एक रीयलटी शो दिखाता है। इसमें 20 प्रतिभागी लड़कियां कई तरह के हावभाव के जरिए जज बने दो लड़कों का ध्यान खुद की तरफ खींचने की कोशिश करती हैं। मंत्रालय को मिली शिकायत में कहा गया है कि इन दृश्यों से महिलाओं की गरिमा पर आंच आती है और भारतीय सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन होता है। मंत्रालय ने एमटीवी से उसके रीयलटी शो के 12 जुलाई के एपीसोड को लेकर एक्सप्लेनेशन मांगा है।











