नेताओं ने मीडियावालों को धिक्कारा

अभय छजलानी का संबोधन
अभय छजलानी का संबोधन
इंदौर में आयोजित पत्रकारिता महोत्सव में पेड न्यूज के मुद्दे पर जमकर हुई बहस : दिल्ली से जब इंदौर के लिए उड़ा तो मन में यही था कि पत्रकारिता महोत्सव के नाम पर गुडी गुडी बातें होंगी, लोग खाएंगे-पिएंगे और गेट-टुगेदर का आनंद उठाकर अपने-अपने ठिकानों की ओर लौट जाएंगे. पर दो दिन तक चले इस कार्यक्रम के खत्म होने के बाद मुझे लग रहा है कि मैं सही धारणा बनाकर नहीं आया था. मंत्री, नेता, मीडिया मालिक, पत्रकार… ये सब एक मंच पर बैठे और सबने अपनी दिल की बात कही. किसी ने तल्खी के साथ तो किसी ने तार्किकता के साथ. किसी ने तल्खी और तर्क दोनों की जुगलबंदी से अपने असंतोष को जाहिर किया.

पर सच तो यही है कि इंदौर प्रेस क्लब की ओर से आयोजित कलम के पहरेदारों के दो दिनी महाकुंभ में वो सब पहली बार दिखा, जो कोई संवेदनशील व ईमानदार पत्रकार उम्मीद कर रहा था. दैनिक भास्कर और नई दुनिया के चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल और अभय छजलानी की मौजूदगी में सीताराम येचुरी, अतुल अंजान, मुरली मनोहर जोशी, शरद यादव आदि नेताओं ने पेड न्यूज और मीडिया के भयंकर व्यवसायीकरण के मुद्दे को न सिर्फ उठाया बल्कि मीडिया मालिकों और पत्रकारों को कोसा भी कि वे लोग अगर इन मुद्दों के उठाने से नाराज होंगे तो होते रहें और नाराजगी में वे उनकी खबरों का बायकाट करेंगे तो कर लें पर इस मुद्दे पर कोई चुप नहीं रहेगा. रामशरण जोशी, जयशंकर गुप्त, विनोद शर्मा आदि ने मीडिया में कायम हो चुकी आंतरिक बेईमानी को कई उदाहरणों से उजागर किया और इनसे निपटने के उपाय भी बताए.

इंदौर में दरअसल जो कुछ हुआ, वह कई मायनों में ऐतिहासिक है. मीडिया और राजनीति के दिग्गज लोगों के बिना साथ बैठे हम मीडिया में पैदा हो रही समस्याओं को दूर भी नहीं कर पाएंगे. राजनीति में पतन व भ्रष्टाचार का जो क्रम शुरू हुआ तो उसने पहले अपनी जद में ब्यूरोक्रेशी को लिया और अब मीडिया को भी खींच लिया है. बहुत कम नेता ऐसे हैं जो चाहते हैं कि मीडिया ईमानदार रहे और पूरी ईमानदारी से अपने मूल कर्तव्य का निर्वाह करे. ज्यादातर नेता मीडिया को अपने प्रवक्ता के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं. उनकी अच्छी अच्छी बातें तो छपें पर उनके घपले-घोटाले या काली करतूतों का कतई पर्दाफाश न हो. ऐसे बेईमान नेता मीडिया को बेईमान बनाने के सारे जतन करते हैं और पैसे के लिए भूखी कारपोरेट मीडिया को बेईमानी के इस आफर को स्वीकारने में तनिक हिचकिचाहट भी नहीं होती. ऐसे में अगर राजनीति और मीडिया के ईमानदार लोग एक मंच पर आकर बेईमानी और बेइमानों का खुलासा करें, लगाम लगाने के लिए व्यवस्था बनाने की कोशिश करें तो समस्या का हल निकल सकता है.

दीप प्रज्जवलन करते रमेश चंद्र अग्रवाल (सबसे दाएं) व अन्य वरिष्ठ जन
दीप प्रज्जवलन करते रमेश चंद्र अग्रवाल (सबसे दाएं) व अन्य वरिष्ठ जन

दूसरे दिन वेब से जुड़े मुद्दे पर बातचीत हुई, पत्रकारों को ईनाम दिए गए, फोटोग्राफी पर वर्कशाप का आयोजन किया गया. सारा कुछ इतना व्यवस्थित था कि कोई कहीं खोट नहीं निकाल पा रहा था. प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल और महासचिव अन्ना दुराई की जोड़ी ने इंदौर प्रेस क्लब की ओर से लगातार दूसरे वर्ष पत्रकारिता महोत्सव आयोजित कर और गंभीर किस्म का विमर्श करने का मौका देकर पत्रकारिता का तो भला किया ही, देश भर के प्रेस क्लबों को भी सबक दिया है कि प्रेस क्लब का मतलब सिर्फ दारू क्लब नहीं होता बल्कि इन क्लबों के मद का सकारात्मक इस्तेमाल भी किया जाना चाहिए और गंभीर मसलों पर वरिष्ठ लोगों को बुलाने-बिठाने और नतीजा निकालने जैसे काम भी करने चाहिए.

पत्रकारों का कोई आयोजन हो और उसमें विवाद न हो, यह संभव नहीं. इस आयोजन के भी कुछ साइड इफेक्ट दिखे. आयोजन खर्चीला दिखा. मेहमाननवाजी में किसी तरह की कोई कमी नहीं की गई. तड़क-भड़क व शान-ओ-शौकत का नजारा बता रहा था कि इंदौर प्रेस क्लब देश के समृद्ध प्रेस क्लबों में से है. मेहमानों की सुविधा का खास खयाल रखा गया. पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम फिल्मफेयर एवार्ड की तर्ज पर किया गया जिसमें म्यूजिक भी फिल्म फेयर वाली ही बजाई जा रही थी. बीच-बीच में डांस व गायन-वादन का कार्यक्रम चलता रहा. इवेंट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा पत्रकारिता के पुरस्कार वितरण समारोह को कुछ इस अंदाज में पेश किया गया जैसे किसी फिल्मी पुरस्कारों की पार्टी हो रही हो.

कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग मौजूद रहे

भास्कर वाले पूरे आयोजन में छाए रहे. रमेश चंद्र अग्रवाल ने पहले दिन के पहले सेशन को पूरा अटेंड किया. पुरस्कार पाने वालों में भास्कर के लोगों का बोलबाला रहा. पत्रिका और नई दुनिया वालों ने आयोजन को कम महत्व दिया. एक तरह से इन लोगों ने बहिष्कार ही कर रखा था. पहले दिन अभय छजलानी और रमेश चंद्र अग्रवाल की नोकझोंक लोगों को खूब पसंद आई. जब भी ये दोनो शख्स एक मंच पर होते हैं तो एक दूसरे को सार्वजनिक तौर पर चिकोटी काटने से परहेज नहीं करते.

इस आयोजन में लोगों ने जो कुछ कहा उसमें से कुछ अंश वीडियो के रूप में बिगब्रेकिंग डाट काम पर डाला गया है. वहां इसे सुना-देखा जा सकता है. पूरे आयोजन की संपूर्ण रिपोर्ट भड़ास4मीडिया पर बाद में प्रकाशित की जाएगी क्योंकि जिन लोगों ने महत्वपूर्ण बातें कहीं, उस रिकार्डिंग को टेक्स्ट के रूप में कनवर्ट करने में थोड़ा वक्त लग सकता है. स्थानीय अखबारों में आयोजन के बारे में जो खबरें छपीं, वे गंभीर विमर्श से निकली बातों को पाठकों तक नहीं पहुंचा सकीं. खासकर बड़े अखबारों को लेकर कही गई कड़वी बातें और पेज न्यूज की बहस को अखबारों ने पूरी तरह पकड़ने की कोशिश नहीं की. कल हुए कार्यक्रम की जो कवरेज दैनिक भास्कर में आज है, वह इस प्रकार है…


मीडिया ने दी ताकत

इंदौर : आज ई-मीडिया मजबूत स्थिति में है। सबसे अहम बात यह है कि इससे आम आदमी बड़े पैमाने पर जुड़ रहा है। ब्लॉग के जरिये हर नागरिक के पास मन की बात लाखों लोगों तक पहुंचाने की ताकत आई है। ये बातें वरिष्ठ पत्रकार वर्तिका नंदा ने रविवार को भाषायी पत्रकारिता महोत्सव के तहत आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा ई-मीडिया ने हर इंसान को पत्रकार बना दिया है। इससे सिटीजन जर्नलिज्म बढ़ रहा है।

भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने कहा ई-मीडिया से चौराहों और पान की दुकानों की चर्चा कम्प्यूटर स्क्रीन पर आ गई है। ब्लॉग ने संपादक के नाम पत्र की भरपाई कर दी है। वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा, पुष्पेंद्रपालसिंह, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, पंकज शर्मा, संजीव आचार्य, अशोक वानखेड़े, अनिल भारतीय, कीर्ति राणा अलग-अलग कार्यक्रमों में मौजूद थे। इस दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, महासचिव अन्ना दुराई ने संचालन व आभार प्रदर्शन किया।

‘मकसद यह है कि अपंगता खत्म हो’ : इंदौर में पत्रकारिता करते हुए कई बार प्रेस क्लब परिसर में बैठकर राजेंद्र माथुर ने अनेक विषय पर मंथन किया होगा। रविवार को उसी परिसर में एक बार फिर वे नजर आए। उनकी बातें भी सुनी और पुराने दिन याद किए। मौका था राजेंद्र माथुर पर बने वृत्तचित्र के प्रथम प्रदर्शन का। पत्रकारिता की नई पीढ़ी श्री माथुर को पहचानती भी नहीं है इस बात पर मुख्य अतिथि भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग ने कहा पोलियो की दवा का आविष्कार किसने किया है, यह जानने की जरूरत नहीं है। मकसद यह होना चाहिए कि अपंगता खत्म हो। इसलिए श्री माथुर के विचारों और पत्रकारिता में उनके तरीकों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। यह वृत्तचित्र पत्रकार राजेश बादल ने बनाया।

राज्यस्तरीय फोटोग्राफी : राज्यस्तरीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता में नरेंद्र कुमार को प्रथम, दिलीप लोकरे को द्वितीय एवं दिलीप भालेराव को तृतीय पुरस्कार दिया गया। कैलाश मित्तल, नरेश जैन, अरुण मोंढे, महेंद्र राठौर, एम.के. जैन को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया।

प्रोगेसिव इंदौर : इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए ‘प्रोगेसिव इंदौर’ प्रतियोगिता में राहुल वावीकर प्रथम, हेमंत शर्मा द्वितीय, विकास जायसवाल तृतीय स्थान पर रहे। सतीश गौड़, अजय जायसवाल, मनोज वानखेड़े, मनीष गंगवानी, राजा शर्मा को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया।

कैमरे के पीछे का आदमी अहम : हर आदमी मोबाइल से फोटो खींचने लगा है लेकिन अच्छा फोटो खींचने के लिए कैमरे के पीछे का आदमी महत्वपूर्ण है। यह बात वरिष्ठ फोटोग्राफर अविनाश पसरीचा ने कही। कार्यक्रम में वरिष्ठ फोटोग्राफर प्रकाश हतवल्ने, उमेश मेहता, अनिल भारतीय ने भी विचार रखे। कुमार गंधर्व पर स्लाइड्स दिखाई गई। स्वागत अखिल हार्डिया, अरुण मोढ़े, सुबंधु दुबे और ओ.पी. सोनी ने किया। कार्यक्रम का संचालन मानसिंह परमार ने किया। आभार दिलीप लोकरे ने माना।

Comments on “नेताओं ने मीडियावालों को धिक्कारा

  • VISHAL CHOUDHARY says:

    voice of nation ko chhahiye reporter & jila prabhari, west u.p. ke liye sampark kare………VISHAL CHOUDHARY 09897464172

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  • vivek upadhaya says:

    ye to hona hi tha. mediamalik kya samajte hai ki vah apni manmani karte rahe aur koi un par ungli nahi uthayaga. yashwant ji ye koi khas bat nahi hai, aaj netao ne bura bhala kaha hai, kal aam janta bhi yahi kahegi. abhi bhi bakt hai sudhar karne ka. varna pathak papper ko padana chod denge. vivek Berasia bhopal.

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  • Amit Ranjan says:

    Pahal achhi hai. Par rasta aasan nahi. Media ko khoon ka swad lag chuka hai. sab kuchh u hi nahi sudhar jayega. paise kamane k chhakkar me media manejment apni jadon ko hi kaat raha hai. jab tak jagenge ham shayed der ho chuki hogi…
    Fir v prayash to karna hi chahiye.

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  • Dheeraj Prasad says:

    धीरज प्रसाद – CNEB न्यूज़ , नॉएडा से |
    श्री मान मित्रो मैंने पूरी खबर नहीं पढ़ी है , क्योंकि इस खबर में अधिकतर खादी वाले सिपाहियों की खबर लगी |
    यार मेरे तो एक बात समझ में नहीं आता है की आखिर यह खादी वाले सिपाही मीडिया को क्या समझते है, सिर्फ अपनी प्रचार का साधन, अरे यार यह खादी वाले केवल अपनी खूबियों को जनता के सामने लेन के लिया क्या – काया नहीं जातां करते हैं| यह भूल जाते है की, विचार मुक्त कोटा है इसको किसी सीमा में बंधना असंभव है | विचारो का दूसरा नाम ही तो मीडिया है, मीडिया जो आम जनता के विचारो को सामने लेन का भरपूर प्रयास कराती है, हाँ वह बात अलग है की कुछ ईमान के नीच भी हमारे बिछ घुस जाते है, पर आज के नेता — यह तो केवल मीडिया को अपने हक़ में बोलता देख ले तो बहुत ही अच्छा वरना , वही नीच पाना,
    भाषण में बोलना आसान है पर मीडिया को अभी भी कहीं – कहीं पूरा सहयोग नहीं दिया जाता है, मेरा तो उन सभी मान्यवर नेताओ से अनुरोध है की मीडिया को बेकार के कार्य में उपयोग न करें | अरे यार गाँधी जी भी तो थे वह तो नहीं बार – बार मीडिया को बुला कर अपने बीमार हो जाने की खबर देते थे, यह हमें समझना चाहिय | रही बात मीडिया की जहाँ चाह वहां राह |

    धन्यवाद्
    आपका मित्र — धीरज प्रसद
    CNEB न्यूज़ , नॉएडा

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  • sandhya roychoudhary says:

    yashwant ji main indore ki hoon aur pichle 15 salon se patrakarita ker rahi hoon. aap is programme main shamil huye isliye aapse poochna chahti hoon ki jab-jab is tarah ke dhir-gambhir ayojan hoten hain, unki kya sarthakta rahti hai. kya parinam nikalta hai, aam janta ko isse kya hasil hota hai. patrakar to aam janta ki aawaz aur aaina hota hai. is tarah ke ayojan patrakaro dwara kiye jate hain unmen kon se aisa maslon per charcha, bahas aadi hui jisse aam aadmi ka koi sarokar ho. sirf dikhaba aur apni position ko majboot banaye rakhne ke alawa is aayojan ka aur koi doosra uddeshye nahin tha. yashwant ji aapka is bare main kya kahna hai.

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