इण्डियन रीडरशिप सर्वे 2010 (राउण्ड-1) के परिणाम घोषित : (भाग 6) : मराठी भाषा के कथित ठेकेदार बाल ठाकरे और राज ठाकरे से कहीं ज्यादा लोकप्रिय है उसी धरती से छपने वाला मराठी अखबार ‘लोकमत’। 2 करोड़ 32 लाख 76 हजार पाठकों का प्रिय समाचार पत्र लोकमत न केवल महाराष्ट्र का सबसे पसंदीदा अखबार है बल्कि देश भर में लोग इसे डाक से मंगवाकर पढ़ते हैं। यह प्रमाणित हुआ है इण्डियन रीडरशिप सर्वे 2010 के राउण्ड-1 में। इन नतीजों के अनुसार लोकमत मराठी केवल मराठी भाषा का ही नम्बर-1 अखबार नहीं है, बल्कि भारत देश में पसंद किए जाने वाले तमाम भाषाओं के अखबारों में यह चौथा सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाला अखबार है।
मराठी के नाम पर महाराष्ट्र में दादागिरी दिखाने वाले ठाकरे परिवार को सबक लेना चाहिए। एक समय में देश की सबसे चर्चित पार्टी होने के बावजूद शिवसेना देशभर में अपना नेटवर्क नहीं जमा पाई, और अब राज ठाकरे भी उन्हीं गली मोहल्लों में हल्ला मचा रहे हैं, जबकि मराठी भाषा की रक्षा का ध्वज लेकर निकले लोकमत मराठी ने सफलता पूर्वक देश भर में अपना नेटवर्क तैयार किया और सुनिश्चित किया कि मराठी मानुष भारत भर में कहीं भी हो, उसे उसका लोकमत जरूर मिलता रहेगा। क्षेत्रीय भाषाओं की रक्षा में समाचार पत्रों के इस अभियान को सेल्यूट किया जाना चाहिए।












Dheeraj Prasad
May 5, 2010 at 5:05 am
नमस्कार मित्रों मै- धीरज प्रसाद, CNEB न्यूज़ नॉएडा से ,
किसी की प्रसिद्धि को हथियार बनाने से आप या हम पुरे भारत देश पर हुकूमत नहीं कर सकते, किसी की लोकप्रियता उसके तेज से होती है चार गुंडों व कुछ हथियार से नहीं, मराठी के नाम पर लड़ने व लड़ाने वाले अपने को भारत का सपूत कहते है जो गलत है,लोकमत ने या साबित कर दिया की वह शांति से अपने स्वरुप का विस्तार करेगा न की गुंडई से, हम केवल स्वार्थ वश हो कर अपनी शक्ति का प्रचार करते है, और यह कहते है की हम हिन्दू समाज व संस्कृति की रक्षा कर रहे है, अरे यह आप पुरे देश की अस्माजकता व विदेशी कल्चर को छोडो पहले यह देखो की क्या आपके आस – पास वाला समाज इस विदेशी परिवेश से अलग है |
अगर अलग है तो फिर आगे की सोंचो,
धन्यवाद्
आपका मित्र
धीरज प्रसाद
CNEB न्यूज़, नॉएडा
sushil Gangwar
May 5, 2010 at 7:43 am
hum ye jante hai ki lokmat ek achha newspaper hai lekin paper ki bal thakre se tulna krna murkhta hai . Har banda bal thakre nahi ban sakta hai . Lokmat akhbaar dusra bhi ban sakta hai.
Edtitor
sushil Gangwar
http://www.sakshatkar.com
UPDESH AWASTHEE
May 5, 2010 at 10:34 am
आप सही कहते हैं सुशील गंगवार जी, लोकमत की ठाकरे परिवार से कोई तुलना हो ही नहीं सकती. ये और बात है कि दोनों मराठी भाषा का ध्वज लिए चल रहे है. दोनों आम जनता के बीच जा रहे हैं. दोनों मराठियों के प्रतिनिधि हैं. फिर भी आप सही कहते हैं तुलना नहीं करनी चाहिए, चलो नहीं करते. ठाकरे के सामना और लोकमत की तो कर सकते हैं. आप बताइए कौन ज्यादा लोकप्रिय है ठाकरे का सामना या मराठियों का लोकमत..?
updesh awasthee
Gaurav Tyagi
May 5, 2010 at 11:13 am
Yeah! We can say that we cannot compare any newspaper with a personality, but the point put forward by Mr. Dheeraj is right in its own respect that just by fulfilling your own self-interest and not looking on the wider prespective of INDIA……will not gonna solve the purpose of United India…..And we have to think, feel, and dream for not just our own self (whether state or language), BUT for whole RASHTRA…….Then we can call us as native INDIAN, otherwise I can call myself Gujrati, marathi or bihari, but not Indian !!!