: आईआरएस-2010 (राउंड-2) के नतीजे आए : विस्तार का लाभ मिल रहा हिंदुस्तान को : पंजाब-हरियाणा ने दिया अमर उजाला को झटका : पर टोटल रीडरशिप में वृद्धि उत्साहवर्द्धक : भास्कर को मामूली झटका : नई दुनिया एवरेज रीडरशीप गेन करने में अव्वल : पत्रिका भी फायदे में : आईआरएस-2010 (राउंड-2) के नतीजे आ गए हैं. जागरण भले ही नंबर वन पोजीशन पर है लेकिन आकड़े बताते हैं कि उसका पतन शुरू हो चुका है. भास्कर जिस तेजी से नए-नए इलाकों से प्रकाशित हो रहा है, बहुत जल्द जागरण को नंबर वन पोजीशन खोना पड़ सकता है.
आईआरएस-2010 (राउंड-2) के नतीजे बताते हैं कि पहले तीन स्थानों पर दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान अखबार हैं. लेकिन दैनिक जागरण का प्रसार बहुत ज्यादा गिरा है. एवरेज और टोटल रीडरशिप, दोनों में जागरण को नुकसान उठाना पड़ा है. दैनिक भास्कर के प्रसार में मामूली कमी आई है. हिंदुस्तान ने प्रसार बढ़ाने में सफलता हासिल की है. नई दुनिया भले टाप 10 में ना हो लेकिन उसने आईआरएस-2010 (राउंड-2) में एवरेज इशू रीडरशिप के लिहाज से सबसे ज्यादा गेन किया है. कुल 11 फीसदी नए पाठक जोड़े हैं. अमर उजाला पांचवें स्थान पर है और उसे भी प्रसार घटने से नुकसान उठाना पड़ा है. हालांकि टोटल रीडरशिप में अमर उजाला ने अच्छी सफलता पाई है और कुल 2 लाख 60 हजार नए पाठक बनाए हैं. पर एवरेज इशू रीडरशिप (एआईआर) में अमर उजाला के पाठकों में कमी आई है. माना जा रहा है कि अमर उजाला ने पंजाब और हरियाणा से जो काम समेटा है, उसका असर पाठक संख्या पर पड़ा है.
चौथे स्थान पर मौजूद मलयाला मनोरमा है ने प्रसार में वृद्धि हासिल की है. छठें, सातवें, आठवें, नवें और दसवें स्थान पर क्रमशः लोकमत, डेली थांथी, टीओआई, राजस्थान पत्रिका और मातृभूमि हैं. टाप टेन में अखबारों का क्रम वही बना हुआ है, सिर्फ प्रसार घटे-बढ़े हैं. नंबर वन पर कायम दैनिक जागरण के प्रसार में करीब 2.4 फीसदी की गिरावट आई है. जागरण का सरकुलेशन अब एक करोड़ 59 लाख 25 हजार है. टोटल रीडरशिप में जागरण ने 70 हजार पाठक खो दिए हैं. नंबर दो दैनिक भास्कर की पहले प्रसार संख्या एक करोड़ 33 लाख 29 हजार थी जो अब एक करोड़ 33 लाख 3 हजार रह गई है. मामूली कमी आई है भास्कर के प्रसार में.
नंबर तीन हिंदुस्तान के प्रसार में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इस अखबार का प्रसार अब एक करोड़ एक लाख 43 हजार हो चुका है. पिछले राउंड में हिंदुस्तान की पाठक संख्या 9914000 थी. चौथे नंबर पर मलयाला मनोरमा है जिसने प्रसार में 2.7 फीसदी की वृद्धि पाई है. नंबर पांच अमर उजाला का प्रसार लगभग एक फीसदी गिरा है. इसका प्रसार अब 84 लाख 17 हजार है. नंबर छह लोकमत ने करीब 0.6 फीसदी बढ़त हासिल की है. इसके प्रसार अब 74 लाख 2 हजार है. नंबर सात डेली थांथी ने करीब 0.7 फीसदी की वृद्धि हासिल की है. नंबर आठ टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रसार में 0.8 फीसदी की वृद्धि की है. इसके पाठक 70 लाख 88 हजार हो गए हैं. नंबर नौ राजस्थान पत्रिका ने 3.3 फीसदी की वृद्धि पाई है. इसके पाठक 66 लाख 85 हजार से बढ़कर लगभग 69 लाख हो गए हैं. दसवें नंबर पर मौजूद मातृभूमी के प्रसार में मामूली कमी आई है. झारखंड के नंबर वन अखबार प्रभात खबर ने आईआरएस सर्वे के मुताबिक सर्वाधिक ग्रोथ (5.5 प्रतिशत) हासिल की है. इस अखबार के पाठक भी बढ़े हैं.












Ankit Khandelwal
August 23, 2010 at 10:39 pm
I think the circulation figures are not correct. Order is same but numbers might be different.
PRABHAT KUMAR
August 24, 2010 at 7:14 am
jAGRAN KE MANAGEMENT AUR OWNERS KE EMPLOYEES KE PRATI FATEFUL BEHAVIOUR NE AB UNHI EMPLYEES KO JAGRAN KE SAATH RAHNE DIYA HAI JO YAA TO KISI VAJAH SE MAJBOOR HAIN , GOOSKHORI WA CHORI KE SIKARI HAIN YAA PHIR APNA SWABHIMAAN CHOD CHUKE HAIN.
DAINIK JAGRAN, AN ESTABLISHED MEDIA BRAND KE LIYE MANAGEMENT KA YEH APPROACH JALDI HI BHARI PADNE WALA HAI. CHUNKI EMPLOYEE YAHAN KAAM SE JAYADA TO KHUD KI KOMPANY WA MANAGEMENT KO GALI DENE MEIN BUSY RAHTA HAI.
WITHOUT EFFECTIVE HR SYSTEM KE EK ACCHE EMPLOYEE KE HIT KE VISHAY MEIN SONCHA BHI NAH JA SAKTA HAI. JAGRAN USI KA NAAM HAI, HAI LTD. FIRM BUT NO HR SYSTEM, RECRUITMENT HONI HAI TO AGM, GM, WA CGM SAAB KHUD APNE-APNE BADON KO KAM SALARY MEIN UTHA LETE HAIN,
PHIR HR KI KYA JARRORAT………..
MAIN JAGRAN SE JALA BHUNA NAHI HOON , PAR JAGRAN KE EMPLOYEES SE HI JAGRAN KI JO RAAM GATHA SUNTA HOON USSE IS BADE BRAND KO LEKAR THDA TAKLEEF HOOTA HAI.
tejinder singh sehgal
August 24, 2010 at 4:40 pm
Parbhat app ne kuch had tak tho thik likha ha mgar eh bat nahi ha ke ajj jagran ke sath vahi log ha jo majboor ha ya apna swabhimaan chod chuke ha, koi ik adha viyakti to ho skta ha mgar asse logo ki sankheya itni adhik nahi ha jitna app ka andaza ha. har samacharpatar ko yeh hak ha ke weh us karmchari ko rakhe jo uske leya vishvasney ho ur sansthan ke ley kam kary.mene bhi Dainik Jagran ke leya state bureau me sr correspondent ki post par kai bars kam kiaya ha magar meny jagran me koi adhik dabav mehsuus nahi kiya. ha yeh thik ha ke kai bar patrkari ke alawa Dainik Jagran ke leya kuch kam karna pada par uske ley koi dabav nahi tha.me agar chandigarh ki bat karu tho yanan par is trah ke mazbur karmchari nahi ha jinhe kahi kam nahi milega.mene bhi jagran me do parion me kam kiya ha ur ab punjabi me sabse adhik chapne wale akhbar Daily AJIT me kam kar raha hu.