
सांध्य दैनिक ‘जांबाज़’ का विमोचन करते शेष नारायण सिंह
वे राजस्थान के बीकानेर जिले में सांध्य दैनिक ‘जांबाज़’ के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे. वैटरनरी आडिटोरियम में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शेष नारायण सिंह ने आगे कहा- ”असली पत्रकार होता वही है जिसकी निष्ठा सत्य के प्रति होती है. पत्रकारिता धर्म है लेकिन इस धर्म का निर्वाह कर्तव्य की तरह किया जाना चाहिए. लोगों को लगता है कि किसी की चापलूसी या तारीफ लिख देने से विज्ञापन मिल जाएगा. ऐसा होता नहीं है. आपकी कलम की ताकत, आपकी कलम की ईमानदारी और आपकी कलम की जनपक्षधरता ही वो चीज है जो आपको हर ओर से सम्मान व सफलता दिलाती है. अगर आपका कंटेंट ताकतवर है तो यकीन मानिए आप सफल हैं. जनपक्षधरता की पत्रकारिता ही अधिकतम लोगों तक पहुंचती है और यही पत्रकारिता का लक्ष्य भी है. देश के पत्रकार जगत को अभिमन्यु सरीखे योद्धाओं की जरूरत है. एक सच्चे पत्रकार को अपना धर्म निभाना होगा. इसके लिए बुलंद हौसले व ईमानदारी की आवश्यकता है. आज का मीडिया सरकारों के हाथों बिक चुका है. अखबार सरकार की खामियां उजागर करने की बजाय उनकी कमियां छुपा रहे हैं. खासकर बड़े मीडिया हाऊस के मालिकों ने सरकारों से सौदेबाजी कर भोली-भाली जनता को दाव पर लगा दिया है.”
शेषनारायण सिंह ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर निहत्थी जनता खड़ी है, तो दूसरी ओर कारपोरेट मीडिया हाउस की पैसे की ताकत है. लेकिन यह सभी को जान लेना चाहिए कि भारत की जनता कभी निहत्थी नहीं होगी. जनता के साथ अर्जुन, अभिमन्यु, कृष्ण जैसे लोग सदैव खड़े रहेंगे और पापियों से लोहा लेने को तत्पर रहेंगे. ‘जांबाज’ के प्रकाशन को बीकानेर के लिए अच्छी शुरुआत बताते हुए शेष नारायण सिंह ने कहा कि आज के दौर में सच्ची पत्रकारिता करना जोखिम भरा कार्य हो गया है, लेकिन विषम परिस्थितियों में काम करने वाले ही असली ‘जांबाज़’ कहलाते हैं.

विशिष्ट अतिथि भड़ास4मीडिया डॉट कॉम के संपादक यशवंत सिंह ने कहा कि पत्रकार, रिपोर्टर, स्ट्रिंगर भ्रष्ट नहीं होते, उन्हें भ्रष्ट बनाया जाता है. इन कलम के सिपाहियों को पथ भ्रष्ट करने का काम कर रहे हैं अपने देश के बड़े मीडिया हाउसों के मालिक. कलम के सिपाहियों से ‘लक्ष्मी’ की पूजा करने को कहा जा रहा है. पत्रकारों से ‘धंधा’ लाने को कहा जा रहा है. जो पत्रकार ज्यादा बिजनेस देने में कामयाब होता है, ज्यादा दलाली करने में सक्षम होता है, मीडिया हाउस उसे ज्यादा बड़ा पत्रकार मानते हैं, उसे मीडिया हाउस के लिए ज्यादा उपयोगी माना जाता है. समाचार पत्रों के मालिक, जो खुद को संपादक कहलाना पसंद करते हैं, अब भ्रष्टाचार में आकंठ डूब चुके हैं. देश के बड़े समाचार पत्र समूह सतापक्ष के हाथों बिक चुके हैं. यशवंत ने कहा कि बीते चुनावों में मीडिया मालिकों ने पूरी बेशर्मी से खबरों की सौदेबाजी की. सत्ता में बैठे मंत्रियों की काली करतूतों को उजागर करने की बजाय मीडिया हाउस उन मंत्रियों की चापलूसी करने और उनकी करतूतों पर पर्दा डालने में लगे रहते हैं. मीडिया, राजनीति और नौकरशाही के बुरे लोगों का गठजोड़ हो चुका है. यह गठजोड़ हम सबके लिए अभिशाप साबित हो रहा है.
यशवंत के मुताबिक अखबार के मालिक चाहते हैं कि रिपोर्टर अपनी कलम का सौदा कर लें. कारपोरेट मीडिया हाउस हर वक्त सिर्फ अपने बिजनेस टारगेट के लिए परेशान रहते हैं. इन मीडिया हाउसों का कंटेंट जन हित को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि स्व हित के उद्देश्य से प्लान किया जाता है. जनता, नैतिकता और मीडिया के दायित्व गए तेल लेने. बाजारीकरण को सपोर्ट कर रहे मीडिया हाउस अपने चरित्र में गरीब विरोधी हो रहे हैं. अमीरों की पक्षधरता साफ-साफ दिख रही है. माल संस्कृति और शहरीकरण के समर्थक ये अखबार खेती-किसानी व ग्रामीणों को हाशिए पर रखते हैं. देश की ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर है लेकिन खेती घाटे का सौदा बना दी गई है. इसी कारण अब कारपोरेट फार्मिंग का दौर शुरू हो रहा है. सब्जी बेचने तक का काम कर रहीं कारपोरेट कंपनियां अब आगे से खेती भी करेंगी. खेत से वंचित हो जाएंगे आम जन. कई गुना दामों पर कारपोरेट कंपनियां खेतों को खरीदकर इनके मालिकों को खेत में काम करने वाला मजदूर बना रही हैं.
यशवंत का मानना है कि कुछ दशकों बाद इस देश से मध्य वर्ग खत्म हो जाएगा या फिर बहुत सीमित मात्रा में रहेगा. एक तरफ भारी संख्या में पैदा हुए लालची-लोभी-जनविरोधी धनपशु होंगे तो दूसरी ओर बेचारे किस्म के निरीह जन जो दो जून की रोटी की जद्दोजहद में जिंदगी काट रहे होंगे. यह भयावह तस्वीर बहुत दूर की बात नहीं है. आसपास दिखनी शुरू हो गई है. हम सभी इसी फ्रेम में गढ़ी जा रही तस्वीर के हिस्से-से लगते हैं. अमीर बनने की अंधी दौड़ में अब मीडिया वाले भी ज्यादा से ज्यादा पैसा कमा लेने को ही सबसे बड़ी नैतिकता मानने लगे है. ऐसे में कारपोरेट मीडिया व कारपोरेट पत्रकारों के कदाचार का खुलासा न्यू मीडिया के लोग कर रहे हैं और करेंगे. छोटे अखबार, लघु पत्रिकाएं, इंटरनेट, वेबसाइटें, मोबाइल… ये सब मीडिया के डेमोक्रेटाइजेशन के प्रतीक हैं. इन्हीं के चलते बेहतर कल की उम्मीद बची हुई है.
यशवंत ने सांध्य दैनिक ‘जांबाज़’ को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस सांध्य दैनिक में प्रकाशित शब्दों के जरिए बीकानेर में हजारों जांबाज़ तैयार होंगे और गलत काम करने वालों के खिलाफ आवाज उठाएंगे, ऐसी कामना करते हैं. पूंजीवादी ताकतों से देश को बचाने के लिए ‘जांबाजों’ की जरूरत है. बीकानेर जैसे शहर में ‘जांबाज़’ अखबार निकालने के लिए इसके संपादक हरिओम गर्ग बधाई के पात्र हैं. ऐसे अखबारों से उम्मीद करते हैं कि वे सही मायने में आमजन की बात उठाएंगे और सही अर्थों में समाज का आईना साबित होंगे.
विशिष्ट अतिथि समाज सेवी कन्हैयालाल कल्ला ने कहा कि बीकानेर में एक सांध्य अखबार की आवश्यकता थी, जो आज ‘जांबाज’ के रूप में पूरी हो रही है. ‘जांबाज़’ जनता की उपेक्षाओं पर खरा उतरेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है. उद्योगपति व बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल अध्यक्ष शिवरतन अग्रवाल ने कहा कि ‘जांबाज़’ अपने नाम को साकार करेगा. जैसा नाम वैसा काम वाली कहावत यहां सिद्ध होगी. अग्रवाल ने ‘जांबाज’ के सम्पादक को हर संभव सहयोग देने की बात कही. इस मौके पर ‘जांबाज़’ के सम्पादक हरिओम गर्ग ने निष्पक्षता एवं निर्भीकता को कायम रखने का विश्वास जताया. अध्यक्षता करते हुए मगन सिंह राजवी ने कहा कि सांध्यकालीन अखबार होने से दिनभर की ताजा घटनाएं शाम को ही सभी के पास पहुंच जाएंगी. उन्होंने इसे बीकानेर के इतिहास में मील का पत्थर बताया. शहर कांग्रेस कमेटी के सचिव नरेंद्र सिंह ने आभार जताया. संचालन किशोर सिंह राजपुरोहित एवं संजय पुरोहित ने किया.
कार्यक्रम में मुंबई से पधारे पंजाब केशरी के फोटो जर्नलिस्ट बाबा लोंढे, बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुभाष मित्तल, वर्तमान सचिव के.एल. बोथरा, ऊन व्यवसायी जेठमल अरोड़ा, भाजपा शहर अध्यक्ष शशि शर्मा, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व सचिव अशोक ओहरी, दैनिक भास्कर बीकानेर संस्करण के संपादक मधु आचार्य, दैनिक लोकमत के संपादक अशोक माथुर, वरिष्ठ पत्रकार के.के. गौड़, दैनिक न्यूज कास्ट के प्रकाशक मुद्रक कमलकांत शर्मा, न्यूज फास्ट वेब पोर्टल के जयनारायण बिस्सा, ई.टी.वी. के धीरज जोशी, दैनिक नवज्योति के बीकानेर ब्यूरो प्रमुख नीरज जोशी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र विश्नोई, उप अधीक्षक पुलिस (आबकारी) जीवराज सिंह, विश्व हिंदू परिषद के नरोत्तम व्यास, राजकीय महाविद्यालय सिरोही के सेवानिवृत्त प्राचार्य राजेंद्र सिंह नेगी, सहायक निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क दिनेश सक्सेना, भाजपा नेता सत्यप्रकाश आचार्य, कांग्रेसी नेता श्याम तंवर, युवा कांग्रेसी नेता राजेश भोजक, वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार शर्मा, ज्योतिषी हरीनारायण व्यास ‘मन्नासा’, अंतरराष्ट्रीय अंक ज्योतिषी राजू महाराज, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशाषी अभियंता बी.जी. व्यास, समाजसेवी हुक्कमचंद पांडिया (काकाजी), राजस्थानी युवा लेखक संघ के कमल रंगा, शहर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नंद किशोर सोलंकी, पूर्व महामंत्री गौरीशंकर अग्रवाल, भाविप के कृष्णनंदन गर्ग, विख्यात वास्तु शास्त्री आर.के. सुतार सहित नगर के गणमान्य लोगों ने शिरकत की.












chandra prakash pandey
March 27, 2010 at 9:11 am
who will take this responsbility
the true
March 27, 2010 at 9:22 am
very soon to go “Madhav Jyoti Patrakarita awars”
logon se chanda maanga ja raha hai,officers ko blackmail kiya ja raha hai,ab bola jayega ki proove karo to kaise karo bhaiyya aaj tak black mailing proove hue hai,adhe paise main award function nibtao adha jabe ke andar,ismai kishor azmaini,aur mimansa malik bhi ayenge”JAI RAMJI KI”
arvind kumar singh
March 27, 2010 at 2:41 pm
shesh bhai
patrkarita me abhimanyu aur eklavya bikhre pade hain.unko nijat kaun dilayega? apka bhashan aur yashvabt ka bhashan achcha laga
arvind kumar singh
जीत भाटी
March 27, 2010 at 10:12 pm
आज हमे वाक्यई अभिमन्यु सरीखे पत्रकारों की बहुत ज्यादा जरुरत हैं क्यूंकि आज का मीडिया किसी लाक्षाग्रह से कम नही हैं, आज पत्रकारिता किसी धर्म, मिशन
से इतर एक व्यवसाय बन चुकी हैं, आज मीडिया के इस्तेमाल समाज या राष्ट्र के हितो के लिए न होकर निजी हितो को सिद्ध करने के लिए होने लगा हैं, मीडिया को
सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल किया जाता हैं,
आज अगर अभिमन्यु आ भी जाये तो उसका मीडिया के चक्रव्यूह में मारा जाना तय हैं, क्यूंकि ये तो उसकी नियति ही रही हैं की वह अभिमन्यु बनकर मीडिया के चक्रव्यूह
में प्रवेश तो कर सकता हैं, पर वापस वेसा आ नही सकता, जरुरत अभिमन्यु से ज्यादा मीडिया के चक्रव्यूह को तोड़ने की हैं, तब आपको हर दुर्योधन में एक निर्दोष अभिमन्युं नजर
आएगा, क्यूंकि इस चक्रव्यूह में प्रवेश करने से पहले निश्चित ही वह भी एक अभिमन्युं ही रहा होगा!
जीत भाटी
sapan yagyawalkya
March 28, 2010 at 3:57 am
Janbaz ke bahane media ki dasha aur disha par bevaki se charcha jhakihorne vali hai. Sapan Yagyawalkya Bareli(MP)
Vishal Gupta
March 30, 2010 at 8:17 am
mitron,
patrakarita mein kichh to +ve ho raha hoga, aisa mera vishwas hai, kripya kabhi use bhi publish kiya karein.