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स्वामीजी का स्वागत करने को बेताब पत्रकार

जबलपुर में इन दिनों क्रांतिकारी संत तरुण जी महाराज का प्रवास चल रहा है. तरुण जी महाराज का जबलपुर के शहीद स्मारक प्रांगण में 25 अप्रैल से 30 अप्रैल 2010 तक “कड़वे प्रवचन” का आयोजन होना है. इसलिए उनके आयोजकों ने 23 अप्रैल 2010 को डीएन जैन हाल में तरुण महाराज के सानिध्य में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया. इसमें शहर भर के सभी मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

जबलपुर में इन दिनों क्रांतिकारी संत तरुण जी महाराज का प्रवास चल रहा है. तरुण जी महाराज का जबलपुर के शहीद स्मारक प्रांगण में 25 अप्रैल से 30 अप्रैल 2010 तक “कड़वे प्रवचन” का आयोजन होना है. इसलिए उनके आयोजकों ने 23 अप्रैल 2010 को डीएन जैन हाल में तरुण महाराज के सानिध्य में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया. इसमें शहर भर के सभी मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

प्रेसवार्ता के शुरू होते ही आयोजकों ने एक रजिस्टर पर सभी मीडिया के प्रतिनिधियों के नाम लिख लिए. इसके बाद तरुण जी महाराज का आगमन मंच पर हुआ. उनके आते ही आयोजकों ने दर्जनों नारियलों को मंगवाया. जिस रजिस्टर पर मीडिया के प्रतिनिधियों के नाम लिखे गए थे, उन्हें मंच पर महाराज जी के सम्मान के लिए बुलाया गया. मीडिया के प्रतिनिधि भी तरुण जी महाराज का श्रीफल से सम्मान करने के लिए बेताब दिखाई दे रहे थे. मीडिया के प्रतिनिधियों में ये होड़ लगी थी कि कौन जल्दी से जल्दी तरुण जी महाराज का सम्मान करता है.

किसी पत्रकार में इतनी समझ नहीं दिखाई दे रही थी कि वे इस वक़्त एक पत्रकार वार्ता में आये हुए हैं और वे क्यों महाराज जी का सम्मान कर रहे हैं. मीडिया के प्रतिनिधि ये भूल गए हैं कि पत्रकार न तो मंच पर किसी का सम्मान करता है और न ही वो अपना सम्मान करवाता है. इस प्रेसवार्ता में प्रेस के लोगों के अलावा और भी लोग मौजूद थे जो ये नज़ारा देख रहे थे. इनमें से किसी एक ने कहा कि पत्रकार तो सम्मान नहीं करता है और आज ये समाज का दर्पण महाराज का सम्मान कर रहा है.

हद तो तब हो गयी जब प्रेसवार्ता में देरी से कुछ पत्रकार आए और जब उन्हें पता चला कि अनेक पत्रकारों ने महाराज जी का श्रीफल से सम्मान कर लिया है तो उन्होंने भी एक कागज़ में 8 -10 लोगों के नाम लिखकर आयोजकों को भेज दिए और उनसे कहा कि हमें भी महाराज का श्रीफल से सम्मान करना है, कृपया आप मंच से हम लोगों के नाम पुकारने का कष्ट करें. आयोजकों को इसमें क्या आपत्ति थी. उन्होंने भी आनन-फानन में मंच से इन पत्रकारों के नाम पुकारें और महाराज जी का सम्मान करवा दिया. आखिर आयोजकों को भी तो मीडिया में पब्लिसिटी चाहिए थी न. इसलिए वे पत्रकारों का अनुरोध ठुकरा न सके. क्या आपको लगता है कि पत्रकारों को किसी महाराज जी का सम्मान करने में इस तरह जुट जाना चाहिए?

जबलपुर के एक पत्रकार ने यह पत्र भेजा है. उन्होंने अपना नाम न प्रकाशित करने का अनुरोध किया है.

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0 Comments

  1. BIJAY SINGH, JAMSHEDPUR

    April 23, 2010 at 1:17 pm

    MAHAN LOG HAI YE PATRAKAR BANDHU.KUCH SAMAJH HAI KI NAHI.
    PURE DESH KO YE NAUTANKI BAJ SWAMI JI LOGO NE DUBA KE RAKH DIYA HAI AUR YE HAMARE MAHN SATHI LOG INHI KI PUJA KAR RAHE HAIN AUR WO BHI PRES CONFERENCE ME.
    THIS IS NOTHING BUT LACK OF PROFESSIONALISM AND INFERIORITY.
    ARE BHAI YE JOKAR LOG KOYI MAHAN NAHI HAIN YE SAB PAISE KE KHILADI HAIN .ABHI KUCH LOG INHI KARGUJARIYON KI WAJAH SE ARERST HUE HAIN BANGALORE ME LAYE GAYE ,KUCH NORTHG ME ,PHIR BHI SAMAJH NAHI ATA HAI,.
    ISWAR KI PUJA KARE AUR APNA KAM IMANDARI SE KARE BAS ,BHAGWAN PRAGATI DEGA .YE TO KHUD HI MEDIA PAR ASHRIT HAIN ,INKA UTNA HI SAMMAN KARE JITNA JARURI HAI ,MAHIMA MANDIT NA KARE.

  2. anaam

    April 23, 2010 at 1:57 pm

    अभी तो एक अदने से महाराज का यह समान समारोह था, जिसमें कुछ कथित पत्रकार (क्यांेकि वास्तविक पत्रकार इस तरह की हरकत करने की सोच भी नहीं सकता) इस हद तक गिर गए। यदि इस बात की कल्पना की जाए कि पुराने जमाने के ऋषि-मुनि जो अपने तप के बलबूते मायावी शक्तियों से परिपूर्ण थे, पृथ्वी पर आ जाएंगे तो ये पत्रकार महोदय तो अपनी बलि देने ओर दूसरों की बलि तक लेने को तैयार हो जाएंगे। आज मीडिया का जो सत्यानाश हो रहा है वह इन्हीं गधों की वजह से हो रहा है। तरूण सागर यदि वास्तव में महाराज हैं तो उन्हें अपने प्रारंभिक प्रवचन में इन जैसे तमाम पत्रकारों पर कटाक्ष जरूर करना चाहिए और उनकी इस तरह की दूसरी करनी का ाी महिमागान करते हुए अपने कड़े से कड़े शब्दों मंे इन पत्रकारों को अपनेकत्तüव्यों को याद दिलाना चाहिए।

  3. alakh niranjan

    April 23, 2010 at 2:08 pm

    bhai anamdas ji; aajkal patrakar to patrakar ‘ kai bade sampadak bhi yaha waha swagat-satkar karte dekhe jate hai. patrakaro ne tejaswi sant ka samman kar diya to kya ho gaya.ojaswi sant ka samman kar jabalpuria patrakar dhanya ho gaye.unhe badhai.aap bhi eak nariyal le ke ho aaiye.

  4. gopal pandit

    April 23, 2010 at 2:17 pm

    ye jabalpuria nahi sudhar sakte. kya jarurat thi samman karne ki. in jabalpuria patrakaaron se pucha jana chahiye ki aayojakon ki himmat kaise hui ki patrkaar varta mein inse maharaj ka samman karva de. samajhdaar patrkaar to vaise bhi jisne press conference bulai hai ya jo address karega uski beijjati to karne nahi jata ya karta. lagta hai aayojakon se kisi dalle patrkaar ne satting karli hogi or ye tamasha kara diya. ye murkh bhul gaye ki is shahar ne OSHO, Parsai or maharshi mahesh yogi jaise mahan log diye hai. in hastiyon ne kisi ka apman nahi kiya lekin capargattu bhi nahi raahe. sharm karo re sharm karo [b][/b][b][/b][b][/b]

  5. anaam

    April 23, 2010 at 4:04 pm

    भाई अलअअअअख निरंजन जी इस तरह की करतूतें करना मेरी फितरत नहीं। तेजस्वी तो स्वामी नित्यानन्द भी हैं जो वेश्यावृçत्त में संलग्न हैं और आसाराम ाी जो बच्चों की हत्या करवाते रहते हैं। कोई कृपालु महाराज भी हैं जो सस्ती साड़ी बांटने के नाम पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं और 65 लोगों की मौत और सैंकड़ों के घायल होने का कारक बन जाते हैं। इसके अलावा भी कई और महान और आपकी ही भाषा में तेजस्वी सन्त हैं जिनकी सूची भारत में बहुन्त लंबी है। ऐसे लोगों को नारियल आप ही आप जैसे मानसिकता वाले चढ़ाएं। बेहतर यही है। रहा सवाल संपादकों का तो जबलपुर में जो पत्रकार इस तेजस्वी सन्त का समान कर रहे हैं उनमें से कुछ अगर जुगाड़ फिट हो गया तो संपादक भी बन जाएंगे और फिर आप जैसे लोग इन्हीं संपादकों का उदाहरण देते फिरेंगे।

  6. ASHOK KUMAR

    April 24, 2010 at 9:59 am

    शर्म आनी चाहिए ऐसे पत्रकारों को जो अपनी इमेज खुद ही ख़राब कर रहे है | यंहा तक की वो मीडिया की भी छवि ख़राब कर रहे है ये लोग मीडिया के नहीं हो सकते ये तो सिर्फ स्वामी जी के दलाल हो सकते है | जो उनका तहेदिल से सम्मान करने मे अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते है | ऐसे लोगों की मीडिया मैं किसी भी प्रकार की जरुरत नहीं है | ऐसे सम्मान करने वाले लोगो के नाम भी यहाँ पर प्रकाशित करना चाहिए था | ताकि मीडिया मैं बैठे बड़े आकाओं को भी इस बात का पता तो चलता की आखिर उनके लोग ऐसी पत्रकार वार्ता मैं सिर्फ सम्मान करना ही अपना काम समझते है | आज का मीडिया अपनी छवि खोता जा रहा है | और वो इसलिए है की मीडिया मैं ऐसे लोगों का होना है जो सिर्फ समाज मैं अपनी छवि को बनाने के लिए सम्मान करना और करवाना ही उचित समझते है | मुझे तो ये समझ मैं नहीं आता की एक तरफ मीडिया के ही लोग नित्यानंद, आसाराम और कृपालु महाराज के बारे मैं न जाने क्या क्या लिखते और दिखाते है | दूसरी तरफ मीडिया के वही लोग तरुण महाराज जैसे लोगो का सम्मान करना अपना परम धर्म समझते है | आखिर क्या है ऐसा तरुण महाराज मैं जिनका सम्मान आम लोग के साथ-साथ मध्यप्रदेश के सरकारी अधिकारी जिसमे जबलपुर जिले का कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, सहित विधानसभा के अध्यक्ष सहित अनेक नेता शामिल है और वे उनका सम्मान कर रहे है | और तो और इन महाराज को तो मध्यप्रदेश विधानसभा मे प्रवचन देने के लिए आमंत्रित भी कर दिया गया है | यही तरुण सागर महाराज नेताओ के बारे मैं खरी खोटी जनता को सुना रहे है | और इन्ही महाराज का सम्मान करने के लिए नाटो के साथ मीडिया के जन्मजात से सम्मान करने के प्यासे ये लोग भी शामिल हो गए है | समाजशास्त्र मे जजमानी प्रथा का जिक्र आता है जिसमे समाज मैं रहने वाली एक जाति दूसरी जाति की सेवा या सम्मान करना अपना कर्त्तव्य समझती है | तो शायद पत्रकार भी उसी जजमानी प्रथा के अंतर्गत आते है जो स्वामी जी जैसे लोगो का सम्मान करना अपना आदर्श समझते है | तरुण महाराज कडवे प्रवचन देने के लिए विख्यात है और इन्ही प्रवचन को सुनकर लोग खुश होते है | लेकिन मेरे इस कडवे विचार से शायद जबलपुर के पत्रकार और जनता खुश न हो पाए |

  7. HEMANT

    April 24, 2010 at 3:08 pm

    तरुण सागर जी महाराज की तुलना किसी अन्य संत से ना ही की जाय तो बेहतर ही , जो लोग तरुण सागर महाराज को नहीं जानते उन्हें तो किसी तरह की कोई टिप्पड़ी करनी ही नहीं चाहिए ,
    रही बात श्रीफल अर्पित करने की तो यह सुभाग्य ही है की पत्रकारों को संत का आशीर्वाद मिला है , हां लिखने वाले पत्रकार महोदय को अपना नाम न लिखना सिर्फ यही मजबूरी को दर्शाता ही की वोह तरुण सागर महाराज को श्रीफल अर्पित करने में तो पत्रकार के नाते अपने हेती समझते है लकिन वहा दी जाने वाली गिफ्ट के लिए जरुर लाइन लगाये थे , भाई सिर्फ एक ही जगह नहीं यह मित्र तो गिफ्ट के किये कही भी जाते है छक कर जल्दी खाते है ताकि गिफ्ट ना ख़त्म हो जाये , इन कथित बे नाम पत्रकार जी ने यदि श्रीफल की जगह संत की प्रेस कांफेरांस में गिफ्ट का मुद्दा उठाया होता तो सभी मानते की पत्रकार में नैतिकता है . गिफ्ट के लिए तो आज का पत्रकार कुछ भी कर सकता है , लगता है की यह भड़ास भी इसी बात की है की वहा कीमती गिफ्ट नहीं मिली इस लिए ही नाराज है . वहा तो संत की तस्वीर वाला पेन ओए दीवार घडी थी . कोई बात नहीं दोस्त आगे जर्रूर कुछ मिलेगा

  8. Saket

    April 24, 2010 at 6:25 pm

    koi sharam ki baat nahi hai. pesha alag hai, par sant ka swagat karne ka mauka mil raha hai to karna chahiye. patrakarita ka ghamand nahi hona chahiye. mahapurusho ke saamne sab chote, unke aage to raja bhi sar jhukate the. ye chaupai unke liye jinhe bura laga. ek lakh poot, sva lakh naati, ta rawan ghar diya na baati. god bless u.

  9. rakesh

    April 25, 2010 at 4:14 am

    यशवंत जी आपका कहना है की ये लेख जबलपुर के एक पत्रकार ने यह पत्र भेजा है. उन्होंने अपना नाम न प्रकाशित करने का अनुरोध किया है. पर मुझे लगता है की वो पत्रकार नहीं हो सकता क्योकि पत्रकार कोई भी लेख पूरी जानकारी के साथ लिखता और नाम छिपाने का अनुरोध नहीं करता क्योंकि वो सच लिखता तो वो डरता नहीं ये लेख सतही जानकारी के साथ लिखा गया है क्योंकि जिन पत्रकारों काम नाम बाद में पुकारा गया उन्होंने अपनी मर्ज़ी से नाम लिख कर नहीं दिया, आयोजको ने नाम लिखने का अनुरोध किया तो उन्होंने दे दिया उन्हें तो पत्रकार वार्ता के बाद पता चला की ये नाम किसलिए मांगे गए थे और वैसे भी जिन पत्रकारों ने संत का सम्मान किया और अपना शीश झुकाया तो मुझे नहीं लगता की गलत है क्योंकि बगैर दबाव के शीश झुकाना बढ़प्पन की निशानी है यदि किसी के दबाव में शीश झुकाया तो निशचित ही पत्रकारों के लिए शर्म की बात होनी चाहिए, यदि पत्रकारों ने बगैर दबाव के नमन किया तो सभी पत्रकार सम्मान के पात्र क्योंकि आजकल के पत्रकारों में लोच है ही नहीं वे तो बगेर बात के अकड़ना जानते है | शुभ ये है की नमन किसी अपराधी, नेता को नहीं किया, यदि किया होता तो हा शर्म आती हमें |

  10. likhara

    April 25, 2010 at 7:24 pm

    patrakar ka kam h samachar banana or press varta me bat ko sunna, samman to dalal kism ke patarkar hi kar sakte h, ye jo log press varte me the inko patrkarita chhod deni chahiye, patrakaritka misan ki nak to na katwao.

  11. nishant

    April 25, 2010 at 12:06 pm

    kya baat hai saare mendhak ek saath tarrrrrra-tarrrrra karne lag gaye. bahut khub. kya safaaaai hai hai aap logon ki zanaab.iske liye ye cartoons acche rahenge. ;D;D;D;D;D>:(>:(>:(

  12. naveen

    April 25, 2010 at 12:09 pm

    nishant ji jo log safai de rahe hai we chori aur seena zori ki misaal hai ye mahoday log. ;D;D;D;D;D;D;D

  13. pradeep sati

    April 25, 2010 at 10:04 pm

    ye v ho sakta hai ki jis patrkaar bandhu ne aapko ye news bheji hai unko sreefal arpit karne ka mauka he na mila ho and hatas ho kar unhone ye khabar aap tak pahunchaa dee hogi warna ye mahasay apna naam jaroor batate…karan chahe jo v ho lekin yadi is tarah ke patrakaar media jagat main aate rahenge jo kavi kisee nata ya fir kisee swaamee ki chamchagiree karne main leen rahete hain tou bahut jaldi he patrakaarita main thoda bahut satya dekhne wale log v joota lekar patrakarita ke putle ka swagat karne lagenge…
    ab tou ek he ummeed thee ki chahe jo v ho lekin patrakarita apna dharm nibhayegi..lekin kya ek patrakaar ka yahee dharm hona chahiye ki wo apni publisity ke liye itne neeche gir jaye…?

  14. SANJAY SINGH JABALPUR

    April 26, 2010 at 6:43 am

    यशवंत जी,
    अगर कोई पत्रकार अपनी भावनाओ और विचारों व्यक्त करता है, तो मुझे नहीं लगता है की किसी व्यक्ति को ख़राब लगना चाहिए | मुझे नहीं पता की स्वामी जी की प्रेसवार्ता में क्या हुआ लेकिन जैसे जैसे लोगो के कमेन्ट आ रहे है उससे ये लगता है की अगर एक पत्रकार ने सच्चाई बयान कर दी है | और अब उन लोगों को ख़राब लग रहा है की उस ईमानदार पत्रकार ने ऐसा क्यों लिखा | मुझे तो लगता है जो पत्रकार उस ईमानदार पत्रकार के लिखे लेख पर कमेंट्स दे रहे है उन्हें शायद ये अच्छा नहीं लग रहा है की उसने क्यों ऐसा लिख दिया | शायद ये लोगों ने भी सम्मान और गिफ्ट लिया है जो की इस बात के खुलासे से स्पष्ट हो रही है | वैसे यशवंत जी में आपकों बता दूँ की जबलपुर में अधिकाश पत्रकार सिर्फ प्रेसवार्ता में ही दिखाई देते है | और किसी खबर के लिए शायद ही फिल्ड पर दिखाई दे | यंहा पर तो पत्रकारों के न जाने कितने गुट बन गए है | कई पत्रकारों के तो सरकारी ठेके चल रहे है | अगर विश्वास न हो तो एक RTI लगाकर देखा जा सकता है | और तो और अगर कोई नया पत्रकार अगर पत्रकारिता के क्षेत्र मैं आता है तो उसे सिनिअर पत्रकार भाव तक नहीं देते है | मैं जबलपुर का ही हूँ और अभी अभी पत्रकारिता मैं आया हूँ लेकिन ये सब देख कर मुझे लगता है की मैं पत्रकारिता में क्यों आया | लेकिन ये भी सोचता हूँ की हम राजनीती को गन्दा समझते है और इसमें जाने से कतराते है | लेकिन ये नहीं सोचते की राजनीती मैं अब अच्छे लोगों की जरुरत है और अच्छे लोगों को इसमें जाना चाहिए | ठीक इसी तरह मैं भी सोचता हूँ की पत्रकरिता मैं न जांऊ क्योंकि राजनीती की तरह पत्रकारिता भी गन्दी होती जा रही है | लेकिन फिर ये सोचता हूँ की इसमें भी अच्छे लोगों की जरुरत है और अच्छे लोगों को इसमें आना चाहिए | इस वजह से मैं पत्रकारिता कर रहा हूँ और मुझे ऐसा लगता है की एक न एक दिन वो दिन जरुर आएगा जब ईमानदार लोग पत्रकारिता करते दिखाई देंगे |

  15. rakesh

    April 28, 2010 at 5:48 am

    संजय जी पत्रकारों को अपने लेख पर मिल रहे कमेंट्स से खुश होना चाहिए और आपको भी खुश होना चाहिए की हमारे किसी ईमानदार साथी के लेख पर प्रतिक्रियाएं आ रही है इससे लेखक का संबल बड़ता है उसे ताक़त मिलती है सच लिखने की सो प्रतिक्रियाएं आने दो अच्छी या बुरी की चिंता मत करो ?

  16. Tikaram

    April 28, 2010 at 6:24 am

    Bhai Saheb, Aaap apne Baap ka samman na kare to koi apka kya bigad sakta hai akhir woh sirf apki Maa ka pati hi to hai!!! Samman karne ke liye bahut sari vinamrata aur bahut se sanskar chahiye….

  17. hemant

    April 29, 2010 at 4:12 pm

    जबलपुर के वे पत्रकार कहा है जो मुनि के सामने झुकने में तो अपनी बेइज्जती समझते थे लेकन एक कलेक्टर ने इनकी ओउकत दिखा दी , अब वे क्या करेंगे ???? इस कलेक्टर की खबर लेंगे ???? या चुल्लू बहर पानी में डूब मरेंगे .
    खबर तीसरी आंख . कॉम से साभार

  18. hemant

    April 30, 2010 at 6:20 am

    जबलपुर के वे पत्रकार कहा है जो मुनि के सामने झुकने में तो अपनी बेइज्जती समझते थे लेकन एक कलेक्टर ने इनकी ओउकत दिखा दी , अब वे क्या करेंगे ???? इस कलेक्टर की खबर लेंगे ???? या चुल्लू बहर पानी में डूब मरेंगे .
    खबर तीसरी आंख . कॉम से साभार
    पत्रकारों के सवालों से झल्लाए जबलपुर के कलेक्टर ने पत्रकारों को चुल्लू भर पानी में डूब मरने की नसीहत दे डाली. उन्होंने ये बात उस समय कही जब पत्रकार शहडोल संभाग के कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी से उनकी नयी कार के बारे में पूछ रहे थे. मामला उस समय हुआ जब मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री राघव जी जबलपुर में जबलपुर, शहडोल और रीवा संभाग की समीक्षा बैठक लेने आये थे.

    इस समीक्षा बैठक में शहडोल संभाग के कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी बिना नंबर की लक्जरी फोर्ड इन्डिवर वाहन में जबलपुर आये थे. जब ये बात पत्रकारों को पता चली तो उन्होंने वित्त मंत्री के जाते ही कमिश्नर साहब को घेर लिया और उनसे इस लक्जरी फोर्ड इन्डिवर वाहन के बारे में सवाल दाग दिए. कमिश्नर साहब अपना बचाव करते हुए कहने लगे की सरकार ने ये सुविधा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कलेक्टर और कमिश्नर को प्रदान की है. इसी कारण इस सुविधा का लाभ हम उठा रहे हैं. ये बात जबलपुर कलेक्टर गुलशन बामरा को ठीक नहीं लगी और उन्होंने पत्रकारों को नसीहत देते हुए कहा की इस तरह के सवाल आप लोगों को यहां नहीं करने चाहिए. कमिश्नर साहब हमारे मेहमान है और उनसे इस तरह के आप लोग सवाल कर रहे हैं. आप लोगों को तो चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए.

    अब साहब, कमिश्नर साहब आपके मेहमान हैं, और पत्रकार उनसे सवाल पूछ रहे हैं, और उन्हें इसका जवाब देने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है, तो आपको ख़राब बिल्कुल नहीं लगना चाहिए.

    इधर शहडोल कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी ने ये भी कहा कि सरकार ने 15 हज़ार रुपये किराये पर कोई भी वाहन लेने के लिए कहा है. लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या 15 हज़ार रुपये में लक्जरी फोर्ड इन्डिवर वाहन किराये पर मिल सकता है. क्योंकि इस वाहन का एवरेज ही 6-8 प्रति किलोमीटर है. प्रदेश के वित्त मंत्री राघव का कहना है कि प्रदेश पर बहुत ढेर सारा कर्ज का बोझ है पर कमिश्नर साहब लक्जरी कार में घूम रहे हैं.

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