जबलपुर शहर में नेपियर टाउन नाम के पाश इलाके में स्थित है प्रेस क्लब। इस प्रेस क्लब को ‘महाकौशल प्रेस क्लब’ कहा जाता है। प्रेस क्लब में शाम ढलते ही शराबियों और जुआड़ियों की भीड़ इकट्ठी होनी शुरू हो जाती है। ये शराबी-जुआड़ी कोई और नहीं बल्कि पत्रकार होते हैं। नेपियर टाउन में रहने वाले और खासकर प्रेस क्लब के पड़ोसी घरों के लोग इस क्लब के चलते काफी दिनों से परेशान रहते थे। शोर-शराबा, गाली-गलौच, जुआ, हंगामा, गाड़ियों की आवाजाही….यह सब कुछ उनकी शांत जिंदगी और सुकून भरी रातों को अशांत किए रहता था। मोहल्ले के लोग पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करके थक चुके थे। भला अफसर क्यों पत्रकारों से पंगा लेने लगे। वो भी पत्रकारों के संगठन प्रेस क्लब से। पर पिछले दिनों एक चमत्कार हुआ। 11 जून को पुलिस ने यहां छापा मार दिया।
छापा मारने का साहस दिखाया एक प्रोबेशनरी आईपीएस अधिकारी ने। यह युवा पुलिस अधिकारी जबलपुर में प्रोबेशन पर है। उसके पास शिकायत पहुंची तो उसने पुलिस टीम लेकर तुरंत प्रेस क्लब पर धावा बोल दिया। सूचना बिलकुल पक्की थी। प्रेस क्लब में जमकर जुआ खेला जा रहा था। मौके से पुलिस ने तीन लाख रुपए नगद बरामद किए। 40 मोबाइल मिले। कई अन्य आपत्तिजनक सामान भी वहां से बरामद हुआ। कुल 30 लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया। इनमें से कई पत्रकार भी हैं। पुलिस ने प्रेस क्लब सील कर दिया है। गिरफ्तार प्रेस क्लब मैनेजर के पास से पुलिस को एक डायरी भी मिली है जिसमे लाखों रुपयों की उधारी का हिसाब है। यह उधारी हारने वाले पत्रकार पर बकाया है।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस क्लब के संचालक मंडल के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने की तैयारी कर रही थी लेकिन पुलिस-पत्रकार गठजोड़ ने ऐसा होने से बचा लिया और सिर्फ क्लब के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा लिखाया गया। सूत्रों का कहना है कि जबलपुर के प्रेस क्लब में कई नामचीन संपादक और पत्रकारों की भागीदारी रहती है। पुलिस ने प्रेस क्लब को सील कर दिया है। नेपियर टाऊन के लोगों का कहना है कि यहां रोजाना रात को शहर के कई बड़े पत्रकार बैठकर शराबखोरी करते थे और जमकर हंगामा भी करते थे। चूंकि मामला पत्रकारों से जुड़ा था, लिहाजा शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई होने का सवाल ही नहीं था। फिलहाल जबलपुर के जुआड़ी पत्रकार चेहरा छिपाते घूम रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। जबलपुर के कुछ स्थानीय अखबारों ने प्रेस क्लब पर छापे की खबर को प्रकाशित भी किया है।
कुछ लोगों का कहना है कि पकड़े गए लोगों में कोई पत्रकार नहीं था। क्लब में रात में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता था, इसलिए पुलिस ने छापा मारकर उन्हें पकड़ा।











