बनारस से सूचना है कि दैनिक जागरण में स्ट्रिंगर के बतौर कई वर्षों से कार्यरत व विजय सिंह ने कल रात आत्महत्या का प्रयास करते हुए काफी मात्रा में जहर का सेवन कर लिया. उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है. बनारस के हेरीटेज हास्पिटल में विजय का इलाज चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि पारिवारिक विवाद के कारण विजय ने आत्महत्या की कोशिश की है.
पार्ट टाइम जर्नलिज्म करने वाले और बाकी समय घरेलू बिजनेस को आगे बढ़ाने में लगे रहने वाले विजय की पारिवारिक पृष्ठभूमि ठीकठाक है. आफिस में भी उन्हें व्यवहारकुशल रिपोर्टरों में शुमार किया जाता है. दूसरों के सुख-दुख में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले विजय के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना उन्हें जानने वाले लोग कर रहे हैं.












rakesh banzhal
June 7, 2010 at 10:30 am
Jankar dukh huaa ki eak repotor jo doour darshi hota hi Aatmhatiya jaisha kadam bhi utha sakata he. Khar paristithi jo bhi ho , hum substh hine ki prarthna karte hi or kamana karte hi ki apani ladhi khud lade Aatmhatiya jaisha kadam kabhi na uthaye.
Rakesh Banzhal Reportor Sadhna news
अमित गर्ग. राजस्थान पत्रिका. बेंगलूरु.
June 7, 2010 at 1:40 pm
विजय जी,
सबसे पहले तो हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि आपको जल्दी से चुस्त-दुरुस्त कर दें ताकि, आप सोच-समझने की स्थिति में लौट सकें। आपने जो कदम उठाया है, वह जीवन की किसी भी समस्या का समाधान नहीं होकर केवल जीवन का समाधान है। आत्महत्या केवल कायर लोग करते हैं और आप कायर हैं या नहीं? आप स्वयं तय कर लें। बतौर मित्र, आपसे एक बात कहना चाहते हैं कि जब भी कभी मन में इस प्रकार के बुरे विचार आने लगें तो परिवारजनों और उन लोगों को चेहरा एक बार याद कर लें जो आपके अपने हैं। चूंकि, आप एक पत्रकार हैं और एक पत्रकार आम आदमी से थोड़ा अधिक समझदार होता है, ऐसी अवधारणा है। तो आपसे हम भविष्य में इतनी उम्मीद तो कर ही सकते हैं कि आप इस प्रकार के रास्तों पर कभी भी नहीं चलेंगे।
satya
June 8, 2010 at 8:55 am
jagran agar aise hi nye logo ka sosan karta rha to ek din jagran ko acche logo ka akaal pad jayega.
satya
June 8, 2010 at 2:58 pm
baniya apna baniyapn kabhi nhi bhool sakta. aap logo se anurod hai baniya ki naukari mt kre
Dr. M. S. Singh "Manas"
June 10, 2010 at 5:47 am
Samaj me vyapt dusaro ki achhaieyo aur buraieyo per paini nazar rakhne wale Journalist Vijay Ji aap itne bujdil kaise ho gaye! Aap dhairya se kaam le aur ekbaar fir se swasth hokar naye sire se sangharsh kare. Jeet aapka intzar kar rahi hai.