उत्तर प्रदेश के माया राज में लखीमपुरखीरी जिलें में सच लिखने वाले पत्रकारों पर आफत के बादल मंडरा रहे हैं. कई पत्रकारों पर फर्जी मुकदमा लादकर उन्हें जेल भेजने की तैयारी की जा रही है, जिससे पत्रकारों में रोष है. अभी दलित पत्रकार लेखराम भारतीय पर सीओ सिटी बसंत लाल के निर्देश पर दर्ज फर्जी मुकदमें का मामला गर्म ही था कि लखनऊ से प्रकाशित एक दैनिक अखबार के संवाददाता पर थाना मैलानी में थानाध्यक्ष व दक्षिण प्रभागीय वनाधिकारी के मौखिक निर्देश पर वन रेंजर मैलानी अनिल श्रीवास्तव ने एक नहीं, एक दिन में तीन फर्जी मुकदमें फर्जी मुठभेड़ के कायम कर दिया, जिसको लेकर पत्रकारों में रोष है. लखनऊ से प्रकाशित एक अखबार के संवाददाता रमजानुल हक अंसारी ने दक्षिण वन प्रभाग में वन माफियाओं के माध्यम से सरकारी जंगलों में पेड़ों के अवैध कटान का समाचार कई बार प्रकाशित किया था.
सरकारी जंगलों में अवैध कटान का भंडाफोड़ हो जाने पर शासन व जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने वन रेंजर अनिल श्रीवास्तव और थानाध्यक्ष मैलानी पर कार्यवाही नहीं की, बल्कि मामले को दबाने के मकसद से पत्रकार के खिलाफ ही फर्जी मुठभेड़ का मुकदमा दर्ज कर दिया. इस घटना को लेकर प्रेस के दलालों को छोड़कर जनपद के पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया है. इस बाबत पत्रकारों की बैठक में फैसला किया गया है कि अगर फर्जी मुकदमा वापस नहीं हुआ तो पत्रकार आंदोलन करने के लिए मजबूर होगें. पत्रकारों ने वन रेंजर अनिल श्रीवास्तव व डीएफओ आरसी झा, थानाध्यक्ष मैलानी हेमंत पर प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोटने का षडयंत्र रचने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री से यह मांग की गई है कि इन तीन अधिकारियों को हटाया जाए. पत्रकारों का कहना है कि अगर ऐसा नही होता है तो इसके लिए सभी पत्रकार मिलकर लंबी लड़ाई लड़ने को विवश होंगे. साभार : जनसत्ता











