ताकि फिर किसी प्रतिभाशाली पत्रकार का अपमान न हो सके : नमस्कार यशवंत जी, मैं एक टीवी पत्रकार हूं.. जिसने कुछ दिनों पहले अपने स्वाभिमान के चलते एक प्रतिष्ठित संस्थान के टीवी चैनल को छोड़ दिया…. हालांकि उस चैनल में मैंने साढ़े पांच साल से भी अधिक समय तक काम किया…. लेकिन वर्तमान में मीडिया में आ रहे तेजी से बदलावों और विसंगितों की वजह से लम्बें समय तक चैनल में अपनी सेवा देने के बाद भी मुझे चैनल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा लेकिन चैनल छोड़ते वक्त मुझे जरा भी दुख नहीं था क्योंकि मुझे अपनी प्रतिभा पर पूरा यकीन था… वैसे भी, मेरा मानना था कि प्रतिभाशाली पत्रकार को जॉब की क्या कमी और प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक सहित मेरे पास 7 साल का पत्रकारिता का लम्बा अनुभव तो था ही.. लेकिन जब मैंने अन्य टीवी चैनलों में जॉब तलाशना शुरू किया तो मुझे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हाल ही में मैं चैनल वन में इंटरव्यू देने गई…. वहां इंटरव्यू लेने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुझे स्क्रिप्ट लिखने को कहा ..
फिर स्क्रिप्ट चेक करने के बाद मुझसे चंद सवालात किए, जिनका मैंने जवाब दे दिया। लेकिन इस प्रक्रिया के बाद मैं उस वक्त हतप्रभ रह गई जब उन्होंने मुझे कहा कि हम आप को रख लेंगे लेकिन आप को 15 दिन के ट्रॉयल पर काम करना होगा। मैंने पैसे की बात की लेकिन उन्होंने कहा कि हम तो काम देखने के बाद ही पैसे तय कर पायेंगे। मेरे मन में आया कि इस अधिकारी को खूब खरी-खोटी सुनाऊं कि यदि ये शर्त ही रखना था तो फिर इस इंटरव्यू का ड्रामा क्यूं किया। स्क्रिप्ट क्यूं लिखाई। सात साल के अनुभव वाले एक पत्रकार को ये कहते उन्हें शर्म नहीं आई कि वो ट्रॉयल दे। क्या इससे बेहतर वो मुझे मना नहीं कर सकते थे कि वो मुझे नहीं रख सकते.. उन्हें लगता है कि मैं काम करने में अयोग्य हूं। लेकिन 15 दिन ट्रॉयल पर काम कराने की बात कह अपमान करने की क्या जरूरत आन पड़ी… चाहती तो मैं भी उनका अपमान कर सकती थी लेकिन मेरे संस्कारों ने मुझे बड़ों का अपमान करना नहीं सिखाया।
इस इंटरव्यू के बाद आज मुझे रोज अपने पत्रकार होने पर शर्म आ रही है। मैं आज अपने उस निर्णय को कोस रही हूं जब लोगों के लाख मना करने पर मैंने एमएससी छोड़ अपनी फीस पत्रकारिता डिपार्टमेंट में ट्रांसफर करा ली थी और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म करने का फैसला लिया था। तब मेरे एमएससी डिपार्टमेंट के हेड ने कहा था कि तुम प्रतिभाशाली स्टूडेंट हो एमएससी करो, झोला छाप पत्रकार बनकर क्या पाओगी… एमएससी के बाद आगे तुम्हारे लिए बहुत स्कोप है। क्यूं यहां दाखिला लेने के बाद अपनी फीस जर्नलिज्म डिपार्टमेंट में ट्रांसफर करा रही हो, ये आगे चल कर तुम्हारे जीवन की सबसे बड़ी भूल कहलाएगी। यशवंत जी, आज एमएससी डिपार्टमेंट के उन हेड की बात सही साबित हो रही है और मुझे लग रहा है कि पत्रकारिता में भविष्य बनाना मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल बन गई है।
ये बात यहां लिखकर बस केवल मैं अपना मन हल्का नहीं करना चाहती बल्कि चाहती हूं कि मेरी इस व्यथा को आप अपनी वेबसाइट पर जगह दे ताकि कुकुरमुत्तों की तरह पैदा हो रहे ये तथाकथित चैनल फिर किसी प्रतिभाशाली पत्रकार का अपमान न कर सकें। किसी पत्रकार की सहनशक्ति का परीक्षण न करें। उसे पत्रकार होने पर शर्मिंदा न होना पड़े। आप से एक ओर गुजारिश है कि कृपा कर आप मेरी आइडेंटी छुपा लें। वैसे मैं नीचे अपना नाम नहीं दे रही हूं क्योंकि जानती हूं, पत्रकारिता में किस तरह के लोग है।
धन्यवाद सहित
एक व्यथित पत्रकार











