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संतों ने पत्रकारों से कहा- जब बुलाया नहीं तो क्यों आ गए

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की कवरेज से मना करने पर पत्रकारों ने दिया धरना : बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की कहावत हरिद्वार के पत्रकारों पर सटीक बैठती नजर आई। मौका था मुख्यमंत्री का हरिद्वार आगमन। हुआ यूं कि कुंभ मेले की तैयारियों के मद्देनजर कल राज्य के सीएम श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा कनखल में आयोजित संतों की एक बैठक में शिरकत करने आए थे। इसी दौरान मीडिया वाले भी कवरेज करने के लिए वहां पहुंच गये। मुख्यमंत्री अंदर अखाड़े में थे। पत्रकारों ने जब अंदर घुसने की कोशिश की तो वहां मौजूद संतों ने यह कहते हुए दरवाजा बन्द कर लिया कि आपको बुलाया किसने है, यह हमारी जरूरी बैठक है जिसकी कवरेज नहीं हो सकती।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की कवरेज से मना करने पर पत्रकारों ने दिया धरना : बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की कहावत हरिद्वार के पत्रकारों पर सटीक बैठती नजर आई। मौका था मुख्यमंत्री का हरिद्वार आगमन। हुआ यूं कि कुंभ मेले की तैयारियों के मद्देनजर कल राज्य के सीएम श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा कनखल में आयोजित संतों की एक बैठक में शिरकत करने आए थे। इसी दौरान मीडिया वाले भी कवरेज करने के लिए वहां पहुंच गये। मुख्यमंत्री अंदर अखाड़े में थे। पत्रकारों ने जब अंदर घुसने की कोशिश की तो वहां मौजूद संतों ने यह कहते हुए दरवाजा बन्द कर लिया कि आपको बुलाया किसने है, यह हमारी जरूरी बैठक है जिसकी कवरेज नहीं हो सकती।

अपनी बेइज्जती से परेशान पत्रकार वहीं अखाड़े के बाहर धरने पर बैठ गये तथा नारेबाजी करने लगे। पत्रकारों के इस रूप को देखकर वाणिज्य कर सलाहाकार समिति के अध्यक्ष पंकज सहगल, निर्वाण अखाड़े के महंत वासुदेवानंद गिरि लालबाबा व एसएसपी ने मौके पर पहुंचकर समझाने की कोशिश की लेकिन पत्रकार अपनी बात पर अड़े रहे। पत्रकारों के न मामने पर मुख्यमंत्री ने स्वयं बाहर आकर पत्रकारों को समझाते हुए वार्ता करने की बात कही, तब जाकर पत्रकार शांत हुए।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के साथ डामकोटी में एक प्रेसवार्ता की। उन्होंने माफी मांगी और कहा कि मुख्यमंत्री का कोई कार्यक्रम निजी नहीं होता। मुख्यमंत्री तो जहां जाता है वहां सरकार साथ ही जाती है। उन्होंने मेला अधिकारी और नोडल अधिकारी को साफ आदेश दिए कि पत्रकारों के साथ बैठ कर सुविधा के अनुसार रास्ता निकाला जाए। बताया जा रहा है कि चापलूसों से घिरे रहने वाले मेला उपनिदेशक सूचना राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री के आदेशों को हवा में उड़ाते हुए चंद अपने मित्र पत्रकारों को मेला अधिकारी के कक्ष में चाय पर आमंत्रित कर डाला जबकी बहुत से अन्य प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों को इसकी भनक तक नही लगने दी।

इस पूरे प्रकरण पर पत्रकारों की खासी बेइज्जती हुई। संत यह कहते दिखे कि पत्रकारों को बुलाया ही नहीं गया था, सब पत्रकार लिफाफों के चक्कर में आये हैं। बात कुछ हद तक सही भी है। दरअसल कुंभनगरी में फर्जी पत्रकारों की बाढ़-सी आ गई है जो सुबह से शाम तक आश्रम अखाड़ों के चक्कर काटते रहते हैं तथा महाराजों से पैसों के लिफाफे लेते हैं। इन्हीं चंद फर्जी पत्रकारों के कारण जो सक्रिय पत्रकार हैं, उन्हें कई बार जिल्लत उठानी पड़ती है। अभी कुछ दिन पहले एक महाराज के पट्टाभिषेक कार्यक्रम में कुछ पत्रकारों ने महाराज के हाथ से लिफाफे छीन लिये थे जिससे वहां अफरातफरी मच गयी थी। वरिष्ठ पत्रकारों ने इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाये जाने की बात कही है। कुल मिलाकर यदि पत्रकार वास्तव में अखाड़े में बिन बुलाये गये थे तो यह बिल्कुल वैसा ही था कि बेगानी की शादी में अब्दुल्ला दीवाना।

हरिद्वार से स्वतंत्र शिवा की रिपोर्ट

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0 Comments

  1. Trilochan singh

    January 29, 2010 at 1:42 pm

    B aja farmaya aapne ,,jab bulaya nahi to kyo aye khabar bata rahi hai ki sab lifafey ke liye aye ,,lifafey ke andar kya hai sab jante hain ,,,berozgari ke alam me har line me naye log ghus aye hain,,,akhbar me paisa hi kitna milta hai,,jab kamane ke liye ye sab kjarna pade to patrakar banne se acha hai ki dalali kare kahin aur is peshe ko badnam na kare ,,ab baat kare sadhuon ki muh me ram bagal me chhori ji sahi suna chhuri nahi chhori,,liye aslahon ke saye me chadhawa hazam karne wale ye patrakaro ko updesh na de ,,,bina ac ke sale rah nahi pate chale hain dharam dhvaja lahrane ,,beshak sabhi sadhu aise nahi to sab patrakar bhi aise nahi ,,,,is hamam me sab to nahi ha aadhe adhnange hain jai ram ji ki ,,,

  2. shashi

    January 30, 2010 at 7:27 am

    patrkar mahoday apni jankari ko pahle sudhar lye kyon ki press ko suchna vebhag ne to nimantran diya hi tha akhade ka ek pratinidhi kumaouni topi lagaye huy kumbh mela media center mien akhadon ki taraf se bakayda hath jaod kar nimantran de kar aya tha,esiliye patrkar vahan pahunce thy baki rahi lifafon ki bat to manyvar lifafe vale karykramon mein kya ho raha hay ye to app hi jano

  3. राजीव निशाना

    January 30, 2010 at 11:22 am

    जसवंत जी जिस समय मुख्यमंत्री की प्रेसवार्ता चल रही थी उस समय में राजीव निशाना संवादताता इंडिया न्यूज भी मौजूद था , लेकिन एक बात साफ है कि उस प्रेस वार्ता में कई हरिद्वार और देहरादून के पत्रकार बंधू आए लेकिन किसी ने भी पत्रकारों को होने वाली परेशानियों से मुख्यमंत्री को अवगत नहीं कराया, जब मुख्यमंत्री अपनी खूबियां गिना कर चुप हुए तो मैं उस वक्त खुद खडा हुआ और अपनी जेब से एक लेटर निकाल कर सीएम साहब के सामने पढने लगा, जब में ये लेटर पढ़ रहा था, उस वक्त सीएम साहब का ध्यान सिर्फ और सिर्फ मेरी आवाज पर था, लेकिन अफसोस कि उनके पास जवाब के नाम पर थी तो केवल खामोशी । सीएम साहब को मैनें पत्र में लिखे जिन शब्दों को पढकर सुनाया, वो कुछ ऐसा था…

    मुख्यमंत्री जी आपके मेला अधिकारी आनंद बर्द्धन जी नें 20 जनवरी को एक पत्र संख्या 4626 में लिखा था कि पुलिस उपमहानिरिक्षक नें 16-1-2010 को अवगत कराया था कि गत स्नान पर्वो पर प्रत्येक टीवी चैनल की चार-पांच टीमों द्वारा हरकी पैडी एवं मालवीय द्वीप तथा आस पास घूम- घूम कर शूटिंग की गयी जिससे काफी अव्यवस्था हुई, इस पर मैंने कहा की आपके पास सीसीटीवी फूटेज होगी आप खुद इस की जांच कर लिजिए की क्या अव्यवस्था हुई है, फिर इस पत्र में लिखा कि विदेशी पर्यटक एवं फोटोग्राफर भारी संख्या में बडे-बडे कैमरे लेकर स्नान करती हुई महिलाओं की फोटो खींचते दिखाई पडे,जो प्रत्येक दशा में भारतीय नारी की मर्यादा एवं गरिमा के विरुद्ध है…. इस पर मुख्यमंत्री जी को मैंने कहा की विदेशी पर्यटक कभी भी पत्रकार नही होता, भारतीय पत्रकार गंगा स्नान करने वाली महिलाओं को अपनी मां और बहन समझता है…और कोई भी भारतीय गंगा में स्नान करने वाली महिलाओं को नग्न अवस्था में टेलिकास्ट नही कर सकता क्योंकि उसके ऑफिस में जो आउटपुट हेड होते हैं वो सब कुछ वॉच करते हैं , वो भारतीय सभ्यता को कभी भी गलत नहीं दिखा सकते…और भी कई बाते की गई कि देश कि तमाम मीडिया कि कई यूनिट पावन गंगा में कुंभ को कवर करने के लिए गई है लेकिन कुछ चैनलों नें तो पैसों के बल पर होटलों को किराए पर ले लिया है लेकिन उनका क्या जिन्हे होटल सही लोकेशन पर नहीं मिल रहे, वो क्या लाईव नहीं दिखाएगे ? सरकार की तरफ से पीड्ब्लूडी के गेस्टहाउस के पास ओवी खडी करने को कहा गया है, जिस जगह ओबी वैन खड़े करने की वयवस्था कि गई है वहां से ठीक ठंग से लाईव नहीं हो सकता और आगर सभी चैनल की ओवी खडी हो जाएं तो कहीं ऐसा ना हो कि पहाड ही गिर पड़े, या कही कोई और हादसा न हो जाए, खुदा-ना खास्ते अगर कोई हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी ? मेला अधिकारी या सीएम साहब की । जिस जगह ओवी लगाने कि अनुमति दी गई है उस जगह से चैनल केवल विजुअल लाइव दिखा सकता है ना कि किसी गेस्ट को लाईव पर खडा कर सकता है, और जो उतराखंड के मुख्यमंत्री जी के मन में डर है कि कहीं कौई नग्न महीलाओ को ना दिखाए तो मंत्रीजी आपने करोडों रुपये खर्च कर दिए है कुंभ के नाम पर, लेकिन महिलाओं के लिए क्या आपने हजारों कि संख्या में महिलाघाट नही बनवाएं है, आखिर क्यों डर लगा रहा है आपको । आखिर कियी क्या है आपने…यहां तक की अभी तक कई सड़कें तक पूरी नहीं हो पाई है, कई जगह अब भी पंडाल का काम ही चल रहा है, सीएम साहब इससे अच्छा तो ये होता कि कम से कम आपकी अधूरी व्यवस्था के भरोसे यहां आने से अच्छा तो भक्तों के लिए इलेक्ट्रोनिक मीडिया वॉच करना होता, कम सम कम उन्हं घर बैठे गंगा की झलक तो मिलती और लोगों के अनुभव, लेकिन अफसोस की आपने उनसे उनका ये हक भी छीन लिया…
    रहा आपके मन के डर का तो आप ये समझ लिजिए की अगर कोई पत्रकार नंगी महीलाओ के विजूअल दिखाना चाहता है तो सकता है और आपकी पोल खोल सकता है कि आपने भारतीय महीलाओ के लिए कैसा घाट बनाया है या आपने क्या प्रबंध कर रखे है… आप भी एक पत्रकार रह चूके और और पत्रकारों के दर्द को समझने की छमता हम से कहीं ज्याद है…
    आपके जबाव के इंतजार में

    राजीव निशाना
    संवाददाता इंडिया न्यूज
    09212338203,09868212726

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