मैं दिल्ली के एक प्रतिष्ठित खबरिया चैनल में सीनियर वीडियो एडिटर हूं. पत्र लिखने का मकसद ये है कि भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि में सितंबर अक्टूबर-09 में लेक्चरर प्रोफेसर और प्रोड्यूसर-एडिटर के लिए पोस्ट निकाली गई, जिसमे एडिटर के लिए सिर्फ 1 ही पोस्ट थी. देखें- http://mcu.ac.in/Faculty_Position_Adv_2009.htm इसमें प्रोड्यूसर एडिटर के लिए योग्यता इलेक्ट्रानिक मीडिया में मास्टर डिग्री और 5 वर्षों का अनुभव मांगा गया था.
चूंकि मैंने भी इसी संस्थान से सन 1999-2001 में मास्टर आफ ब्राडकास्ट जर्नलिज्म किया था और इलेक्ट्रानिक मीडिया मे काम करते हुए 10 साल हो गए हैं, योग्यता और अनुभव के आधार पर मैंने भी पद के लिए आवेदन किया जिसमें पद के लिए मांगी गई सारी योग्यता मुझमें थी. यहां पर मैं आपको एक खास बात बताना चाहूंगा कि जिस समय (28 सितंबर) को मैं स्वंय भोपाल जा कर आवेदन जमा करने गया था, उसी समय मेरी मुलाकात कुछ पुराने टीचरों से भी हुई. उन्होंने मुझे उसी समय यह कह दिया था कि तुम बेकार में भर रहे हो. यह पद किसी खास व्यक्ति के लिए जनरेट किया गया है और सब सेटिंग पहले से हो चुकी है और मुझे कोई फायदा नहीं होने वाला. हुआ भी यही.
यशवंत जी, इस पद के लिए 20 अप्रैल को इंटरव्यू था. मेरा फार्म रिजेक्ट कर दिया गया क्योंकि मैं इस पद के लिए मुख्य दावेदारों में से एक था. इंटरव्यू के लिए काल लेटर तक नहीं भेजा गया. इस संबध में मैंने कालेज प्रशासन से कई बार बात करने की कोशिश की और मेल भी किया पर किसी ने कोई जवाब तक नहीं दिया. किस व्यक्ति का सेलेक्शन होने वाला है, उसका नाम इंटरव्यू होने के पहले ही मुझे मालूम चल गया. उसका नाम ही इंटरव्यू में सबसे ऊपर रखा गया. यशवंत जी, आपने भी घाट घाट का पानी पिया है और मेरा भी अनुभव कुछ कम नहीं है. हम जानते हैं कि सेटिंग कैसे और किस लेवल तक होती है पर हमारे हाथ में करने के लिए कुछ नहीं होता क्योंकि न हमारे पास पैसा है न पहुंच. पर आज आपके पास एक ऐसा माध्यम है (bhadas4media.com) जो बड़े बड़े के तोते उड़ा देता है इसीलिए मैं आपको एक साथी मानकर ये पत्र लिख रहा हूं. मुझे आशा है कि आप मेरी सहायता अवश्य करेंगे.
माखनलाल में निकले जिस पोस्ट के लिए मैंने आपको ये मेल किया है, ये पद निकालते समय माखनलाल में पुराने कुलपति अचुत्यानंद थे. सारी सेटिंग इन्हीं के समय में की गई थी. पर आज वहां नए कुलपति बीके कुठालिया हैं जिन्होंने 2 महीने पहले ही ज्वाइन किया. शायद उनको इन सारी बंदरबाट की जानकारी न हो. मैं आपसे इतनी सहायता चाहता हूं कि ये सारी सेटिंग की जानकारी आपके माध्यम से उन तक पहुंच जाए ताकि चयन साफ तरीके से हो सके.
एक आवेदक
दिल्ली












vineet kumar gkp (09936809770)
April 21, 2010 at 7:49 am
yah koi new trend nahi hai is type ka kam sadyio se hota aa rahayia 😉
varun
April 21, 2010 at 7:53 am
msc. elactronic media ki degri or mabj master of arts in brodcast journalism ki degree main kuch frak to hoga?
pramod
April 21, 2010 at 8:02 am
jo sahi bo sahi………. mujhe khushi he ki apne yeh patr likha……:)
pankaj kumar singh, patna 09951879247, copy editior, etv news, bihar desk
April 21, 2010 at 8:42 am
india ke lagbhag sabhi vishwavidyalayon me settingg , chaplusi,aur ghush ke bal par hi bahali hoti hai,ese sabhi jante,ye jabane se chala aa raha hai,azadi ke bahut pahle se, yakin na ho to harivansh rai bachhan ki jeevani padiye,khud unhone likha tha ki kis tarah allahabad university ke english department hod ne unki madad ki thi,5,000 ke prize ke liye log kya -kya nahin karte hain,aur janha jeevan bhar 50,000 ki tankhwah milani ho log koi bhi karm karne ko bhala taiyyar kyon nahin ho, jnu,du,amu,se lekar naya nawela wardha ke campus me kewal yahi ho raha hai,makhanlal ke haal par aanshu bahane ka koi fayada nahin,yahi bharatiya vishwavidyalayon ki sanskriti hai,unki yahi swayatata shes hhai,ek student jab jab baudhik rup se kunthit ho jata hai tabhi wo jod-tod kar lecturer ban pata hai,merit se to aub india me pm bhi nahin banta, aisa hota to pranab mukharjee kub ka pm bun gaye hote,,,
sachin yadav
April 21, 2010 at 8:47 am
ho sake to inki madad zaroor kare. saath hi jisko naukari di gayi hai uski yogata kya hai yeh bhi pata kare. ek rti dale kyo aapka form reject hua aur yaha ugc mein bhi complain kare. kyoki aap abhi bhi ek news channel mein kaam kar rahe hai isliye aap ko kuch madad milsakti hai.
ranjna
April 21, 2010 at 8:49 am
Avedak ji ye to is sangthan me pehle se he chal raha hai ha…ye bat aapke samne tab aayi jab ye ghatna aapke saath hui…lekin yaha kafi samay se he aisi sath gath chalti hai….
Shalini Garg
April 21, 2010 at 9:00 am
Aapne bahut sahi kiya jo yahan apni baat likh di. Isi tarah hum apni awaaz utha sakte hain.
sujit
April 21, 2010 at 11:09 am
NAVIN BHAI MAI AAP KAA DARD JAAN SAKTA HU AAP KE SAATH ANYA HUA Q KI AAP HAMAARE SENIOR HAI.KINTU MAKHALAL KE STUDENTS AAJ HAR JAGAHA CHANNELS,PRINT,PRODUCTION HOUSE,WEB JOURNALISM,NGO’S GOVT DEPT ME ACCHE POSITION PE HAI AUR MCRPV KE KAARAN AAJ UNKE CHULLE JAL RAHE AAP KO BHI TO NAUKARI MCRPV KE DEGREE PE HI MILI…MUCH KHAMIYA AUR KAMIYAA JARUR HAI MCRPV ME..
Vivek Chaurasia
April 21, 2010 at 12:10 pm
I am also one of the candidate who applied for this post….. university people even dont bothered to inform or to give response…. i dont know how all the employees of this university get recruited. I can only say this…. HAR SHAAKH PE ULLU BAITHA HAI….. ANJAM-E-GULISTAN KYA HOGA,.
Haresh Kumar
April 21, 2010 at 12:20 pm
बिना लाग-लपेट के आपने पत्र को अपने साइट पर डाला। इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। पत्रकारिता ही नहीं हर जगह अपने लोगों को लाने के लिए जुगाड़बाज लोग हर तरह का जुगाड़ कर लेते हैं और आम आदमी की आवाज अनसुनी रह जाती है। लेकिन कई बार यही आम आदमी की आवाज जब आक्रोश बनकर उठती है तो बड़े से बड़े साम्राज्य का पतन हो जाता है। आप यूं ही लोगों की आवाज उठाते रहिए। लोग आपके साथ खुद ब खुद जुड़ जाएंगे। मैं अकेला ही चला था, जानिबे मंजिल। लोग आते गए और कारवां बन गया। आज भड़ास4मीडिया कई लोगों की आवाज बन चुका है। आशा है कि आगे भी ऐसा ही रहेगा और किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। एक बार फिकर आपको धन्यवाद।
* >.पंकज झा.
April 21, 2010 at 2:25 pm
बिना मतलब विवाद नही पैदा किया जाना चाहिए. इससे एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की छवि खराब होती है. कम से कम वहाँ की उपाधि लेकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों को तो अपने संस्थान पर रहम करनी चाहिए. मोटे तौर पर अभी पत्रकारिता के दो तरह के संस्थान अस्तित्व में हैं…एक काफी अच्छा लेकिन अभिजात्य और दूसरा परचून के दूकान की मानिंद…! एक में हिन्दी भाषी निम्न मध्य आयवर्ग के छात्र झाँक नहीं सकते और दुसरे में झांक कर अपनी घरारी और पिता के सपने बेच देने का कोई मतलब नहीं. लेकिन निश्चित तौर पर माखनलाल इन दोनों का अपवाद है. उस संस्थान ने पत्रकारों की फ़ौज तैयार की है…और सभी गरीब या थोड़े कम गरीब छात्रों की. आज आप कोई चेनल, कोई अखबार, कोई मीडिया हाउस, कोई सरकारी और असरकारी संस्थान..यहाँ तक की राजनीतिक पार्टी और फिल्म, धारावाहिक निर्माण करने वाली कंपनियां भी ऐसा आन्ही पायेंगे जहां माखनलाल के छात्र नियुक्त नहीं हो….हो सकता है हर संस्थान के तरह यहाँ भी कुछ कमजोरियां होगी ..लेकिन पर्दाफ़ाश अंदाज़ में अपने ही घर की साख गिरा कर भूतपूर्व छात्र ने मेरे समझ से अच्छा नहीं किया है…..!
– एक और भूतपूर्व छात्र
माखनलाल विवि, भोपाल
Abhishek sharma
April 21, 2010 at 2:48 pm
Bhai mere ye kaliyug hai, isse adhik ki kalpana kijiye ye to kam hai………[email protected]
vinay yadav
April 21, 2010 at 7:16 pm
सर आप सीनीयर एडीटर हैं आपने अपने साथ घटने वाली घटना को इस साइट पर डाला इसके लिए शुक्रिया अदा करना चाहूगा क्योकि आधुनिक पत्रकारिता का स्वरूप बदल गया है हम जैसे जूनियर डिग्री धारकों की डिग्री कोई महत्व नही रखती सेंटिग और जुगाड़खोरी के सामने चूकि सर आपको तो मालूम ही होगा कि यहाँ तो लोकतंन्त्र ही जुगाड़ पर चलता है। मै तो सर यही कहूगा जिओ शान से रहो सम्मान से लडते रहो सच्चाई के साथ आने वाले हर तूफान से।
nikhil
April 22, 2010 at 6:58 am
LOKTANTRA MAIN SABKO SETTING-GETTING KA ADHIKAR HAI
SOURCE KA JAMANA HAI, DEGREE – DIPLOMA BEKAR HAI
DEGREE DIPOMA BEKAR HAI TO JAAGO MOHAN PYARE
CHORO IMANDARI KO, TU BHI SOURCE LAGA LE
pramod
April 22, 2010 at 8:37 am
अरे भाई रोने से कुछ नहीं होगा… नौकरी जिसे नहीं मिलती वो ऐसा रोना रोता ही है। काबीलियत की कुछ दिन अनदेखी हो सकती है, उसे कोई मिटा नहीं सकता। रोना धोना छोड़ो.. और आगे बढ़ो..।