वाकया शुक्रवार 27 नवंबर का है। इस दिन भोपाल में एक विवादास्पद किताब ’विवाह एक नैतिक बलात्कार’ का विमोचन हुआ। इसका विमोचन जूली और मटुकनाथ ने किया। किताब के शीर्षक को लेकर ‘संस्कृति बचाओ मंच’ ने खूब बवाल काटा। मटुकनाथ और जूली का तो विरोध किया ही गया, किताब के लेखक अजय ऋषि की पिटाई भी कर दी और उनके मुंह पर कालिख भी पोत दी। खबर मसालेदार थी सो सारे चैनलों ने इसको तान दिया। साधना न्यूज (मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़) पर जोरदार ढंग से खबर चलाई गई। सहारा और साधना की जंग पुरानी है। दोनों चैनलों में होड़ मच गई कि कौन जूली और मटुकनाथ को भुना पाता है। सहारा समय मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ पर खबर चलते-चलते प्रोमो भी ऑन एयर कर दिया गया- ‘मिलिए मटुकनाथ और जूली से रात आठ बजे’।
इस बीच साधना न्यूज (मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़) ने बिना प्रोमो चलाए रात आठ बजे अपने खास कार्यक्रम ‘आपकी बात आपके साथ’ में मटुक नाथ और जूली समेत किताब के लेखक अजय ऋषि और संस्कृति बचाओ मंच के नेता चंद्रशेखऱ तिवारी को अपने स्टूडियो में बैठा दिया। अब सहारा के लोग करते तो क्या करते? उन्हें काटो तो खून नहीं जैसी हालत हो गई। साधना पर सब लाइव चल रहा है, मुद्दा भी गर्मागर्म, सारे गेस्ट साधना के पास तो सहारा वालों को बौखलाहट तो होनी ही थी। ऐसे में साधना के भोपाल ब्यूरो ने गेम खेला। नोएडा ऑफिस को बताया कि वे कुछ ही देर में जूली और मटुकनाथ को बुला रहे हैं।
सहारा भोपाल ब्यूरो वाले शायद ये बात इस उम्मीद से कह बैठे कि साधना पर आधे घंटे का शो खत्म होने के बाद वे मटुक जूली को अपने स्टूडियो ले आएंगे। सो सहारा के नोएडा स्टूडियो से एंकर बार-बार ऑन एयर कहता रहा ’हम आपको बस कुछ ही देर में मटुकनाथ और जूली से मिलाएंगे’। इधर घड़ी की सुई साढ़े आठ पर पहुंच रही थी, उधर सहारा के एंकर की आवाज़ में और जोश बढ़ रहा था। वो बार-बार चिल्ला रहा था ‘बस कुछ ही देर में मटुकनाथ और जूली से हम आपको रू-ब-रू कराएंगे’। समय बीतता गया, आठ के बाद पौने नौ बज गए, फिर नौ बज गए लेकिन सहारा देखने वालों को मटुक-जूली से नहीं मिलाया गया। आखिर सहारा वाले मिलाते भी कैसे? साधना वालों ने उनको अपने स्टूडियो से फ्री किया ही नहीं। साधना अपने कार्यक्रम का समय बढ़ाता चला गया। प्रोग्राम इतना रोमांचक हो गया था कि मटुकनाथ और ‘संस्कृति बचाओ मंच’ के नेता तिवारी के बीच मारपीट तक हो गई थी। साधना के दर्शकों ने कार्यक्रम देखकर मजे लिए और सहारा देखने वाले बेवकूफ बन गए।
लेकिन शायद सहारा का मैनेजमेंट ऐसी बातों को बड़ी गंभीरता से लेता है। तभी तो उसकी भौंहें तन गईं। दर्शकों को बेवकूफ बनाना उसे कतई अच्छा नहीं लगा और उसने तुरंत भोपाल ब्यूरो को एक नोटिस जारी कर दिया। अब भोपाल में बैठे सहारा समय के लोगों से ज़वाब देते नहीं बन रहा है।











