(यह पत्र आकाशवाणी के एक श्रोता ने भेजा है, नाम न छापने के अनुरोध के साथ)
हो सकता हैं मैं गलत पाया जाऊं, लेकिन मैं महसूस कर रहा हूं कि आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले समाचार बुलेटिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खबरों की लगातार अनदेखी हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बुलंदशहर, अलीगढ़ वगैरह की आबादी और महत्व को देखते हुए यहां की महत्वपूर्ण खबरों तक की अनदेखी की जाती है। गैर-कांग्रेसी नेताओं की तो अति महत्वपूर्ण खबरें भी बड़ी मुश्किल से सुनाई पड़ती हैं। गाज़ियाबाद काफी महत्वपूर्ण शहर है, हर तरह से। लेकिन पिछले एक साल में गाजियाबाद के डेढ़ दर्जन से ज्यादा समाचार प्रसारित नहीं हुए आकाशवाणी से।
गाजियाबाद की तुलना में मेरठ के समाचार काफी आये लेकिन मेरठ के महत्व को देखते हुए बहुत ही कम। पक्के आंकड़े तो नहीं लेकिन एक साल में मेरठ के 70-80 समाचार तो आये होंगे। नोएडा (गौतम बुद्धनगर) का तो कोई समाचार बिरला ही सुना गया होगा आकाशवाणी पर। यही हाल बागपत, मुजफ्फरनगर वगैरह का है। ये घनघोर अन्याय है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ। आकाशवाणी के समाचार महानिदेशक को ये पक्षपात दूर करना चाहिये। बल्कि गाजियाबाद के सांसद राजनाथ सिंह और मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल को भी कोशिश करनी चाहिये कि आकाशवाणी पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ये अन्याय खत्म हो।
इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खबरें लखनऊ केंद्र के साथ ही दिल्ली केंद्र से भी प्रसारित हों, तो बेहतर होगा क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ज्यादातर इलाका दिल्ली से सटा हुआ है। रोज लाखों लोग दिल्ली आते-जाते हैं। दिल्ली से खबरें प्रसारित होंगी तो राजधानी होने की वजह से उन पर कुछ सुनवाई और कार्रवाई भी होगी और इस इलाके का विकास भी होगा। यानि कुल मिलाकर आकाशवाणी इस क्षेत्र के विकास में भी अहम भूमिका निभा सकती है। लेकिन उसके लिये आकाशवाणी के अफसरों को सरकारी पार्टी की चारणगिरी छोड़नी होगी और समाचार को समाचार की तरह से पेश करना होगा। उनकी चारणगिरी के चक्कर में समाचार भेजने वाले संवाददाताओं की भी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
आपका
आज के जमाने में भी आकाशवाणी का एक नियमित समाचार श्रोता











