ब्लागरों पर लगाम लगाने की सोचने लगी है सरकार!

मीडिया पर किसी भी कीमत पर नियंत्रण करने पर आमादा केंद्र सरकार अब न्यू मीडिया माध्यमों (ब्लाग, वेबसाइट, कम्युनिटी रेडियो, मोबाइल आदि) को भी कानून के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार एक मीडिया आयोग बनाने की सोच रही है। यह आयोग न्यू मीडिया माध्यमों को कानूनी दायरे में लाने के लिए प्रस्ताव, सिफारिश और सलाह तैयार करेगा। इन सिफारिशों के आधार सरकार कानून बनाएगी। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों हुई सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में मीडिया आयोग गठित करने पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों का कहना है कि न्यू मीडिया को कानूनी दायरे में लाने जैसा विवादित कदम सरकार लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नहीं उठाना चाहती इसलिए इसे आगे आने वाले दिनों के लिए रोक दिया गया है।

संभव है, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार अगर चुनाव जीत कर दोबारा सत्ता में आ जाती है तो मीडिया आयोग का गठन कर दे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अफसर का नाम न छापने की शर्त पर कहना है कि इस पहल को मीडिया पर सरकारी नियंत्रण के रूप में नहीं लेना चाहिए। दरअसल, नए दौर में जन्मे नए मीडिया माध्यमों को अनुशासन, संयम और कानून की परिधि में लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है ताकि कल को इऩ माध्यमों के चलते अराजक, देश विरोधी और जन विरोधी हालात न पैदा हो जाएं।  इस अफसर का कहना है कि कोई भी कदम आम राय के बाद ही उठाया जाएगा लेकिन इतना तय है कि न्यू मीडिया माध्यमों के कंटेंट को लेकर विवाद खड़े होने की स्थिति में मामले के निपटारे के लिए न्यूनतम कानून का होना आवश्यक है।

उधर, मीडिया विश्लेषक सरकार के इस रुख को चिंतित करने वाला बताते हैं। इनका कहना है कि सरकार हर चीज में कानून बनाने की ही बात क्यों करती है। क्या न्यू मीडिया माध्यमों के विकास और संचालन के लिए इन्हीं न्यू मीडिया माध्यमों में सक्रिय वरिष्ठ लोगों की एक टीम बनाकर खुद के लिए न्यूनतम मानक बनाने का प्रयास नहीं कराया जा सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक सरकार ब्लाग और वेबसाइटों के जरिए उठ रहे सत्ता विरोधी आवाज पर रणनीतिक तरीके से लगाम लगाने के लिए ही मीडिया आयोग बनाने की सोच रही है। अब जबकि सबको पता है कि न्यू मीडिया माध्यमों की उपेक्षा नहीं की जा सकती और पढ़े-लिखे लोगों की बहुत बड़ी संख्या इन माध्यमों से जुड़ चुकी है, सरकार इसमें भी अपनी दखलंदाजी बढ़ाने की कवायद कर रही है जो शैशव काल में चल रहे न्यू मीडिया माध्यमों के लिए खतरनाक साबित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *