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एक्सप्रेस ही नहीं, कई और भी हैं अपराधी

दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, दैनिक हिंदुस्तान, बीबीसी, डीएनए इंग्लिश, टेलीग्राफ, स्टेट्समैन, एचटी ने भी बच्ची की पहचान उजागर की : बी4एम पर ‘इंडियन एक्‍सप्रेस को जवाब देना होगा‘ शीर्षक से कल एक लेख पढ़ा। इंडियन एक्‍सप्रेस का ई-पेपर भी देखा। वाकई हैरान करने वाली बात है कि आतंकी हमले की गवाह बच्‍ची का फोटो फ्रंट पेज पर प्रकाशित कर दिया गया। लेकिन यह कृत्य सिर्फ इंडियन एक्‍सप्रेस ने ही नहीं किया। दैनिक भास्‍कर के अंतिम पृष्‍ठ पर भी यही था। और पत्रकारिता में मिसाल समझे जाने वाले बीबीसी हिंदी डाट काम की ओर से भी कोई एहतियात नहीं बरती गई। उसने इस बच्‍ची का नाम और उसके पिता का नाम प्रकाशित किया। 

दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, दैनिक हिंदुस्तान, बीबीसी, डीएनए इंग्लिश, टेलीग्राफ, स्टेट्समैन, एचटी ने भी बच्ची की पहचान उजागर की : बी4एम पर ‘इंडियन एक्‍सप्रेस को जवाब देना होगा‘ शीर्षक से कल एक लेख पढ़ा। इंडियन एक्‍सप्रेस का ई-पेपर भी देखा। वाकई हैरान करने वाली बात है कि आतंकी हमले की गवाह बच्‍ची का फोटो फ्रंट पेज पर प्रकाशित कर दिया गया। लेकिन यह कृत्य सिर्फ इंडियन एक्‍सप्रेस ने ही नहीं किया। दैनिक भास्‍कर के अंतिम पृष्‍ठ पर भी यही था। और पत्रकारिता में मिसाल समझे जाने वाले बीबीसी हिंदी डाट काम की ओर से भी कोई एहतियात नहीं बरती गई। उसने इस बच्‍ची का नाम और उसके पिता का नाम प्रकाशित किया। 

अमूमन ऐसे मामलों में गवाह का परिवर्तित नाम दिया जाता है। फोटो में चेहरा छिपा कर प्रकाशित किया जाता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। बीबीसी की वेबसाइट पर यह देखा जा सकता है। बीबीसी की तरह दैनिक हिंदुस्तान और दैनिक जागरण ने भी बच्ची के नाम का खुलासा किया है। बाद में मेरे एक पत्रकार मित्र ने मुझे बताया कि डीएनए इंग्लिश और द टेलीग्राफ ने भी बच्ची और उसके पिता की फोटो प्रकाशित की है। हिंदुस्तान, एचटी और स्टेट्समैन ने गवाह से संबंधित सारी असली जानकारी प्रकाशित कर दी है। 

क्‍या यह कहा जा सकता है कि पत्रकारिता अब ऐसे संवेदनशील मसलों पर हल्‍की होती जा रही है? क्‍या यह कोई गंभीर घटना नहीं है? हर हाल में यह एक अपराध है। उस बच्‍ची और उसके पिता की पहचान जगजाहिर हो गई है। इससे उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। 26/11 की घटना में अहम आतंकी कसाब को पहचानने वाली उस बच्‍ची के प्रति मीडिया का मानवीय चेहरा कहां काफूर हो गया, समझ से परे है। लेकिन यह कहा जा सकता है कि जो रवैया मीडिया ने अख्‍तियार किया है, वह कतई क्षमा योग्‍य नहीं है।


यह टिप्पणी एक पाठक ([email protected]) की तरफ से बी4एम के पास पहुंची है।

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