मुंबई अटैक प्रकरण के दौरान नरीमन हाउस और ओबेराय होटल में छिपे दो आतंकियों का फोनो प्रसारित करना इंडिया टीवी के गले की फांस बन गया है। इस कृत्य को केंद्र सरकार ने गलत मानते हुए चैनल को नोटिस थमा दिया है। नोटिस में कहा गया है कि बातचीत का प्रसारण कर चैनल ने आतंकवादियों को अपना मकसद प्रचारित करने के लिए मंच प्रदान किया। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इंडिया टीवी ने आतंकियों से बातचीत का प्रसारण कर देश की सुरक्षा को खतरे में डाला। साथ ही, आतंकवाद का महिमामंडन कर इसे बढ़ावा देने का काम किया। मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो इस मामले पर सरकार गंभीर है। चैनल को एक दिसंबर तक जवाब देने को कहा गया है। जवाब मिलते ही चैनल पर कार्रवाई के तरीके के बारे में विचार किया जाएगा।
उधर, इंडिया टीवी प्रबंधन ने आतंकियों से बातचीत के प्रसारण को उचित ठहराने की कोशिश की है। चैनल के सीओओ रोहित बंसल का कहना है कि हमारे प्रसारण के जरिए सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों की ओरीजिन जानने में मदद मिली। उनका कहना है कि इंडिया टीवी का मकसद इस प्रसारण के जरिए आतंकियों की ओरीजिन, इंटेंशन और बैकग्राउंड को जानना था। इसी बातचीत के जरिए सुरक्षा एजेंसियों को पता चला कि ये आतंकी हैदराबाद या कहीं और से नहीं बल्कि पाकिस्तान से आए हैं।
बंसल ने यह भी कहा कि दुनिया भर में मीडिया द्वारा लादेन के संदेशों और लश्कर व हिजबुल के कमांडरों के इंटरव्यू को प्रकाशित-प्रचारित कर उनके इरादों का खुलासा किया जाता रहा है। रोहित बंसल ने कहा कि इंडिया टीवी ने सुरक्षा एजेंसियों की मदद से यह पता लगाया कि सदुल्ला नाम का एक आतंकी जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था वह एक स्वीडिश लेडी का था, जिसे आतंकियों ने ओबेराय होटल के कमरा नंबर 1856 से बंधक बनाया था। इसी तरह नरीमन हाउस में एक अन्य आतंकी इमरान बाबर जिस मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा था, वो भी एक विदेशी बंधक का था। बंसल ने सफाई दी कि आतंकियों से बातचीत के दौरान हमने उनसे लगातार यही कहा कि वे सुरक्षा बलों से घिर चुके हैं, इसलिए सरेंडर कर दें। साथ ही उनसे सभी बंधकों को रिहा करने की भी बार बार अपील की गई।
बंसल ने बताया कि इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जो नोटिस चैनल को भेजा गया है, उसका समुचित जवाब तय समय सीमा के पहले भेज दिया जाएगा।











