पैकेज मिलते ही मीडिया समूह चुप हुए

सलमान खानइंदौर में एक पत्रकार ने सलमान खान की बोलती बंद की : मैं किसी जमाने में पत्रकारिता किया करता था अब पत्रकारिता में पैकेज की चर्चा सुना करता हूं. मगर इस दौरान कुछ ऐसा हुआ जिससे लगा कि अब भी मीडिया में कुछ लोग ऐसे हैं जो बिना लालच और बिना डरे अपना काम करने का हौसला और हिम्मत रखते हैं. सीधे मूल बात पर आते हैं. बात है इसी महीने की तीन तारीख की. एक्टर सलमान खान इंदौर में महापौर पद के एक प्रत्याशी के लिए रोड शो करने आये थे. उनके साथ एक केन्द्रीय मंत्री के सुपुत्र भी थे. रोड शो के पहले सलमान को पत्रकारों से मिलवाया गया. सलमान ने कहा कि चूंकि वो इंदौर में जन्मे हैं इसलिए चाहते हैं यहां एक अच्छा इंसान जीतकर आये और इसीलिये वो रोड शो करने आये है. सलमान की इस बात पर पी.सी. में मौजूद एक नेशनल न्यूज़ चैनल (न्यूज़24) के एक पत्रकार ने तुरंत उनसे पूछा….

…आपकी नज़र में अच्छे और बुरे इंसान की कसौटी क्या है?

…एक ऐसा व्यक्ति जो सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करके उन पर इमारतें बनाकर बेच देता हो, क्या उसे आप अच्छा आदमी मानते हैं?

इस सवाल ने पी.सी. में मौजूद कई लोगों और कई पत्रकारों के चेहरे उतार दिए. दरअसल जानने वाले लोग ये जानते हैं कि यहां से कांग्रेस प्रत्याशी और उनके परिवार के लोग प्रदेश के सबसे बड़े भूमाफिया हैं. इनका आर्थिक साम्राज्य कम से कम 10 हज़ार करोड़ रुपये का है. ये और इनके साथ जुड़े लोगों ने इंदौर में कई सरकारी ज़मीनों पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जे किए. फिर निर्माण करके ऊंचे दामों में इसे बेच दिया. सहकारी संस्थाओं में घपले कर इनका समूह शहर के हज़ारो लोगों के प्लाटों पर कब्जा कर चुका है. ये लोग एक अखबार भी चलाते हैं.

10-15 साल पहले इंदौर के तत्कालीन कलेक्टर मनोज श्रीवास्तव ने इनके द्वारा बनाई गई एक 10 मंजिल नाजायज़ बिल्डिंग को तोड़ गिराया था. तब यही प्रत्याशी प्रशासन को धमकाने पहुंच गए थे. चुनाव लड़ने के पहले ही इन लोगों ने न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश के बड़े बड़े मीडिया घरानों को बड़ा पैकेज दिया ताकि इनकी पुरानी करतुत लोगों को याद न दिलाई जाए और पैकेज लेने के बाद लगभग सारे मीडिया समूह खुद सब कुछ भुलाने को तैयार हो गए.

मगर इस युवा पत्रकार ने एक ही सवाल करके इनके इरादों को नाकाम कर दिया. अभी तक मुझे लगता था कि टीवी में काम करने वाले लड़के-लड़किया क्रिकेट और फिल्मी ग्लैमर के अलावा कुछ और सोचने समझने की कुव्वत नहीं रखते मगर इस वाकये ने मुझे गलत साबित किया और मुझे इस बात की बेहद खुशी है.

इंदौर के किसी भी अखबार या चैनल ने सलमान की पी.सी. की रिपोर्टिंग में इसका ज़िक्र नहीं किया, सिवाय सहारा समय मध्य प्रदेश के. सहारा समय मध्य प्रदेश ने बाकायदा इस रिपोर्टर का सवाल भी दिखाया और इस सवाल पर लोगों के उतरे हुए चहरे भी दिखाए. सहारा समय ने इस न्यूज़ में न्यूज़ 24 के इस पत्रकार के नाम का ज़िक्र भी किया जिसने नेताओं को तो मीडिया की सही भूमिका का एहसास कराया ही, साथ में मीडिया के महारथियों को भी आईना दिखा दिया. बस तभी से ये लाइने दिमाग में गूंज रही है…..

वो आया और तहलका मचाके चला गया

एक आइना सबको चेहरा दिखाके चला गया

हालांकि सवाल पूछना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है, मगर जब लालच के चलते सारे बड़े मीडिया समूह और इंदौर के सभी तीसमारखां पत्रकार मुंह में दही जमाये बैठे हों, जब सलमान के स्टारडम और ग्लैमर में घिरे पत्रकार उसके साथ खड़े होने या फोटो निकलवाने के लिए उतावले हो रहे हों तब उस स्टारडम के ग्लैमर और सिक्कों की खनक को नज़रंदाज़ कर इस तरह का सवाल पूछना सही तरीके से पत्रकारिता करने जैसा है और इसके लिए उस पत्रकार की पीठ थपथपाई जानी चाहिए ताकि वो तहलका मचाता रहे.

(यशवंत भाई, मैं अब पत्रकारिता छोड़ चुका हूं. एक पुराने चेले से ये टाइप करवा कर भेज रहा हूं.)

-सुरेन्द्र

ksurendrai.k@gmail.com

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Comments on “पैकेज मिलते ही मीडिया समूह चुप हुए

  • gaurav garg says:

    aise mamle har jagah hote hai lekin aise patrkaron ko ya toh yeh keh kar daba diya jata hai ki woh jayada bada pakage maang raha hoga ya phir use black mailer keh use aage hi nahi aane diya jata

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