पत्रकारों के सवालों से झल्लाए जबलपुर के कलेक्टर ने पत्रकारों को चुल्लू भर पानी में डूब मरने की नसीहत दे डाली. उन्होंने ये बात उस समय कही जब पत्रकार शहडोल संभाग के कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी से उनकी नयी कार के बारे में पूछ रहे थे. मामला उस समय हुआ जब मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री राघव जी जबलपुर में जबलपुर, शहडोल और रीवा संभाग की समीक्षा बैठक लेने आये थे.
इस समीक्षा बैठक में शहडोल संभाग के कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी बिना नंबर की लक्जरी फोर्ड इन्डिवर वाहन में जबलपुर आये थे. जब ये बात पत्रकारों को पता चली तो उन्होंने वित्त मंत्री के जाते ही कमिश्नर साहब को घेर लिया और उनसे इस लक्जरी फोर्ड इन्डिवर वाहन के बारे में सवाल दाग दिए. कमिश्नर साहब अपना बचाव करते हुए कहने लगे की सरकार ने ये सुविधा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कलेक्टर और कमिश्नर को प्रदान की है. इसी कारण इस सुविधा का लाभ हम उठा रहे हैं. ये बात जबलपुर कलेक्टर गुलशन बामरा को ठीक नहीं लगी और उन्होंने पत्रकारों को नसीहत देते हुए कहा की इस तरह के सवाल आप लोगों को यहां नहीं करने चाहिए. कमिश्नर साहब हमारे मेहमान है और उनसे इस तरह के आप लोग सवाल कर रहे हैं. आप लोगों को तो चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए.
अब साहब, कमिश्नर साहब आपके मेहमान हैं, और पत्रकार उनसे सवाल पूछ रहे हैं, और उन्हें इसका जवाब देने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है, तो आपको ख़राब बिल्कुल नहीं लगना चाहिए.
इधर शहडोल कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी ने ये भी कहा कि सरकार ने 15 हज़ार रुपये किराये पर कोई भी वाहन लेने के लिए कहा है. लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या 15 हज़ार रुपये में लक्जरी फोर्ड इन्डिवर वाहन किराये पर मिल सकता है. क्योंकि इस वाहन का एवरेज ही 6-8 प्रति किलोमीटर है. प्रदेश के वित्त मंत्री राघव का कहना है कि प्रदेश पर बहुत ढेर सारा कर्ज का बोझ है पर कमिश्नर साहब लक्जरी कार में घूम रहे हैं.
जबलपुर से आशीष विश्वकर्मा की रिपोर्ट












RAVI VERMA
April 29, 2010 at 2:48 pm
AISEE BAAT KAHANE WALA MANTREE AUR ADHIKAAREE DONO HI MOORKH HAIN.
ADHIKAAREE TOH APNE SIVA SABHEE KO GADHAA SAMAJHATE HAIN…IN GADHE NAUKARSHAHO SE YAH POOCHCHAA JAANAA CHAIYE KI 15000/-MONTHLY KIRAYE MEIN KITNI FORD ENDEVOUR GADIYAN DILAWA SAKATE HAIN. AUR DIESEL KYA UNAKE SASUR KAA JALEGA YA PRADESH KI GAREEB JANATAA KI MEHNAT KAA. BAHUT ACHCHE PATRAKAR MITRO…SAWALO KI AISI HEE MIRCHI GHUSEDO..;;
gopal pandit
April 29, 2010 at 3:11 pm
ये नक् चढ़े ऑफिसर को समझाना होगा की तुम लोक सेवक हो. पत्रकार हो या जनता दोनों से तमीज से बात किया करो. फिर नरेगा का पैसा गरीबों को रोजगार देने और भलाई के लिए आता है. यदि तुमको गाडी खरीदना ही थी तो कोई दूसरी खरीद लेते. फिर गुलशन बामरा तुमको इतना बुरा क्यों लग रहा है. यदि किसी ने पूछ ही लिया था तो जबाब दे देते, लेकिन ये कहना की पत्रकार चुल्लू भर पानी में डूब मरो या डूब जाओ कहना ठीक नहीं है. कलेक्टर को ये तो याद ही होगा की इनके जैसे ही किसी ऑफिसर के घर से ही तीन करोड़ रूपया निकला था तब क्या उस ऑफिसर से भी कहा था की चुल्लू भर पानी में डूब मरो. अरे ये मुफलिस कौम है इससे मत टकराना अगर बहुत घमंड हो की ऑफिसर हो और बड़े पाक साफ़ हो तब ही कोई बात कहना वर्ना सब जानते है की कौन क्या है.
hemant
April 29, 2010 at 4:13 pm
जबलपुर के वे पत्रकार कहा है जो मुनि के सामने झुकने में तो अपनी बेइज्जती समझते थे लेकन एक कलेक्टर ने इनकी ओउकत दिखा दी , अब वे क्या करेंगे ???? इस कलेक्टर की खबर लेंगे ???? या चुल्लू बहर पानी में डूब मरेंगे .
खबर तीसरी आंख . कॉम से साभार
manglesh_gajbhiye jabalpur
April 30, 2010 at 5:47 am
नरेगा के रुपयों की किस तरह होली ये वरिष्ठ अधिकारी होली खेल रहे है | ये इसी बात से पता चल जाता है एक तरह बालाघाट के कलेक्टर नवनीत कोठारी अपने बंगले का कायाकल्प करते है | और दूसरी तरफ शहडोल संभाग के कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी लक्जरी कार का इस्तेमाल कर रहे है | इससे ये साफ़ हो जाता है की गरीबों के रुपयों पर ये अधिकारी किस तरह डाका डाल रहे है, इसमें तो बड़ा घोटाला नज़र आ रहा है | इसकी तो CBI से जांच करनी चाहिए | नहीं तो ये अधिकारी अपनी मर्जी से कार्य करते रहेंगे और जनता के रुपयों के साथ होली खेली जाती रहेगी |
sumer kumar jabalpur
April 30, 2010 at 5:54 am
अब वो पत्रकार कंहा चले गए जो बड़ी डींगे मारते रहते थे | और आज उन्ही के शहर के कलेक्टर ने उन पत्रकारों को चुल्लू भर पानी में डूब जाने के लिए कहा है | सबसे बड़ी बात तो ये है की अगर नरेगा के रुपयों से अगर शहडोल संभाग के कमिश्नर ने लक्जरी कार खरीदी है | तो उसका विरोध पत्रकारिता के हिसाब से पत्रकारों को करना चाहिए था | लेकिन जबलपुर शहर के अखबारों में सिर्फ नई दुनिया में ही इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया है | जबकि भास्कर, पत्रिका, जैसे अखबारों ने इसे शायद खबर ही नहीं माना है | या फिर ये हो सकता है की कलेक्टर के तलवे इन अखबारों के पत्रकारों ने चाट लिए है | अरे पत्रकारों अगर किसी के तलवे ही चाटना है तो पत्रकारिता छोड़ दो | और कुत्ते की तरह किसी अधिकारी या नेताओ के तलवे चाटो | लेकिन पत्रकारिता को तो बदनाम मत करों |
sanjeev singh jabalpur
April 30, 2010 at 6:03 am
अभी हाल ही में भड़ास पर स्वामी जी के स्वागत के लिए पत्रकारों हुए बेताब एक खबर छपी थी | जिसमे जबलपुर में किस तरह पत्रकार स्वामी जी के स्वागत के लिए बेताब दिखाई दे रहे थे | और उस खबर पर कई टिपण्णी भी पत्रकारों ने की थी | लेकिन ये क्या आज उन्ही पत्रकारों को जबलपुर के कलेक्टर ने चुल्लू भर पानी में डूब जाने के लिए कहा तो सारे पत्रकार खामोश हो गए लगते है | लगता है की कलेक्टर की ये लोग चापलूसी करने में बड़े ही माहिर है | इसलिए तो इन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता है | या फिर इन लोगों को कुत्ते की तरह कलेक्टर के तलवे चाटने की आदत हो गयी है | वैसे भी कुत्ते को उसका मालिक कितना भी चिल्लाये लेकिन वो मालिक के प्रति वफादार होता है | ठीक उसी तरह जबलपुर के पत्रकार भी कुत्ते की तरह नज़र आने लगे है |
rewati,
April 30, 2010 at 6:39 am
अजित वर्मा ( जबलपुर पत्रकार संघ) , गंगा पाठक महाकोशल प्रेस क्लब , मनीष गुप्ता प्रेस क्लब, संजय चौधरी इलेक्ट्रोनिक मीडिया संघ, पंकज शाह वोर्किं जर्नलिस्ट उइओन , परमानन्द तिवारी श्रमजीवी पत्रकार संघ , अशिस शुक्ल युवा नगर पत्रकर संघ, संजय राठोड फोटो पत्रकार क्लब , राजेश मालवीय फोटो पत्रकार संघ, गिरीश पाण्डेय नगर पत्रकार संघ , के साथ जौर्नालिस्ट फोरम , वृहद पत्रकार संघ , मार्बल सिटी पत्रकार संघ, रांझी पत्रकार संघ, युवा पत्रकार संघ, के आलावा और भी कई लम्बरदार है जबलपुर में पत्रकरों के ( माफ़ करना यदि कोई नाम न लिखा हो क्योकि सब नाम के लिए तो ही है ) वे सब जबलपुर कोल्लेक्टोर की बात से सहमत देखते है , की सभी को आब तो चुल्लू भर पानी में डूब ही मरना चाहिए . कब तक बेईज्जेती सहोगे भाई लोग ,
rahul gaziyabadi
April 30, 2010 at 9:32 am
kamishnar yadi mehmaan bankar aaye the to sarkari vaahan se kyo aaye? yadi dm ne ynhen mehmaan bankar bulaya tha to kya media se pahle kaha tha ki wo niji tor par bulaye gaye hai? yadi koi dm is tarah ki tippni karne ki himmat kar raha hai to saaf hai ki us jile main patrkaaron ka nahin balki chatukaron aur patrkarita main ghse bethe dalalon ka bolbala hai. paak-saaf logon ko ese tathakathit kalamkaaron ko jute markar biradri se bahar ka rasta dikhana chahiye. tab hi aapke jile main patrkaaron aur patrkarita ki saakh kayam rah paegi.
gulshan saifi
April 30, 2010 at 10:54 am
agar patarkar bandhu jawab na de sake to wakai chullu bhar pani me doob marna hoga.sab milkar aawaz uthaye
sapan yagyawalkya
April 30, 2010 at 4:00 pm
Shirshak ka khabar se talmel nahin baith raha.chullu bhar pani me doobne ki bat collector ne kahi hai.Kair,collector ne sach hi kaha hai.jis pradesh me sarvatra sareaam bhrashtachar chal raha ho,vahan gadi-vadi ki chhoti-moti bat karne vale patrakaron ko collector aur kya nasihat dete? Sapan Yagyawalkya. Bareli(MP)
rk nirad
May 3, 2010 at 5:03 am
यह कोई चौकाने वाली बात नहीं है. नौकरशाही में इस तरह की बदमिजाजी का नमूना भर है. नौकरशाह जब बेलगाम, बेशरम, बदमिजाज और गैरजिम्मेदार हो तो ऐसा ही होता है. ऐसे अधिकारी अपना पानी (इज्जत) नहीं खो चुके होते हैं और अपनी हैसिअत चुल्लू में कर चुके होते हैं. लिहाजा उनसे बेहतर की उम्मीद नहीं की जा सकती.
आर के नीरद
rajesh shah
May 3, 2010 at 1:12 pm
कमिश्नर हीरा लाल बोला–मैं इतना कमा रहा हूँ भ्रष्टाचार कर कर के, तुम नहीं कमा रहे , इस वास्ते डूब मरो. चोरी करते शर्म नहीं आई, तो झूठ बोलने में कहे की शर्म. वाह रे भ्रष्ट हीरालाल !