सिस्टम की दरिंदगी ने क्रांतिकारी संपादक की ली जान

कोलकाता में शव के साथ निकाला जुलूस : साथियों ने कामरेड को दिया शहीद का दर्जा : सरकार की तरफ से प्रतिबंधित पर कम्युनिस्टों में लोकप्रिय माओवादी पत्रिका ‘पीपुल्स मार्च’ के संपादक कामरेड सपन दासगुप्ता के शव को लेकर बुधवार को कोलकाता में मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों लोग शरीक हुए। दासगुप्ता को यूएपीए कानून के तहत चार महीने पहले गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में उनकी मौत हो गई। 17 दिसंबर को दमे और सांस लेने में परेशानी के बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल किया गया था।

एपीडीआर नामक एक एनजीओ के सचिव सुजात भद्र ने आरोप लगाया है कि सरकार ने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया था। जेल से जब उन्हें अस्पताल में भेजा गया तो बिस्तर देने के बजाए फर्श पर सुलाया गया था। जब पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है, तब भी उन्हें रक्त नहीं दिया गया। दासगुप्ता की पत्रिका ‘पीपुल्स मार्च’ बांग्ला भाषा में प्रकाशित होती थी। दासगुप्ता के शव के साथ निकाले गए जुलूस में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कबीर सुमन और विभाष चक्रवर्ती भी शामिल थे। बाद में कामरेड का अंतिम संस्कार केवड़तला शमशानघाट में किया गया। जुलूस में शामिल लोगों ने बैनर पर यूएपीए का पहला शहीद समेत दूसरे नारे लिखे थे। साभार : जनसत्ता

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