देश में सरकारी प्रसारण माध्यमों- दूरदर्शन नेटवर्क और आल इंडिया रेडियो को पूरी आजादी और रचनात्मकता से चलाने के लिए गठित स्वायत्त संस्था प्रसार भारती के अंदर के ‘खेल-तमाशे’ अब जनता के सामने आने लगे हैं। दूरदर्शन, लोकसभा टीवी समेत जितने भी सरकारी चैनल हैं और आल इंडिया रेडियो का जो नेटवर्क है, उसमें समय-समय पर गड़बड़ियों, घोटालों, फर्जीवाड़ों, कायदे-कानूनों के उल्लंघनों के मामले आते रहे हैं लेकिन इन सरकारी मीडिया माध्यमों के स्वस्थ संचालन के लिए गठित प्रसार भारती में ही जब घोटाले होने लगे तो फिर तो इन माध्यमों का भगवान मालिक है। प्रसार भारती में गड़बड़ी की सुगबुगाहट काफी दिनों से थी लेकिन पिछले दिनों इसके चेयरमैन अरुण भटनागर द्वारा सीईओ बीएस लाली पर गंभीर आरोप लगाकर इस्तीफा देने के बाद अंदर चलने वाला ‘खेल’ जगजाहिर हो गया है।
प्रसार भारती के चेयरमैन अरुण भटनागर ने प्रसार भारती के सीईओ पर कई तरह के आरोप जड़े। इसमें एक पैसे-रुपये के गड़बड़-घोटाले का भी है। रिटायर आईएएस अफसर भटनागर ने इस्तीफे के बाबत प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने अपने दिल और प्रसार भारती का हाल विस्तार से बयान किया है। भटनागर ने इस्तीफे में सीईओ बीएस लाली को घेरा है। उन पर वित्तीय घपलों के साथ-साथ कार्यप्रणाली में पारदर्शिता न बरतने के आरोप लगाए हैं। भटनागर चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था से कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। सूत्रों का कहना है कि भटनागर और लाली में अनबन के मामले पहले भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तक पहुंचते रहे हैं लेकिन भटनागर के इस्तीफा देने के बाद स्थिति गंभीर हो गई है और अब सरकार को कोई निर्णायक कदम उठाना पड़ सकता है। नई सरकार के मंत्रिपरिषद गठन की कवायद से मुक्त होने के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नौकरशाह विवाद की पूरी फाइल अपने केंद्रीय मंत्री के सम्मुख पेश करेंगे। अगले कुछ हफ्तों में इस प्रकरण में नया मोड़ आने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।











