कोलकाता, पटना और भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार अब झारखंड में दस्तक देने का ऐलान कर चुका है। इस अखबार के रांची से प्रकाशन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कई लोगों ने मिलकर झारखंड के लिए इस अखबार की फ्रेंचाइजी ली है। रांची के हरमू बाइपास रोड पर आफिस के लिए बिल्डिंग भी खरीद ली गई है। झारखंड के संपादक के रूप में वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानवर्द्धन मिश्रा का नाम फाइनल हो चुका है। झारखंड में सन्मार्ग 16 पेज का अखबार होगा जिसमें 8 पेज रंगीन होंगे।
लांचिंग एडिटर के रूप में विख्यात ज्ञानवर्द्धन मिश्रा ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में कुबूल किया कि उन्हें सन्मार्ग को लांच और स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है। ज्ञात हो, ज्ञानवर्द्धन मिश्रा इससे पहले दैनिक हिंदुस्तान, रांची में ब्यूरो चीफ पद पर थे।
अपने 36 वर्षों के पत्रकारीय करियर में ज्ञान एचटी ग्रुप से 21 वर्षों से जुड़े हुए थे लेकिन खुद ज्ञान के शब्दों में, ”मुझे 21 मिनट का भी मौका नहीं दिया गया और प्रबंधन ने 21 वर्ष की सेवा के बदले एक झटके में खुद से अलग कर दिया। लेकिन जिसके हाथ में हुनर है, उसे नौकरी की दिक्कत नहीं होती।” ज्ञान को दैनिक हिंदुस्तान, धनबाद को लांच और स्थापित करने का श्रेय जाता है। इससे पहले वे 1979 में आज अखबार, पटना लांच करा चुके हैं। 83 में आच, रांची की लांचिंग कराई। पाटलिपुत्र टाइम्स, पटना को लांच कराने में माधवकांत के बाद ज्ञानवर्द्धन ने महती भूमिका निभाई। 2002 में दैनिक हिंदुस्तान, धनबाद को लांच कराया। अब सन्मार्ग को झारखंड में लांच कराने की बारी है।
ज्ञान ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसकी आठवीं पीढ़ी के लोग इन दिनों पत्रकारिता में विभिन्न मोर्चों पर सक्रिय हैं। ज्ञान के परदादा के परदादा पंडित रामलाल मिश्र पटना इंट्रेंस स्कूल (आज का पटना कालेज) में प्राध्यापक थे। धोती-टोपी की जगह टाई-कोट पहनकर कालेज आने के अंग्रेजी हुकूमत के फरमान के खिलाफ इस्तीफा देकर उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में इलाहाबाद से निकलने वाले अखबार हिंदुस्थान में बतौर सहायक संपादक ज्वाइन कर पत्रकारीय पारी शुरू की। तबसे हर पीढ़ी में कोई न कोई पत्रकारिता में शीर्ष पद पर रहा है। ज्ञान के पुत्र अमित भी पत्रकारिता में हैं और इन दिनों यूएनआई, रांची में कार्यरत हैं। ज्ञान के पिता पंडित रामजी मिश्र आर्यावर्त, पटना के एडिटर रहे।
ज्ञान के घर में एक निजी संग्रहालय है जिसमें पत्रकारिता के डेढ़ सौ वर्षों का इतिहास सुरक्षित है। इस संग्रहालय को अब पंडित रामजी मिश्र मनोहर मीडिया फाउंडेशन के अधीन कर दिया गया है। यह फाउंडेशन हर वर्ष एक खोजी पत्रकार को पुरस्कृत करता है। ज्ञानवर्द्धन मिश्रा बताते हैं कि बिहार का पहला अखबार बंधु 1872 में उनके घर से पब्लिश हुआ था। उसकी संपूर्ण फाइल अब भी रखी गई है। ऐसे ही दर्जनों दस्तावेज, अखबार, प्रमाण संग्रहालय के हिस्से हैं।











