
आज सबेरे आदिवासी बहुल सोनभद्र जनपद में एक खबर को लेकर जबरदस्त हड़कंप मच गया. “हिंदुस्तान” अखबार में छपी एक बड़ी खबर की गलत हेडिंग ने जहां भाकपा “माले” के कार्यकर्ताओं को सकते में डाल दिया, वहीं जनपद के 10 लाख आदिवासियों की बुनियादी मांग पर भी नए तरह का विवाद खड़ा कर दिया. चूंकि खबर के तीर को वापस म्यान में नहीं डाला जा सकता, इसलिए खबर से परेशान लोगों के पास माथा पीटने के अलावा कोई विकल्प नहीं शेष था. माले के नेताओं के पास स्पष्टीकरण देने के अलावा कोई और विकल्प शेष नहीं था.
महत्वपूर्ण है कि इन दिनों पूरे देश के आदिवासी किसान वनाधिकार कानून को पूरी तरह से लागू करने के लिए संघर्षरत हैं. ये बात लगभग सभी अखबारनवीस जानते हैं. आदिवासी बहुल सोनभद्र, चंदौली जनपद इस संघर्ष का गढ़ बने हुए हैं. इसी क्रम में भाकपा “माले” ने आदिवासियों को जंगल की जमीन पर पट्टा देने के लिए और वन अधिकार कानून को पूरी तरह से अमली जामा पहनाने के लिए रविवार को तहसील पर प्रदर्शन किया जिसमे 250 लोगों ने गिरफ्तारी भी दी. लेकिन हिंदुस्तान ने इस खबर को लीड स्टोरी के रूप में “वन अधिकार कानून के खिलाफ 250 ने दी गिरफ्तारी” शीर्षक से छाप दिया. और तो और, क्रासर भी लगा दिया कि “वन अधिकार कानून बना आदिवासियों के लिए बेदखली कानून”. आश्चर्यजनक तथ्य ये रहा कि खबर में मैटर बिलकुल सही और शीर्षक गलत. जैसे ही ये हेडलाइन लोगों ने सबेरे सबेरे पढ़ी, हड़कंप मच गया. माले के नेता जहां लोगों को सफाई देते मिले वहीं हिंदुस्तान के लोग परेशान दिखे. कवरेज पर आग बबूला माले नेता कलीम ने इस खबर के बाबत कहा कि कलम आप लोगों के हांथ में है, जो मर्जी छाप दीजिये.
सोनभद्र से आवेश तिवारी की रिपोर्ट












Ram Sunder Mishra"Raju"
February 9, 2010 at 10:17 am
hindustan samachar me ees tarah ki galatiya koyee nahi hai…eesase samachar ke prati akhabar ki gambhirata bhi pata chalati hai..ki akhabar apane samachar ke prati gambhir nahi hai..nahi eetani badi galati nahi kar sakata … akhabar ke khilaf karyavahi hone chahiye
rajesh singh
February 9, 2010 at 10:39 am
jab shahi ka dande ke bal par kam karaynge to aisa hi hoga. kyoki unhe to apne laye log hi kam karne wale dikte hain baki sab to gadhey hain. shashi ji is masasge ko pade to atme manthan kare ki kya sab kharab. apka bhi kabhi bura samay ayega.
ganesh upadhyay, reporter
February 9, 2010 at 1:20 pm
ye sab desk ki kalakari ka namuna hai.desk wale news k saanth cherakhani karna apana dharam samajte hain. chahe nateeja kuch v ho. ye to har roj hota hai hindustan main. sasiG dehradun k akhbaar m v jara najar to daalo….wahan to har roj kalakaari hoti rahti hai….
S.K.Verma
February 10, 2010 at 10:03 am
jis akhbaar ka group editor bangladesh ko 1975 me azad likhta ho us akhbaar me kuchh bhi ho sata hai.
pk kumar
February 10, 2010 at 7:16 pm
hindustan maneger ki company hai bhai kam karne wale ka koi value nahi hai to is tarah ki galti koi nayi bat nahi hai es tarah ki galti agge bhi hoti rahegi jab tak compani kam karne walo ki pagar sahi nahi karti