टाइम्स आफ इंडिया ग्रुप और हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप की संयुक्त पैदावार अंग्रेजी टैबलायड ‘मेट्रो नाऊ’ के बंद होने की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि आज यह अखबार अंतिम बार छपने के लिए जाएगा। उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फरवरी 2007 में देश के दो शीर्षस्थ मीडिया घरानों ने मिलकर अंग्रेजी टैबलायड ‘मेट्रो नाऊ’ को दिल्ली में धूम-धड़ाके से लांच किया। देखते ही देखते इस अखबार की लाखों कापियां बिकने लगी। अखबार को प्रमोट करने के लिए जबर्दस्त स्कीम भी शुरू की गई। राष्ट्रीय राजधानी के पाठकों ने इस अखबार को हाथोंहाथ लिया। लेआउट, कापीराइटिंग, कंटेंट, डिजायनिंग सभी विधाओं में सराहनीय प्रयोग किए गए।
यह अखबार प्रसार भी अच्छा-खासा पा गया। बताया जाता है कि रेवेन्यू के मामले में इसने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। सूत्रों की मानें तो टीओआई और एचटी ग्रुप में इस अखबार को चलाने को लेकर कुछ आंतरिक मतभेद पैदा हुए जो बाद में बढ़ते गए। जानकारों का कहना है कि रेवेन्यू जनरेट करने के मामले में विख्यात टीओआई और एचटी ग्रुप के लिए इस प्रोडक्ट के नाम पर बिजनेस जुटाना कोई मुश्किल काम नहीं है पर मूल दिक्कत दोनों ग्रुपों में इस अखबार के संचालन को लेकर अनबन होना है। इसी के चलते ‘मेट्रो नाऊ’ पर गाज गिराई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि आज रात मेट्रो नाऊ के बंद किए जाने की घोषणा की जा सकती है।
मेट्रो नाऊ इन दिनों संपादक सोनी सांगवान के नेतृत्व में निकल रहा है। इससे पहले कमलेश सिंह संपादक हुआ करते थे जिन्होंने पिछले दिनों इस्तीफा देकर भास्कर ग्रुप ज्वाइन कर लिया और इन दिनों दैनिक भास्कर, पंजाब के स्टेट हेड हैं। बताया जाता है कि मेट्रो नाऊ की दिल्ली में अब भी डेढ़ लाख कापियां बिक रही हैं। आर्थिक मंदी में शहीद होने वाला दूसरा बड़ा अखबार है मेट्रो नाऊ। इससे पहले मुंबई से युवा अखबार का प्रकाशन यह कहते हुए बंद कर दिया गया था कि आज के युवा अखबार की बजाय नए मीडिया माध्यमों में ज्यादा भरोसा करते हैं और दिलचस्पी दिखाते हैं।











