कास्ट कटिंग, छंटनी के बाद मंदी की मार से निपटने को हिंदी-अंग्रेजी अखबारों ने दाम बढ़ाना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों अखबार के दाम में वृद्धि के बाद बनारस युद्ध का अखाड़ा बन गया। हाकर बागी हो गए। हड़ताली बन गए। पर हफ्ते भर की जंग रंग न ला सकी। हाकर हार गए। बनारस के तीन बड़े अखबारों- जागरण, हिंदुस्तान और उजाला ने नगर संस्करण की कीमत साढ़े तीन और डाक संस्करण की कीमत चार रुपये की तो हाकर इसी अनुपात में कमीशन न बढ़ाए जाने से नाराज हो गए।
हाकरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। इस ऐलान के खिलाफ सभी अखबार एकजुट हो गए। पुलिस वालों की मदद ली। पुलिस चौकियों से अखबार बिकवाया। हड़ताली ढाई हजार हाकरों का कहना था, ”इन बड़े अखबारों ने दाम तीन से साढ़े तीन रुपये तो कर दिए लेकिन घर-घर अखबार पहुंचाने वाले पत्र विक्रेताओं का कमीशन महज पांच पैसे ही बढ़ाया।” इन हाकरों के मुताबिक, ”अखबारों की कमाई उस पर छपे महंगे विज्ञापनों से होती है इसलिए प्रबंधन को आनुपातिक कमीशन वृद्धि की जायज मांग मान लेनी चाहिए।”
अखबार प्रबंधन हाकरों की मांग पर कान देने की बजाय पुलिसिया मदद से हड़ताल तोड़ने में जुट गया। शहर के पुलिस बूथों से अखबार बंटवाना के साथ-साथ पहले पेज पर संयुक्त विज्ञापन छापकर जनता से अखबार न मिलने पर कुछ नंबरों पर फोन करने का अनुरोध किया। हाकरों ने जनता की मांग की पूर्ति के लिए सबसे कम दाम वाला ‘आज’ अखबार बांटना शुरू कर दिया। ‘आज’ प्रबंधन बढ़ी हुई मांग की पूर्ति न कर सका। इसके पीछे मुख्य वजह मशीनों की छापने की सीमा का आड़े आना और ‘आज’ प्रबंधन द्वारा अखबार के धंधे में रुचि न लेना बताया जाता है। पर शाम के मशहूर अखबार ‘गांडीव’ ने हाकरों का कम से कम इतना तो साथ दिया कि हफ्ते भर तक हड़ताल की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की।
अंग्रेजी अखबार भी दाम बढ़ाने लगे हैं। प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ के प्रबंधन ने मंदी से निपटने के लिए दिल्ली में अखबार का दाम ढाई से बढ़ाकर तीन रुपये कर दिया गया है। सत्रों के मुताबिक टीओआई भी हैदराबाद, कोलकाता, बंगलोर और चेन्नई में कवर प्राइस 50 पैसे बढाने वाला है। मुंबई में दाम पहले ही 3.50 रुपये से बढ़ाकर 4 रुपये किया जा चुका है। दिल्ली को लेकर अभी कुछ तय नहीं हुआ है। बंगलोर में ‘डीएनए’ के लांच होने से जो कंपटीशन शुरू हो चुका है, उसे देखते हुए टीओआई प्रबंधन संभव है कि यहां दाम न बढ़ाए। सूत्रों के अनुसार कई न्यूजपेपर डिस्ट्रीब्यूटरों की बातचीत हिंदुस्तान टाइम्स एवं टाइम्स आफ इंडिया के शीर्ष अधिकारियों से चल रही है। यह बातचीत मूल्य वृद्धि को लेकर ही है। कहा जा रहा है कि रद्दी के दाम बढ़ने से भी मीडिया हाउस कवर प्राइस बढ़ाने को मजबूर हो रहे हैं।
बनारस में हाकरों की हड़ताल के बारे में मशहूर ब्लागर अफलातून ने अपने ब्लाग पर दो पोस्टें लिखी हैं, पढ़ने के लिए क्लिक करें-











